विजन लाइव/गौतमबुद्धनगर

गौतमबुद्धनगर पेरेंट्स वेलफेयर सोसाइटी की उच्च न्यायालय मे डाली गई जनहित याचिका पर सुनवाई आगामी 5 जुलाई को जाएगी। 5 जुलाई को जनहित याचिका पर जस्टिस संजय यादव व जस्टिस प्रकाश पांड्या की बेंच द्वारा सुनवाई की जाएगी। यह जानकारी उनके अधिवक्ता अर्चित मेहरोत्रा ने दी है। याचिकाकर्ता मनोज कटारिया ने बताया कि 2018 में राज्य सरकार द्वारा लाए गए स्कूल फीस रेग्युलेशन ऐक्ट द्वारा ट्यूशन फीस, अनुअल चार्ज एवं अन्य मदों पर लिए जाने वाले शुल्क को एक साथ मिलाकर अनुअल कंपोजिट फीस बना दी गई थी। जिससे अभिभावकों को अपने नुकसान के साथ.साथ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले वर्ष जब अभिभावक स्कूल से शिक्षकों को वेतन देने के लिये सिर्फ ट्यूशन फीस लेने की बात कहते थे। उस समय अधिकांश स्कूल यह कहकर उनकी बात अस्वीकार कर देते थे कि सरकार ने अनुअल कंपोजिट फीस बना दी है तो अब ट्यूशन फीस को अलग करके बताना मुश्किल है। दूसरा अभिभावकों को इंकम.टैक्स रिटर्न में छूट के लिए ट्यूशन फीस की रसीद की आवश्यकता होती है, जो अब कंपोजिट फीस के कारण मुश्किलें खड़ी हो रही थी और तीसरा अभिभावकों को कंपोजिट फीस में यह तय करना मुश्किल हो रहा था कि किस मद में स्कूल उनसे कितनी फीस वसूल कर रहा है। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जब अभिभावक अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने स्कूल फीस में छूट के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो समय भी ट्यूशन फीस के विकल्प नहीं होने के कारण हमारी अभिष्ट के नाम से जनहित याचिका का रद्द होने का डर था और डर आज भी है। यदि यह जनहित याचिका मनोज कटारिया के नाम से का निर्णय हमारे पक्ष में लिखा जाता है तो फीस छुट में डाली गई अन्य याचिकाओं को भी इस याचिका के निर्णय का लाभ मिलेगा ।