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एड्स सुसाइटी ऑफ़ इंडिया का 13वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन(एसीकॉन )हैदराबाद में 3 से लेकर 5 अप्रैल 2022 तक संपन्न होगा

 


 विजन लाइव/ हैदराबाद

एड्स सुसाइटी ऑफ़ इंडिया का 13वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन(एसीकॉन )हैदराबाद में 3 से लेकर 5 अप्रैल 2022 तक संपन्न होगा। इस अधिवेशन में देश भर से अनेक सरकारी और निजी एचआईवी संबंधी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े चिकित्सकीय और जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। डा0 ईश्वर गिलाडा अध्यक्ष 13वां एसीकॉन/अध्यक्ष एड्स सुसाइटी ऑफ़ इंडिया ने बताया कि एसीकॉन हर साल अनेक एचआईवी.सम्बंधित संस्थाओं की साझेदारी में एड्स सुसाइटी ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित किया जाता रहा है, जिनमें प्रमुख हैं, भारत सरकार की राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था, भारत सरकार का राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, भारतीय चिकित्सकीय अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सकीय आयोग, विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र का एड्स नियंत्रण संयुक्त कार्यक्रम आदि। एसीकॉन अधिवेशन में अमरीका, इंगलैंड, इटली आदि जैसे अनेक देशों के एचआईवी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विशेषज्ञ सक्रिय भाग लेंगे। एसीकॉन अधिवेशन में एचआईवी संबंधित अनेक मुद्दों पर विशेष ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित होंगे जैसे कि एचआईवी.टीबी सह.संक्रमण, एचआईवी और हेपटाइटिस सह.संक्रमण, एचआईवी और यौन रोग, एचआईवी वैक्सीन शोध, एचआईवी और कोविड, एचआईवी संक्रमण से बचने के लिए नए विकल्प जैसे कि प्री.इक्स्पोज़र प्रॉफ़लैक्सस ( प्रेप ) पोस्ट.इक्स्पोज़र प्रॉफ़लैक्सस और एचआईवी के साथ जीवित लोगों के लिए जीवनरक्षक दवाएँ जिन्हें एंटी.रेट्रो.वाइरल दवाएँ कहते हैं उनसे संबंधित नवीनतम शोध, एचआईवी और बच्चे एवं महिलाएं आदि। एसीकॉन अधिवेशन में २०२० तक एचआईवी संबंधित वादे जैसे कि ९०रू९०रू९० पर हम कितने खरे उतरे, २०२५ वाले लक्ष्य और २०३० तक एड्स उन्मूलन के वादे पर प्रगति एवं उसके मूल्यांकन पर भी सत्र रहेंगे।


वर्तमान में भारत में 23 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं जिनमें से 76 प्रतिशत को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 84 प्रतिशत लोगों को जीवनरक्षक एंटी.रेट्रो.वाइरल दवाएँ मिल रही हैं और जिन लोगों को वाइरल.लोड जांच नसीब हुई उनमें से 84 प्रतिशत में वाइरल.लोड नगण्य है। उन्होंने बताया कि दुनिया में पिछले दशक 2010-.2019 के दौरान एचआईवी संक्रमण में सालाना गिरावट 23 प्रतिशत की आयी पर भारत में यह 37 प्रतिशत गिरावट आयी है। पिछले दशक में एड्स संबंधित मृत्यु दर में भी भारत में 66 प्रतिशत गिरावट आयी है जबकि इसी समय अवधि में दुनिया में 39ः प्रतिशत गिरावट आयी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल प्रदेशों में एचआईवी.संबंधित मृत्यु दर में और अधिक गिरावट आयी है, ख़ासकर कि बच्चों और महिलाओं में ;73.7 प्रतिशत और 65.3ः प्रतिशत तक है। अनेक सफलताओं के बावजूद यदि २०३० तक एड्स उन्मूलन के सपने को साकार करना है तो यह ज़रूरी है कि विकराल चुनौतियों को भी हम चिन्हित करें और सुनियोजित ढंग से वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर प्रभावकारी तरीक़े से एचआईवी कार्यक्रम की कार्यकुशलता बढ़ाएं। तीन प्रदेशों में २०१९ के आँकड़ों के मुताबिक़ए आबादी में १ प्रतिशत से अधिक एचआईवी संक्रमण है,मिज़ोरम 2.32 प्रतिशत, नागालैंड 1.45 प्रतिशत, मणिपुर 1.18 प्रतिशत तक है। इनमें जो लोग नशीली दवाओं का सेवन करते हैं उनमें एचआईवी संक्रमण दर लगभग 28 गुना अधिक है। हिजडा यानी किन्नर, समलैंगिक समुदाय और महिला यौन.कर्मियों में भी एचआईवी दर 6 से 13 गुना अधिक है। केंद्रीय कारागार में भी एचआईवी संक्रमण दर लगभग 9 गुना अधिक है।

2019 में भारत में 69,000 नए लोग एचआईवी से संक्रमित हुए। ग़ौरतलब है कि २०२० तक भारत समेत सभी देशों को एचआईवी से संक्रमित हो रहे नए लोगों के दर में 75 प्रतिशत गिरावट लानी थी पर २०१९ में नए संक्रमित हुए लोग ;69,000 इस हिसाब से दुगने से अधिक रहे। कोविड के कारणवश एचआईवी और टीबी कार्यक्रम पर भी कुप्रभाव पड़ा। जब २०२० में सरकार ने देश.व्यापी तालाबंदी की, तो एड्स सुसाइटी ऑफ़ इंडिया ने सरकार के साथ समन्वयन में पूरा प्रयास किया कि एचआईवी के साथ जीवित लोग, बिना नागे के जीवनरक्षक दवाएँ नियमानुसार लेते रहें और स्वस्थ रहें। सरकारी और निजी वर्ग में एचआईवी संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में समन्वयन ज़रूरी रहा है। टीबी उन्मूलन के वादे को पूरा करने के लिए सिर्फ़ ४५ माह रह गए हैं और एड्स उन्मूलन के वादे को पूरा करने के लिए १०५ माह रह गए हैं। एसीकॉन अधिवेशन में शोध पत्र और अन्य सत्र के ज़रिए न सिर्फ़ यह स्पष्ट होगा कि २०२५ तक टीबी उन्मूलन और २०३० तक एड्स उन्मूलन की दिशा में हम वर्तमान में कहां पर हैं, बल्कि यह अवसर भी रहेगा कि एचआईवी और टीबी कार्यक्रमों को कैसे अधिक कार्यकुशलता के साथ क्रियान्वित करें कि हम इन लक्ष्यों पर खरे उतरें।