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सूरजपुर में धूमधाम से निकली भगवान श्रीराम की भव्य बारात, बैंड-बाजों की मधुर धुनों और जयकारों से गूंजा बाराही मेला प्रांगण


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित बाराही मेला प्रांगण में श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित भव्य रामलीला में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला के पांचवें दिन भगवान श्रीराम के धनुष भंग से लेकर लक्ष्मण-परशुराम संवाद तक की लीलाओं का प्रभावशाली मंचन किया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम की भव्य बारात धूमधाम से निकाली गई। गाजे-बाजे और बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच निकली बारात ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। रामलीला मंचन और भगवान श्रीराम की बारात के दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
धनुष भंग के प्रसंग ने दर्शकों को किया भावविभोर
रामलीला मंचन के दौरान भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग करने के प्रसंग को कलाकारों ने शानदार ढंग से प्रस्तुत किया। स्वयंवर में अनेक राजाओं के धनुष उठाने में असफल रहने के बाद भगवान श्रीराम द्वारा गुरु की आज्ञा से शिव धनुष उठाकर खंडित करने के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। धनुष भंग के साथ ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाकर अपनी आस्था व्यक्त की।
इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की शक्ति, विनम्रता और गुरु के प्रति सम्मान की भावना को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया। मंचन के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए और रामलीला के प्रत्येक दृश्य को उत्सुकता के साथ देखते रहे।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने बांधा समां
धनुष भंग के बाद रामलीला में लक्ष्मण-परशुराम संवाद का मंचन किया गया। इस प्रसंग में भगवान परशुराम के क्रोध और लक्ष्मण के तर्कपूर्ण, ओजस्वी संवादों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, संवाद अदायगी और मंचीय प्रस्तुति ने वातावरण को जीवंत बना दिया।
लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए संवाद के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। रामलीला के इस महत्वपूर्ण प्रसंग ने भगवान श्रीराम की विनम्रता, लक्ष्मण के साहस और संवादों की प्रभावशीलता को दर्शाया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से रामायण के इस प्रसंग को दर्शकों के सामने सजीव कर दिया।
बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच निकली भगवान श्रीराम की बारात
लक्ष्मण-परशुराम संवाद के मंचन के बाद सूरजपुर में भगवान श्रीराम की भव्य बारात निकाली गई। बारात में गाजे-बाजे और बैंड-बाजों की मधुर धुनों ने धार्मिक उत्सव की रौनक बढ़ा दी। भगवान श्रीराम की बारात को देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह दिखाई दिया। बारात के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा और श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयकारे लगाते नजर आए।
भगवान श्रीराम की बारात रामलीला महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बारात के माध्यम से रामायण के विवाह प्रसंग से जुड़ी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी संदेश दिया।
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी से बढ़ी आयोजन की भव्यता
श्री आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान श्रीराम की लीलाओं का आनंद ले रहे हैं। बुधवार को धनुष भंग, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और भगवान श्रीराम की बारात के आयोजन को लेकर दर्शकों में विशेष उत्साह रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, विभिन्न आयु वर्ग के लोगों ने रामलीला का आनंद लिया।
रामलीला जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भारतीय परंपराओं, मर्यादा, आदर्शों और पारिवारिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूरजपुर की रामलीला भी लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के लिए धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक सहभागिता का प्रमुख अवसर बनी हुई है।
कमेटी पदाधिकारियों सहित गणमान्य लोग रहे मौजूद
रामलीला मंचन और आयोजन के दौरान कमेटी अध्यक्ष सत्यवीर भाटी, महासचिव सत्यपाल शर्मा, कर्मवीर आर्य, लक्ष्मण सिंघल, सुनील सोनक, राजेश ठेकेदार, विशाल गोयल, प्रेमवीर शर्मा, भगत सिंह, केडी गुर्जर, विरजानंद शर्मा, मोहित और रामअवतार गर्ग सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ाया।
श्री आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में बाराही मेला प्रांगण में आयोजित रामलीला के माध्यम से धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन के संदेश से जोड़ रहा है।
कुल मिलाकर, सूरजपुर में धनुष भंग से लक्ष्मण-परशुराम संवाद तक की लीला और उसके बाद निकली भगवान श्रीराम की भव्य बारात ने रामलीला महोत्सव को यादगार बना दिया। बैंड-बाजों की मधुर धुनों, श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिमय वातावरण ने बाराही मेला प्रांगण को राममय कर दिया।


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