हर दिन सैकड़ों आत्महत्या देश में कई कारणों से होती हैं, उनकी चिंता शायद इस दलाल मीडिया को नही


अगर अमन-चैन तरक्की भाईचारा लाना है तो टीवी डिबेट गोदी मीडिया को देखना बंद कर दें



चौधरी शौकत अली चेची

सत्ता में बैठी सरकार में विकास तो पैदा नहीं हुआ मगर नफरत व बर्बादी पैदा होकर सरपट दौड़ रही है। सत्ता पक्ष व दलाल मीडिया का विकास बाकी का सत्यानाश  सब का चेहरा उदास झूठ, गुमराह, नफरत अपने शबाब पर है। गोदी मीडिया विपक्ष से पूछ रहा है पिछला हिसाब।  दूसरों पर आरोपों की बहार, 20 लाख करोड़ की घोषणा, योजना देश की आवश्यक गुप्त फाइल अंदर है या बाहर समझना मुश्किल है। बुद्धिजीवियों द्वारा बताया जा रहा है कि  600 मिलीयन डॉलर का भारत पर कर्ज हो गया। चीन भारत की सीमा में काफी अंदर तक घुस आया। चीन शह पर नेपाल भी आंखे तरैर रहा है। देश में लगभग 40 करोड़ लोगों का रोजगार समाप्त होने वाला है। महंगाई, बेरोजगारी, अत्याचार, भ्रष्टाचार, बलात्कार, मर्डर, अपहरण, चोरी, जाति धर्म के नाम पर दंगा रोज रोज की नियति बन चुका है। हिदू मुस्लिम, पाकिस्तान, हिंदुस्तान यह अनाप-शनाप सब चीजे अपने शबाब पर हैं। यदि सरकार के खजाने को भरने की बात की जाए तो पता चलता है कि लगभग 90 प्रतिशत सामानों पर देश की जनता जीएसटी और टैक्स दे रही है। फिर क्यो देश की जीडीपी नीचे की ओर खिसकती जा रही है? सरकारें किसान, मजदूर, गरीब, बेसहारा लोगों का खून चूस रही हैं। जाति और धर्म के नाम पर लोगों में नफरत फैलाई जा रही है। देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं, भारत की इमेज विदेशों में धूमिल होती जा रही है। टीवी डिबेट में बैठकर दलाल मीडिया सत्ता पक्ष की चापलूसी कर गाल बजा रही है। विपक्ष के प्रवक्ताओं को मानसिक शब्दों से प्रभावित कर मौत के मुंहू की ओर धकेला जा रहा है। किसी का भी अपमान या किसी की जान या कानून के शिकंजे में कब फस जाए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है। बुद्धिजीवी परेशान हैं दलाल मीडिया और सत्तापक्ष महान है। हर

साल बाढ़ से, आगजनी तोड़फोड़, उपद्रव से लाखों घर बर्बाद हो जाते हैं, जान-माल की क्षति होती है जब कि सरकार नागरिकता का प्रमाण मांगने के ध्ांधे में मशगूल है। कोरोना या करोना अनजान लोगों की समझ में नहीं आ रहा है! गोदी मीडिया द्वारा विदेशों की आर्थिक स्थिति व कमजोरियां गिनाई जा रही हैं, अपना घर बर्बाद है और दूसरों पर कंकर मारे जा रहे हैं। इस बात से कतई भी इंकार नही किया जा सकता है कि देश लगभग 40 साल पीछे चला गया है। सुशांत राजपूत की आत्महत्या दुखद है इस मामले में दूध का दूध और पानी पानी हो, सुशांत राजपूत के परिजनों को पूरा इंसाफ मिलना चाहिए। खैर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब गेंद सीबीआई के पाले में हैं। मगर यह भी पूर तरह से सच है कि जिस तरह से दलाल मीडिया ने सुशांत राजपूत की मौत को लेकर पूरे वर्ल्ड में ढोल बजा रखा है, ऐसा लगता है कि यह दलाल मीडिया के लोग महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से पुराना हिसाब चुकता करना चाह रहे हैं। देश में कई कारणों से हर दिन सैकड़ों आत्महत्या होती हैं, उनकी चिंता शायद इस दलाल मीडिया को नही है। किसान, गरीब, मजदूर, बेसहारा, कमजोर आर्थिक स्थिति से हर रोज मरते हैं। हमारा प्यारा भारत अनेक तरह के फूलों का गुलदस्ते जैसा कहा गया है जिसकी तरह-तरह की खुशबू देश के कोने कोने  में रोशनी की किरण बनकर महक रही है वह महक भी अब धूमिल होती जा रही है। भारतीय संस्कृति नष्ट होती जा रही है, अंगारों पर खड़ी है, खोखली जड़ों पर खड़ी है, सूखे पत्तों की तरह पड़ी है, देश की गंदी राजनीति, जाति, धर्म, नफरत के मुहाने पर अडी है। चंद लोगों को छोड़कर देश की जनता हर तरफ से डरी है। खतरनाक आफत मुसीबत शुरू हो रही है, अभी नहीं जागे तो फिर कब संभल पाओगे? आने वाली पीढ़ी के लिए क्या संदेश दे कर जाओगे? अच्छे दिन के चक्कर में न जाने किस कर्म की या कौन से जन्म की आफत आन पड़ी है? जय जवान- जय किसान, हम सबका भारत देश महान, एकता से बड़ा कोई पुण्य ताकत नहीं नफरत, गुमराह, झूठ से बड़ा कोई पाप या बर्बादी नहीं,जहरीली नफरत भरी राजनेता और मीडिया की भाषा देश समाज देश की जनता के लिए अच्छा संदेश नहीं है। देश में अगर अमन-चैन तरक्की भाईचारा लाना है तो टीवी डिबेट गोदी मीडिया को देखना बंद कर दें। यूट्यूब चैनल, सोशल मीडिया अच्छे और सच्चे पत्रकारों पर विश्वास करना समझदारी है

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज  ) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।