चाहे केंद्र की सरकार हो और चाहे किसी राज्य की सरकार हो इन सब के दावे और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है।
यह बात मैं कोई जनता में हड़बड़ाहट ,घबराहट  अथवा पैनिक फैलाने के लिए नहीं कह रहा हूं बल्कि वास्तविकता से अवगत करा रहा हूं।
मेरे छोटे भाई राकेश कुमार आर्य एडवोकेट चीफ एडिटर उगता भारत को 17 अप्रैल से बुखार की शिकायत थी।
जांच कराने पर उनके रिपोर्ट कोविड पॉजिटिव आई।
कोविड़  की रिपोर्ट तीसरे दिन शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा से प्राप्त हुई। लिहाजा शीघ्र रिपोर्ट दिए जाने के दावे  भी खोखले साबित हुए।
शर्मा हॉस्पिटल डेल्टा 2 ग्रेटर नोएडा में  एच आर सीटी स्कैन कराने के लिए गए। 
आपको ध्यान होगा कि शर्मा हॉस्पिटल डेल्टा 2 ग्रेटर नोएडा एक घोषित कोविड अस्पताल है ।उसके अंदर बहुत सारे बेड हमने खाली देखें ।परंतु भर्ती के नाम पर लोगों से कहा जा रहा था कि बेड खाली नहीं है।
यह व्यवस्था है इन अस्पतालों की।
हमने ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए स्थानीय प्रशासन के उच्चाधिकारियों से संपर्क साधा लेकिन सभी मौन रहे। किसी भी प्रकार का जवाब देने  का स्थानीय प्रशासन के उच्चाधिकारियों का  कोई उत्तर दायित्व नहीं बनता।
उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री  माननीय योगी आदित्यनाथ जी, व दोनों उपमुख्यमंत्री द्वारा जनता को जो व्यवस्था ठीक करा दिए जाने का भरोसा दिलाया जा रहा है वह निरर्थक एवं भ्रामक है। मैं दोनों सम्मान के योग्य उप मुख्यमंत्रियों वा  माननीय मुख्यमंत्री को सुझाव देना चाहूंगा जरा बाहर निकल कर जनता की परेशानी को अस्पतालों के दरवाजों पर देखें ,वास्तविकता आपको मिल जाएगी, यथार्थ के दर्शन आपको हो जाएंगे।

उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की ओर से अपर मुख्य गृह सचिव व स्वास्थ्य सचिव के द्वारा जो व्यवस्था को संभालने का प्रयास करने का भरोसा दिलाया जा रहा है वह भी यथार्थ के धरातल पर खोखले हैं।
जनता त्राहिमाम _त्राहिमाम कर रही है ।जनता कराह रही है।  अस्पतालों पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण राज्य सरकार का नहीं है।
इसका मतलब यह भी नहीं कि व्यवस्था संभालने के लिए कार्य नहीं करना चाहिए कार्य करना चाहिए यह सरकार का राष्ट्रीय परम एवम प्राथमिक उत्तरदायित्व है ।जनता मर रही है उसको बचाना सरकार का परम कर्तव्य है ।परंतु जिस तरह से उपाय किए जा रहे हैं वह नाकाफी हैं।
श्री फकीर चंद नागर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा हमको सुझाव दिया गया कि ग्रेटर नोएडा स्थित जिम्स में भाई को लेकर के जाए वहां पर एक बेड की व्यवस्था हो सकती है। हम दिनांक 25 अप्रैल को भाई राकेश कुमार आर्य एडवोकेट चीफ एडिटर उगता भारत समाचार पत्र को लेकर जिम्स हॉस्पिटल गए ।वहां जाते ही बताया गया कि कोई बेड खाली नहीं है ।सब बेड फुल है। जिम्स हॉस्पिटल में जिन लोगों की सिफारिश के टेलीफोन हॉस्पिटल प्रबंधन के पास पहुंच रहे थे उनके लिए बेड खाली थे।
जनता को शांत करने के लिए जिम्स हॉस्पिटल के गार्ड और पुलिस की सहायता लेकर मेडिकल अथवा पैरामेडिकल के लोग जनता को हांकने में लगे हुए थे ।कोई जनता की हांफने की आवाज को नहीं सुनने अथवा पहचानने का प्रयास कर रहा था।
 कोई अपने भाई के लिए, कोई अपने पति के लिए, कोई अपनी पत्नी के लिए, कोई अपने किसी अन्य संबंधी के लिए रो रहा था, पुकार लगा रहा था ,लेकिन अस्पताल प्रबंधन के कानों पर जूं नहीं रेंग रही थी। केवल वही  लोग हॉस्पिटल में दाखिल किए जा रहे थे जिनके अनुशंसा के टेलीफोन पहले आ चुके थे। अस्पताल प्रबंधन के लोग रिसेप्शन पर क्लियर बोल रहे थे आपका टेलीफोन आ चुका है। उन्होंने अनुशंसा के टेलीफोन नंबर की सूची बनाई हुई थी जिसको देखकर वह बता देते थे कि आपका टेलीफोन आ चुका है।यह बात वह अपने रिसेप्शन से टेलीकास्ट कर रहे थे।
जिन की सिफारिश नहीं थी उनकी कोई भर्ती नहीं हो रही थी।
हमारे साथ में ऐसे समय में जो खड़े हुए  उनमें माननीय विधायक   दादरी श्री तेजपाल सिंह नागर, श्री फकीर चंद नागर समाजवादी पार्टीके वरिष्ठ नेता, डॉक्टर महेंद्र नागर कांग्रेस के नेता, तथा उन के भतीजे प्रिय अनुज नागर एडवोकेट ,जिन्होंने हमें भरपूर सहयोग का आश्वासन दिया । जिनके सहयोग के लिए  हम ऋणी है।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन श्री दिवाकर सिंह का भी सहयोग प्राप्त हुआ।
एसडीएम दादरी का भी सद्भाव हमको मिला। जिनकी हम मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हैं।
अब देखे दूसरे सूरते हाल।
आज देश में
सैनिटाइजेशन के नाम पर दिखावा हो रहा है।
 कितनी ही सोसाइटी के लोग दर्द से कराह रहे हैं।
ग्रेटर नोएडा अथवा नोएडा जैसे ऊंची इमारतों के शहर में प्रत्येक व्यक्ति को बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है ।वहीं दूसरी तरफ दवाओं के कालाबाजारी बड़े उच्च स्तर पर चल रही है।
ऑक्सीजन की कमी से लोग जूझ रहे हैं।
अस्पताल हाथ खड़े कर रही हैं। तीमारदारों से कह रही हैं कि अपने आप लेकर आएं ऑक्सीजन।
 रेमदेसीविर इंजेक्शन , दवा अपने आप  लेकर आओ।
लोग परेशान हैं दवाई, रेमदेसीविर और ऑक्सीजन के लिए भटकते फिर रहे हैं।
कुछ अस्पताल प्रबंधन को तो यह भी मालूम है कि रेमदेसीविर कहां उपलब्ध है, और ऑक्सीजन कहां उपलब्ध है ।वह कालाबाजारी का  सब पता भी बताते हैं चुपचाप।
इसमें किसी मिलीभगत की तरफ सुई घूमती है।
जब देश में कोरोना की दूसरी लहर फैल रही थी तो हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री देश में फैली बीमारी को नजरअंदाज करते हुए बंगाल जीतने की युक्ति  लगा रहे थे ।हमारे देश से वैक्सीन दूसरे देशों में भेजी जा रही थी जिससे कि वैश्विक स्तर पर प्रशंसा के पात्र बन सके।
पहले अपने घर का ध्यान किया होता तो शायद यह स्थिति  न आती जो आज आ रही है।
मैं यहां यह भी लिखने में संकोच नहीं करता हूं कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जी के प्रबंधन के प्रयास अच्छे है,परंतु यह भी मेरा पावन उत्तरदायित्व है कि मैं अपने उच्चतम प्रबंधन को इन तमाम वास्तविकता से, जनता की परेशानी से ,अवगत कराऊं जिससे कि व्यवस्था में परिवर्तन कर दुरुस्ती की जा सके।
यह ठीक है कि अब सरकारा थोड़ा गंभीर हुई है इस बीमारी के प्रति ,परंतु जो लापरवाही हो चुकी और जिससे जो नुकसान होना था वह हो चुका। जिसकी छतिपूर्ति नहीं की जा सकती।
हम अपने देश की बहुत सारी विभूतियों को, जन नायकों को ,नेताओं को, लेखकों को ,बुद्धिजीवियों को, अधिवक्ताओं को, न्यायाधीशों को , ब्यूरोक्रेट्स को और साधारण जन को खो चुके हैं।
सभी की जान हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
कल्पना करने मात्र से सिहर उठता हूं कि जब मालूम पड़ता है कि माता और पिता दोनों का साया बच्चों के सिर से उठ चुका है और कोई कमाने वाला घर में अब नहीं रहा।
क्या होगा उन्होंने बच्चों का।
विपक्ष भी अपना कार्य बहुत अच्छी तरीके से कर रहा है सरकार को कोसने के लिए और केंद्र और राज्य सरकार को दोष आरोपित करने में और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में।
यद्यपि साधारण जनता के लोग भी इसमें भागीदार हैं जिन्होंने दूसरी लहर के लिए सहभागिता निभाई है। लापरवाही दिखाई है।
मास्क नहीं पहनना, अनावश्यक बाजार के लिए निकलना ,शादी समारोह में अधिक से अधिक भीड़ इकट्ठी करना।
दूसरी ओर राजनीतिक लोगों द्वारा
बंगाल व अन्य प्रांतों के चुनाव जीतने के लिए भीड़ इकट्ठा करना। यह सब ऐसे कारक हैं जिनसे यह बीमारी अधिक से अधिक फैली।

एक कहावत है जिस समय प्यास लगे उस समय कुआं खोद लेना।
जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री ने घोषणा की है ।तथा पीएम केयर्स फंड से 551 प्लांट जिला अस्पतालों में लगाने की मंजूरी दी है। यह अक्सीजन प्लांट कब तक बनकर कब तैयार होंगे? और इनसे ऑक्सीजन कब प्राप्त होगी ?
तब तक हम कितनी ही महत्वपूर्ण जिंदगियों को खो चुके होंगे ।यह कोई निश्चित नहीं है।
जीवन का अर्थ उनसे पूछो जो एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं । जिनके स्वजन रो रहे हैं।
जिनके परिजन  अस्पताल में एक बोतल पानी अपने बीमार परिजन के पास पहुंचाने के लिए अस्पताल के गेट पर कर्मचारियों से गिड़गिड़ा रहे  है।अस्पताल के अंदर मरीज को पानी नहीं दिया जा रहा। दवाई समय पर नहीं दी जा रही। उसको मरने और तड़पने के लिए छोड़ा जा रहा है। ऐसे में बेहतर होगा अस्पतालों के तरफ लोग ना भागे। घर में रखकर अपने मरीज की केयर करें।
माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कह रहे हैं कि सरकारी बेड न मिलने पर प्रदेश सरकार उठाएगी निजी अस्पताल का  खर्च।
जब निजी अस्पताल किसी को एडमिट करें तभी तो ऐसी नौबत आएगी और जब मैं बता रहा हूं कि अस्पतालों में बेड खाली पड़े हैं और बाहर फुल के नोटिस बोर्ड लगे।
एंटीजन की रिपोर्ट पर भर्ती करने का निर्देश राज्य सरकार उत्तर प्रदेश द्वारा दिया जा रहा है । एंटीजन की रिपोर्ट के लिए लोगों से टेस्ट करने के लिए हॉस्पिटल मना कर रहे हैं। गेट से बाहर ही पुलिस और गार्ड्स की मदद से भगा रहे हैं।
 तो यह कैसे संभव हो पाएगा। 
मेरा माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र निवेदन है की यथार्थ कुछ और है। उसको समझने का प्रयास करें और जनता की वास्तविक परेशानी को दूर करने का प्रयास करें। मेरा विपक्ष के राजनेताओं से भी सुझाव है कि वह आपदा पर तुच्छ राजनीति ना करें।
जनता को मेरा सुझाव है कि लोक डाउन के नियमों का, प्रतिबंधों का सही से पालन करें नहीं तो  कोई लाभ नहीं होगा।
 महामारी से अभी आपको बचना है तो नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। भविष्य में हम कितना खो देंगे कितना अपनों से बिछड़ जाएंगे, यह कल्पना अतीत है
मैं यहां यह भी निवेदन करना चाहूंगा कि अच्छे डॉक्टर का कहना यह है कि रेमदेसीविर और फेबीफ्लू कोरोना की दवाइयां नहीं है यह केवल स्वाइन फ्लू की दवाई है ।जो स्वाइन फ्लू भारतवर्ष में कई वर्ष पूर्व आया था तब रेमदेसीविर और फेबी फ्लू का अनुसंधान किया गया था।  कोविड-19 में अनुप्रयोग करना हमारे भारतवर्ष में केवल ऐसा हो रहा है, बाकी अन्य किसी देश में कोरोना की दवाई के रूप में रेमदेसीविर अथवा फेबीफ्लू नहीं दी जा रही है।
रेमदेसीविर के पीछे ना पड़े।
ऐसा कहना है डॉक्टर बी. डी .चौधरी भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली का। जो एक प्रतिष्ठित डॉक्टर हैं तथा वास्तव में जो कहा जाता है कि डॉक्टर भगवान के बाद दूसरा भगवान है पृथ्वी पर। उनमें से एक मानव नहीं बल्कि महामानव है Dr BD Chaudhary। जिन्होंने अपने घर पर बेड लगा कर बिना किसी शुल्क के कई कोरोना रोगियों को ठीक करके घर भेजा है। उन्होंने इसको मानव सेवा का अवसर माना है कितने महान लोग हैं यह ।
इस महामारी के समय में जो कालाबाजारी करने वाले लोग हैं वह नकली रेमदेसीविर  बना कर के दे रहे हैं ,कहीं-कहीं तो इस प्रकार के केस भी आ रहे हैं कि रेमदेसीविर के पैक में सीसी में ग्लूकोज भर कर दिया जा रहा है।
राक्षस प्रकृति के लोग इसको पैसा कमाने का एक अवसर मान रहे हैं, वही मानवीय गुणों से ओतप्रोत महामानव इसको मानवता की सेवा करने का अवसर मान रहे हैं ,।
यह सृष्टि में प्रारंभ से होता आया है और होता रहेगा।
मैं देश की जनता से अपील करना चाहूंगा कि
काढा बनाकर पीना, योग, प्राणायाम ,व्यायाम करना भाप लेना, सकारात्मक सोच रखना , जीवन शैली को परिवर्तित करना यह जीवन में आवश्यक है।
परमात्मा हमें सद्बुद्धि दे जिससे  हम कोराना के विरुद्ध संयुक्त लड़ाई लड़ सके।
देवेंद्र सिंह आर्य  अधिवक्ता, चेयरमैन उगता भारत समाचार पत्र,  राष्ट्रीय अध्यक्ष पश्चिम उत्तर प्रदेश विकास पार्टी
ग्रेटर नोएडा , उत्तर प्रदेश