प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिरकण कार्यालय के सभागार में समीक्षा बैठक संपन्न

 


20000 वर्गमीटर क्षेत्रफल से बडी परियोजनाओं पर विशेष निगरानी तथा आवश्यक अनुमतियां, व्यवस्थाएं जैसे.पर्यावरण स्वीकृति, स्माग गन, पैन टिल्ट जूम कैमरा तथा ग्रीन कवर, जल का छिडकाव आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश

 


मौहम्मद इल्यास/ग्रेटर नोएडा

गौतमबुद्धनगर में बढता प्रदूषण परेशानी का सबब बनता जा रहा है। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा की तुलना करें तो ग्रेटर नोएडा शहर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यापालक अधिकारी तक बढते प्रदूषण को लेकर सडक पर उतर चुके हैं। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा एनजीटी के निर्देशों की अवहेला किए जाने पर 25 बिर्ल्डिस और डेवलपर्स पर 1.25 करोड को जुर्माना ठोक दिया है। साथ ही प्रदूषण की गंभीरता को लेकर मंगलवार को एक समीक्षा बैठक ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिरकण कार्यालय के सभागार में मुख्य कार्यापालक अधिकारी नरेंद्र भूषण की अध्यक्षता मेंं संपन्न हुई। इस बैठक में गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह, यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यापालक अधिकारी डा0 अरूणवीर सिंह, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर सुहास एल.वाई., ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिरकण के अपर मुख्य कार्यापालक अधिकारी दीप चन्द्र और कृष्ण कुमार गुप्त, विशेष कार्याधिकारी शिव प्रताप शुक्ला, उप महाप्रबन्धक अनिल कुमार शर्मा, सहायक आयुक्त एस.आई.डी.आई.सी. गौतमबुद्धनगर दीपेन्द्र कुमार, गौतमबुद्धनगर की उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी डा0 अर्चना द्विवेदी, कृषि निदेशक डा0 मनवीर सिंह, पी.एस.ओ.  डा० ज्योति मिश्रा, डी.सी.पी. नोएडा आर.के.शर्मा, नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यापालक अधिकारी श्रीमती नेहा शर्मा, डी.सी.पी. टैफिक गणेश प्रसाद साह आदि संबंधित विभागों के अधिकारीगण और केडाई, नरेडको के पदाधिकारीगण, बिर्ल्डस और डेवलपर्स ने भाग लिया। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि क्षेत्र में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कडे कदम उठाए जाए ंतथा उक्त के अनुपालन हेतु विभिन्न टीमे तैयार कर साईटों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जिन बिल्डर्स/ डेवलपर्स साईट पर निर्माण कार्य कराए जाने की अनुमति नहीं है, उनको तत्काल सील कर दिया जाए। साथ ही जिन बिल्डर्स/डेवलपर्स की साईट पर प्रदूषण एन.जी.टी. के निर्धारित मानकों के अनरूप कार्य नहीं किया जा रहा है। उन पर नियमानुसार दण्डशुल्क यानी् जुर्माना आरोपित किया जाए। बैठक में कहा गया है कि स्वयं की सहभागिता, सेवदनशीलता एवं जानकारी के माध्यम से प्रयास करने पर स्मागध् वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। अतः इस मिशन में आगे आकर सकिय भूमिका निभाने की अत्याधिक आवश्यकता है। उक्त बैठक में यह भी आदेशित गया कि संबंधित बिल्डर्स/ डेवलपर्स की साईट पर एक बोर्ड/नोटिस चस्पा कर दिया जाए, जिसपर संबंधित व्यक्ति प्रदूषण एवं एन.जी.टी. नियमों का प्रतिदिन के अनुरूप कृत कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। जिससे काफी हद तक प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहायता मिलेगी। इस बैठक में यह भी आदेशित किया गया कि एन.जी.टी. प्रदूषण के नियमों की गाईड लाईन एवं आवश्यक दिशा निर्देश एवं अन्य आवश्यक जानकारियो का गुगल फार्म तैयार कर नरेडको एवं केडाई के माध्यम से सर्कुलेट करा दिया जाए जिससे कि अवेरनेस बढाते हुये प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके। बैठक में यह भी आदेशित किया गया कि 20000 वर्गमीटर क्षेत्रफल से बडी परियोजनाओं पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा आवश्यक अनुमतियां व्यवस्थाएं जैसे.पर्यावरण स्वीकृति, स्माग गन, पैन टिल्ट जूम कैमरा तथा ग्रीन कवर, जल का छिडकाव आदि की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। निर्धारित औपचारिकताएं पूर्ण न होने पर संबंधित बिल्डर्स/डेवलपर्स पर अर्थदण्ड जुर्माना आरोपित किया जाए।