राष्ट्रीय लोक दल महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष चौधरी प्रियंका अत्री एडवोकेट समेत कार्यकताओं ने परी चौक और एक्सप्रेस वे पर ही अपनी पंचायत चालू कर दी

 








विजन लाइव/गौतमबुद्धनगर

तीन कृषि कानून का विरोध में सोमवार को किसानों ने गौतमबुद्धनगर में हल्ला बोल प्रदर्शन किया। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 2 मेट्रो स्टेशन से परी चौक की तरफ सुबह 10.00 बजे कुच किया, जिनको शारदा मेट्रो स्टेशन के पास पुलिस बल द्वारा वेरीकेट लगाकर रोक दिया। किसानों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिससे किसान एक्सप्रेस वे पर ही धरना देने लगे और एक्सप्रेस वे पर ही अपनी पंचायत चालू कर दी,इससे ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर काफी लंबा जाम लग गया। वहीं राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह के आदेशानुसार संयुक्त मोर्चा के भारत  बंद आह्वान को यमुना एक्सप्रेसवे जेवर टोल पर पहुंचकर जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने पूर्ण समर्थन दिया। जब कि राष्ट्रीय लोक दल महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष चौधरी प्रियंका अत्री एडवोकेट समेत कार्यकताओं ने परी चौक और एक्सप्रेस वे पर ही अपनी पंचायत चालू कर दी। डीसीपी विशाल पांडे ने किसानों के बीच पंचायत में पहुंचकर जाम खुलवाने का आग्रह किया जिसमें पंचायत ने फैसला दिया गौतमबुद्धनगर के किसानों की मूल समस्याओं का निस्तारण प्राधिकरण द्वारा तुरंत कराया जाता हो तो हम नोएडा एक्सप्रेसवे को आमजन के लिए खोल सकते हैं, उसके बाद कुछ समय बाद सहमति बनी और तीनों प्राधिकरण के एसीईओ एवं अन्य अधिकारी के साथ वार्ता हुई, जिसमें मुख्य समस्या गौतमबुद्धनगर के युवाओं की बेरोजगारी रही। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के प्रदेश प्रवक्ता पवन खटाना ने कहा कि गौतमबुद्धनगर के युवा को ही नौकरी नहीं मिल पा रही है, कंपनी वाले अपनी कंपनी से 200 किलोमीटर दूर के लोगों की भर्ती कर रहे हैं, जिन किसानों की जमीन गई है, जो लोग भूमिहीन हो चुके हैं, उन सभी लोगों को कंपनी में नौकरी देनी चाहिए, वरना वही लोग अपनी जेब खर्च के लिए क्राइम की तरफ आकर्षित होंगे और गौतमबुद्धनगर में क्राइम ज्यादा होगा। अगर वही युवा किसी कंपनी में नौकरी करेगा तो वह अपना अपने परिवार का पेट भरने का कार्य करेगा, तीनों प्राधिकरण में आबादियों का निस्तारण होना चाहिए या शिफ्टिंग पॉलिसी लानी चाहिए, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान होगा। गौतमबुद्धनगर के सभी किसानों के 10 प्रतिशत के प्लॉट तुरंत मिलने चाहिए। साथ ही जिन किसानों के 64 प्रतिशत मुआवजा नहीं मिला है उनको तुरंत मुआवजा मिलना चाहिए, इन सभी मुद्दों पर काफी गहनता से चर्चा की गई, जिसमें सभी एसईओ एवं अन्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि 15- 10- 2021 तक सभी समस्याओं का निस्तारण कर दिया जाएगा।