किसान 64.07 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे के मामले में पीआईएल के जरिए भी यमुना अथॉरिटी को घेरेंगेः जतन भाटी


यमुना किसान आंदोलन’’ के मुद्दे पर किसान एकता संघ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष चौधरी जतन भाटी की विजन लाइव’’ डिजिटल मीडिया के साथ एक खास मुलाकात

मौहम्मद इल्यास/ग्रेटर नोएडा

यमुना अथॉरिटी को हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब किसानों ने चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट ने हाल में फैसला दिया था कि यमुना अथॉरिटी किसी भी अलॉटी से 64.07 प्रतिशत मुआवजा दिए जाने के लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नही वसूल सकती है। साथ ही में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के यमुना अथॉरिटी द्वारा अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने के आदेश को भी गैर कानूनी ठहराया है। किंतु पेच यहां फंस गया है कि पूर्व में बांटा गया 64.07 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा किसानों से क्या वापस ले लिया जाएगा? अथवा कोई बीच का रास्ता निकाल कर शेष किसानों को भी इस मुआजवे का लाभ दिया जाएगा। वैसे यमुना अथॉरिटी किसानों से यही कह रही है कि हाईकोर्ट के आदेश की अपील सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी और जो किसान 64.07 प्रतिशत मुआवजे से रह गए हैं उन्हें संतुष्ट किया जाएगा। किंतु वहीं अब किसानों के सब्र का बांध भी टूटने लगा है। किसानों ने दनकौर क्षेत्र में एक पंचायत आहूत कर फैसला लिया है कि अब 64.07 प्रतिशत मुआवजे को लेकर जोरदार आंदोलन किया जाएगा और साथ ही पीआईएल के जरिए भी यमुना अथॉरिटी को घेरंगे। ’’विजन लाइव’’ डिजिटल मीडिया ने इस मुद्दे पर किसान एकता संघ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष चौधरी जतन भाटी से खास बातें की हैं। किसान एकता संघ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष चौधरी जतन भाटी ने विजन लाइव’’ डिजिटल मीडिया को इस खास मुलाकात में बताया कि क्षेत्र के किसानों के सब्र का बांध जबाब दे रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यमुना अथॉरिटी के जरिए किसानों को लगातार गुमराह किया जा रहा है कि हाईकोर्ट के फैसले की अपील सुप्रीम कोर्ट में कर किसानों को संतुष्ट किया जाएगा। यमुना अथॉरिटी के इस दावे में बिल्कुल भी दम नही है। 29 अगस्त-2014 को तत्कालीन केबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में राज्य सरकार ने 64.07 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिए जाने का आदेश पारित किया था। यमुना अथॉरिटी के प्रभावित गांवों के सभी किसानों को यह 64.07 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा की रकम करीब 2400 करोड बांटी जानी थी और जिसमें से अब तक करीब 2100 करोड रूपये बंट भी चुके हैं। सिर्फ करीब 300 करोड रूपये किसानों के रह गए हैं।  उन्होंने कहा कि अब किसान अपने हक के लिए जाग गया है और इस मुद्दे पर एक पंचायत दनकौर ब्लाक के अट्टा गुजरान गांव में नौरग प्रधान के आवास पर सोशल डिस्टेनसिग के साथ दिनांक 10 अगस्त-2020 को संपन्न हो चुकी है। पंचायत में फैसला ले लिया गया है कि अब किसान चुप नही बैठेंगे और अपने हकों के लिए आरपार की लडाई लडी जाएगी। आगामी 02 सितंबर-2020 को जीरो प्वाइंट से यमुना अथॉरिटी तक किसानों का पैदल मार्च भी भी इसी आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यमुना अथॉरिटी की सीमा की शुरूआत जिन गांवों से हुई है वहां पर अभी 64.07 प्रतिशत मुआवजे की एक पाई भी किसानों को नही मिली है। इन 3 गांवों में दनकौर, जगनपुर और अट्टा फतेहपुर के गांवों के किसानों को एसआईटी जांच के नाम पर लगातार गुमराह किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि यदि 64.07 प्रतिशत मुआवजा गैर कानूनी है तो फिर गौतमबुद्धनगर के पूरे क्षेत्र को जो यमुना अथॉरिटी में आता है कैसे? मुआवजा दे दिया गया। किंतु यह एक सोची समझी साजिश है और खास कर दनकौर क्षेत्र के किसान क्षेत्रवाद के शिकार हो चुके हैं। दनकौर क्षेत्र में करीब 18 गांव है और इन गांवों के किसान अभी तक 64.07 प्रतिशत मुआवजे की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अांदोलन की रणनीति बन चुकी है। पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को देखते हुए एक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाए, जिसमें ’’यमुना किसान आंदोलन’’ के नाम से आगे की सारी तैयारियां की जाएंगी। इस आंदोलन के अंतर्गत क्षेत्र के लगभग 18 गांवों से 15.-15 लोगों की कमेटी गांवो में गठित कर दी गई है। कोर कमेटी में कुल 51 लोग हैं, जब कि सरक्षंकों की संख्या 6 है। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पंचायत में कानूनी रूप से लड़ाई लड़ने के लिए एक टीम का गठन किया गया है। यह लीगल विंग हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में किसानों का मजबूती से पक्ष रखेगी। कोर्ट में पीआईएल यानी जनहित याचिका के जरिए राज्य सरकार और यमुना अथॉरिटी को घेरा जाएगा।