विजन लाइव/ग्रेटर नोएडा

विस्थापित होने वाले किसानों को उनके कवर्ड एरिया के बजाय आच्छादित व अहाते के संपूर्ण क्षेत्रफल का अधिकतम 500 मीटर विकसित करए उपलब्ध कराया जाएगा। सन् 2018 में यह खबरें आने लगी थी कि बनने वाले जेवर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से प्रभावित किसान, अपनी जमीनों की सहमति नही दे रहे हैं। उस वक्त जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने मोर्चा संभालते हुए, किसानों से आग्रह कर, उनकी जमीनों की सहमति प्राप्त करए जेवर एयरपोर्ट बनाए जाने का रास्ता साफ करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी तथा कुछ वायदें भी किसानों के हक में सरकार से लिए थे, जिसमें से किसानों के अहाते व कवर्ड एरिया को जोडते हुएए उसका 50 प्रतिशत प्लॉट विकसित क्षेत्र में किसानों को दिए जाना तय किया गया था, लेकिन प्रशासन द्वारा भेजे गए पुनर्वास और पुर्नस्थापन प्रस्ताव के अनुसार किसानों को सिर्फ कवर्ड एरिया का 50 प्रतिशत प्लॉट दिए जाना ही तय किया गया, जिसको लेकर विगत कई माह से जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने किसानों के साथ की गयी वादाखिलाफी का शासन व सरकार से विरोध दर्ज कराया और सरकार को समझाने का पूरा प्रयास किया कि ग्रामीण परिवेश किसान का घर वह माना जाता है, जिसमें कवर्ड एरिया के साथ.साथ चारा काटने की मशीन, पेड पौधे, घरेलू पशुओं के रहने का स्थान आदि भी सम्मलित होते हैं, जिसे अहाता अथवा घेर कहा जाता है। इसलिए अहाते को ही मानक मानते हुए विकसित क्षेत्र में उसके सापेक्ष 50 प्रतिशत भूखंड किसानों को दिया जाए। उदाहरण के तौर पर 25 अगस्त 2020 को जारी शासनदेश के बाद अगर किसी किसान का अहाता 01 हजार वर्ग गज में बना हुआ है तो अब उसे, उसका 50 प्रतिशत यानी 500 गज वर्ग का भूखंड विकसित क्षेत्र में आवंटित होगा, जो पहले अधिकतम 50 वर्ग मी0 अथवा आच्छादित क्षेत्र का 50 प्रतिशत था। सरकार व शासन द्वारा लिए गए इस निर्णय से जो किसान अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे थे, उनमें अब खुशी की लहर है।