एसडीएम सदर प्रसून द्विवेदी और एसीपी अब्दुल कादिर द्वारा समिति गठित किए जाने के आश्वासन के बाद चल रहा धरना समाप्त

 





विजन लाइव/ग्रेटर नोएडा

 ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्रधिकरण के तहत आने वाले अमरपुर गांव में कचरा प्रबंधन प्लांट के विरोध में चल रहा धरना आज समाप्त हो गया। एसडीएम सदर प्रसून द्विवेदी और एसीपी अब्दुल कादिर ने जूस पिलाकर अनशनकारियों का अनशन तुडवाया। एसडीएम सदर प्रसून द्विवेदी आज दूसरी बार धरना स्थल पर पहुंचे और धरनारत लोगों को आश्वस्त किया कि शनिवार तक इस मुद्दे के हल के लिए एक समिति गठित कर दी जाएगी और फिर समिति की रिपोर्ट के बाद हल तलाश लिया जाएगा। कचरा प्रबंधन प्लांट के विरोध मे गत 8 अक्टूबर.2020 से ही अनिश्चिकालीन धरना चल रहा था और अब अनशन में बदल गया था। यहां गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग धर्मपाल आमरण अनशन बैठे हुए थे। दो दिनों से इस आमरण अनशन को समर्थन देने के लिए कांग्रेस, सपा, करप्शन फ्री इंडिया, जय जवान जय किसान मोर्चा, किसान एकता संघ और भारतीय किसान यूनियन के अराजनैतिक टिकैत, अंबावता और भानु गुंटों के पदाधिकारी भी पहुंचे और इन राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के 11 पदाधिकारी भी भूख हडताल पर बैठ गए थे। उधर गौतमबुद्धनगर प्रशासन की ओर से शनिवार की देर रात एसडीएम सदर ने ग्रामीणों को गांव की जमीन से कचरा प्रबंधन प्लांट को स्थानांतरित किए जाने का आश्वासन दिया था। धरना दे रहे बुजुर्ग धर्मपाल की शनिवार की देर शाम अचानक तबीयत खराब हो गई। शनिवार रात  11.00 बजे एसडीएम सदर प्रसून द्विवेदी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने बुझाने का प्रयास किया। उन्होंने धरना दे रहे ग्रामीण धर्मपाल की हालत बिगड़ने पर पानी भी पिलावाया और आश्वासन दिया कि कचरा प्रबंधन प्लांट की भूमि को अन्य कहीं स्थानांतरित कर देंगे। किंतु धरनारत ग्रामीणों ने ऐलान किया कि जब तक कचरा प्रबंधन प्लांट की भूमि को अन्य कहीं स्थानांतरित नही कर दिया जाएगा धरना और भूख हडताल जारी रहेगी। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को एक महापंचायत भी हुई। दूसरे दिन आज मंगलवार को फिर समूचा विपक्ष एक स्वर में गरजा की कि कचर प्लांट को यहां नही बनने देंगे। मंगलवार को फिर एसडीएम सदर प्रसून द्विवेदी और एसीपी अब्दुल कादिर धरना स्थल पर पहुंचे और आश्वस्त किया कि मामले का हल तलाशने के लिए आगामी शनिवार तक एक समिति गठित कर दी जाएगी तत्पश्चात हल निकाल लिया। उधर अनशनकारी लोगों ने साफ किया कि यदि यहां कचर प्लांट का अन्यंत्र स्थानंतरित नही किया तो पुनः आर पार की लडाई शुरू कर दी जाएगी। जिस नगर पंचायत दनकौर के लिए यहां की करीब 10 बीघा भूमि मे कचर प्लांट बनाने की बात की जा रही है वह दनकौर कसबा तो ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में पडता भी नही है। दनकौर नगर पंचायत यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में आता है, फिर यहां की भूमि पर कचर प्लांट क्यो? इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष डा0 महेंद्र नागर, नोएडा विधान सभा पूर्व प्रत्याशी राजेंद्र अवाना, सपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह यादव, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के प्रदेश प्रवक्ता मेरठ मंडल अध्यक्ष पवन खटाना और जिलाध्यक्ष अनित कसाना, किसान एकता संघ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष जतन सिंह प्रधान, जिलाध्यक्ष कृष्ण नागर, भारतीय किसान यूनियन अंबावता के जिलाध्यक्ष उधम सिंह नागर, करप्शन फ्री इंडिया के संस्थापक चौधरी प्रवीन भारतीय और आलोक नागर के अलावा रमेश कसाना, अजीत सिंह दौला, सुल्तान सिंह नागर, विपिन कसाना, शकील सैफी अमरपुर, बलराज प्रधान राजपुर, चौधरी महेंद्र प्रधान तुगलपुर, शकील उस्मानपुर, पारूल चौधरी, विक्रम नागर, नरेंद्र नागर महमदपुर, धीरज मास्टर जी आदि सैकडों की तादाद में पदाधिकारी, कार्यकर्तागण और ग्रामीण उपस्थित रहे।

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अमरण अनशन का ंमंच दे गया मजबूत विपक्ष का संदेश

 




मौहम्मद इल्यास/ग्रेटर नोएडा

अमरपुर गांव में कचरा प्लांट की मांग को लेकर चल रहा अमरण तो समाप्त हो गया। किंतु इस अनशन का यह मंच क्षेत्र में एक मजबूत विपक्ष के इकट्ठा होने भी संदेश दे गया। इस मंच पर दो बडी रानीतिक पार्टियों के पदाधिकारियों ने सरकार के खिलाफ जम कर आग उगली। वहीं किसान संगठनों और स्वंयेसवी संगठनांं ने भी सरकार को कचरा प्लांट के मुद्दे के बहाने जमकर ललकारा। कांग्रेस ने भी इस मंच के बहाने अपनी जमकर मजबूती दिखाई। गौतमबुद्धनगर में कुछ समय पहले तक मृत प्राय रही कांग्रेस में संजीवनी लौट आई। कांग्रेस के लिए एक समय ऐसा भी रहा था कि स्थानीय निकाय चुनाव में ढूंडे से भी प्रत्याशी नही मिल पाते थे मगर आज इस अमरण अनशन के मंच पर स्वंय जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी भी 11 लोगों की सूची में शामिल थे जो 80 वर्षीय बुजुर्ग धर्मपाल सिंह के समर्थन में भूखं हडताल में कूद पडे थे। कुछ समय बाद आए गाडियों के काफिले से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा था कि यह अनशन कहीं कांग्रेस के तत्वाधान में तो नही है? यही हाल सपा और किसान संगठनों का रहा। सरकार के खिलाफ इन संगठनांं का खुला आक्रोश देखने को मिला। यहां आगामी विधानसभा चुनावों के परिदृश्य को देखते हुए जिस तरह बसपा को छोड कर समूचा विपक्ष और किसान संगठन एकजुट हुए एक नए राजनीतिक समीकरणों की शुरूआत भी मानी जा रही है, जो भाजपा सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के लिए खतरें की घंटी भी साबित हो सकती है।