सरपंच नीरज नागर नवादा

---------------------------- भारत में प्रतिवर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह को वन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह महोत्सव वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने के लिए तथा पर्यावरण व प्रकृति को संरक्षित रखने के लिए मनाया जाता है। सन 1960 > में भारत सरकार के तत्कालीन कृषि मंत्री श्री कन्हैया लाल ने पर्यावरण संरक्षण हेतु और प्रकृति को हरा.भरा व सुंदर बनाने के लिए एक आंदोलन के माध्यम से इस महोत्सव की शुरुआत की थी। तब से हर वर्ष लगभग करोड़ों पौधे रोपित किए जाते हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उनमें से महज हजारों पौधों को ही हम सुरक्षित रख पाते हैं। ऐसे तो वन महोत्सव का उद्देश्य साकार नहीं हो सकता। उसके लिए केवल सरकार को ही नही बल्कि हर एक नागरिक को अपनी अपनी जिम्मेदारी और भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। जिसमें केवल पेड़ पौधे लगाना ही नहीं है बल्कि उन्हें बचाना भी होगा। दीवारों और अनुचित जगह जैसे कूड़ी आदि पर उगे पेड़ पौधों को अन्य उचित जगह पर रोपित करके उन्हें जीवनदान देना होगा। मेरा मानना है केवल पौधे लगाना ही कोई बड़ी बात नहीं है, ">बड़ी बात है पौधों को वृक्षों के रूप में तब्दील करना। उसके लिए हमें धरातल पर काम करना होगा, जमीन पर पेड़ पौधे लगाने होंगे, उन्हें संरक्षित करना होगा, उन्हें वृक्षों के रूप में तब्दील करना होगा। केवल कागजों में पेड़ लगाने से कुछ नहीं होगा क्योंकि फेसबुक और कागजों पर उगाये गए पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते। जैसे कोई माता पिता या संरक्षक अपने बच्चों का लालन पालन करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमें भी अपने द्वारा लगाए गए पौधों को और प्रकृति की गोद में स्वयं उपजे बीजों को संरक्षित कर उनकी देखभाल करनी होगी। जिस दिन हम इन पौधों को जीवन दान देकर वृक्ष के रूप में तब्दील कर देंगे असल मायनों में वन महोत्सव का उद्देश्य तब ही सार्थक हो पाएगा। इसलिए मैं तमाम साथियों से अनुरोध करना चाहता हूं कि पेड़ भले ही कम लगाएं परंतु जितने भी लगाएं उन सब की देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करें।

लेखकः-सरपंच नीरज नागर नवादा संयोजक. पर्यावरण संरक्षण समिति नवादा और जिला कार्यकारिणी सदस्य हिन्दु युवा वाहिनी गौतमबुद्धनगर हैं।