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लगभग 75 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार व नौकरी समाप्त हो गई






किसान और  मजदूरों ने ही संभाल रखी है, देश की लगभग 70 प्रतिशत अर्थव्यवस्था

चौधरी शौकत अली चेची
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कोराना भयंकर बीमारी है सावधान रहें और सोशल डिस्टैंसिंग का पालन करते रहे। प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ पैकेज का जिक्र किया।  धरातल पर कुछ नजर नहीं आता। प्रधानमंत्री ने भूल भुलैया करके बताया दिया कि जीडीपी का 10 प्रतिशत खर्च किया जाएगा। सभी वस्तुएं स्वदेशी हो का संदेश दिया। यह बात संभव तो नहीं है लेकिन ईवीएम मशीन विदेशी हैं, बैलट पेपर स्वदेशी है का भी जिक्र करना चाहिए था। वित्त मंत्री  ने मीडिया के माध्यम से किसको क्या मिलेगा विस्तार से भी समझा दिया। गोदी मीडिया ने सच्चाई को छुपाकर ढोल बजा दिया। सच यह भी है कि आईएएस आईपीएस ओबीसी कोचिंग  कोटा समाप्त कर दिया। बीजेपी शासित कई राज्यों में लगभग 35 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया। लॉक डाउन में प्रवासी मजदूरों को भारी मुसीबत में सड़कों पर मरने के लिए छोड़ दिया। समझ में नहीं आता घोषणा में प्रवासी मजदूरों को क्या दिया? कई कारणों या कानूनों से देश की जनता का कर्म भूमि को छोड़कर जन्म भूमि की तरफ जाने से लगभग 75 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में लगभग 45 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार नौकरी समाप्त हो गई। किसानों की रवि की फसल सस्ते दामों पर खरीदी गई। लगभग 20 प्रतिशत गेहूं किसानों ने लाभ लेने के लिए अभी नहीं बेचा है, फूल सब्जी दूध फल आदि लगभग 30 प्रतिशत किसानों ने घाटे में बेचा है और गेहूं फल फूल सब्जी आदि की फसल बे मौसम बरसात समय पर मंडी नहीं पहुंचना आवारा पशुओं आदि कारणों से लगभग 20 प्रतिशत बर्बाद हो गई जिसका बुरा प्रभाव किसान मजदूर पर पड़ा। लगभग 5 लाख करोड रुपए पूरे देश के किसानों पर कर्ज है, उद्योगपतियों का लोन माफ हो सकता है, किसान मजदूर ने देश की लगभग 70 प्रतिशत अर्थव्यवस्था को संभाल रखा है। घोषणाएं योजनाएं कागजों में ही गुम हो जाती हैं, खोखले वादे करके किसान मजदूर का बेटा बनकर राजनीतिक पार्टियां सत्ता पर काबिज हो जाती हैं। विश्वास में ठोकर मार कर अपना और अपने सगे संबंधियों का भला कर किसान मजदूर गरीब का हक मारकर मालामाल और लोकप्रिय हो जाते हैं। विश्वास की डोर टूट जाती है या छूट जाती है, अपने हक को दर्द भरी आवाज में लेकर किसान फिर किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी को अपना समर्थन योगदान देता है। लगभग 60 प्रतिशत सरकार बनाने में अहम रोल अदा करता है, किसान। उसे भारत का किसान मजदूर गरीब कहा जाता है। इन बातों पर कितने सज्जन विश्वास करते हैं। यह विषय अलग है जिस बात का ज्यादा प्रचार किया जाता है, उसी को सच मान लेते हैं असल सच्चाई कूड़े के ढेर में दब कर दफन हो जाती है। उसके बाद फिर याद किसी की आती है लफबाजी में विश्वास में ठोकर मारी जाती है। जाति धर्म की द्वेष भावना जगाई जाती है। सत्ता में आने के लिए एक अनोखी लहर बनाई जाती है, जिसे हम गुमराह झूठ नफरत वादी राजनीति कहते हैं। खेत में किसान सीमा पर जवान सहयोग में मजदूर बलवान। यही है भारत देश की पहचान।
लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ’’बलराज’’ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हैं।