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श्री धार्मिक रामलीला में भरत मिलाप से सीता हरण तक की लीलाओं ने मोहा मन, जटायु वध के मंचन ने किया भावविभोर


मुख्य अतिथि जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य महाराज और विशिष्ट अतिथि जेवर विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह की उपस्थिति रही खास आकर्षण
श्री विनायक ग्रुप के चेयरमैन अंकुर मित्तल और वरिष्ठ भाजपा नेता बिजेंद्र भाटी (साकीपुर) भी रहे मौजूद
     मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा में आयोजित श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में शनिवार को प्रभु श्रीराम के वनवास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। चित्रकूट में श्रीराम-भरत मिलाप, पंचवटी लीला, सीता हरण और जटायु वध के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जगद्गुरु स्वामी सतीशाचार्य जी महाराज (प्रेमेश्वर पीठ, महर्षि आश्रम) तथा विशिष्ट अतिथि जेवर विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह की उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। श्री विनायक ग्रुप के चेयरमैन अंकुर मित्तल और वरिष्ठ भाजपा नेता बिजेंद्र भाटी (साकीपुर) भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
परम पूज्य गोस्वामी सुशील महाराज के दिशा-निर्देशन और समिति के युवा अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन शाम सात बजे से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, मर्यादा, त्याग और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है।
भरत मिलाप में दिखाई भाईचारे और त्याग की मिसाल
संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण चित्रकूट में कुटिया बनाकर निवास करते हैं। अयोध्या में महाराज दशरथ के निधन के बाद भरत को जब प्रभु श्रीराम के वनवास की जानकारी मिलती है, तो वह उन्हें वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं।
भरत के आग्रह के बावजूद प्रभु श्रीराम पिता के वचन का पालन करते हुए वनवास समाप्त करने से इनकार कर देते हैं। इसके बाद भरत प्रभु श्रीराम की खड़ाऊ लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें सिंहासन पर स्थापित कर उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन चलाते हैं। इस प्रसंग ने दर्शकों को त्याग, समर्पण, कर्तव्य और भाईचारे की प्रेरणा दी।
पंचवटी लीला से सीता हरण तक का सजीव मंचन
पंचवटी में शूर्पणखा का श्रीराम के प्रति आकर्षण, विवाह प्रस्ताव, लक्ष्मण द्वारा उसे दंडित किए जाने और इसके बाद खर-दूषण के वध के प्रसंगों को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। अपमान का बदला लेने के लिए शूर्पणखा रावण को उकसाती है, जिसके बाद रावण अपने मामा मारीच की सहायता से माता सीता के हरण की योजना बनाता है।
मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर माता सीता को आकर्षित करता है। उनके आग्रह पर प्रभु श्रीराम स्वर्ण मृग के पीछे जाते हैं। मारीच की मायावी पुकार सुनकर माता सीता लक्ष्मण को भी प्रभु श्रीराम की सहायता के लिए भेज देती हैं। इसी दौरान रावण साधु का वेश धारण कर पहुंचता है और माता सीता का हरण कर लेता है।
माता सीता की रक्षा के लिए जटायु रावण से वीरतापूर्वक युद्ध करते हैं। गंभीर रूप से घायल जटायु प्रभु श्रीराम को सीता हरण की जानकारी देते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। प्रभु श्रीराम जटायु का अंतिम संस्कार कर उन्हें पिता के समान सम्मान प्रदान करते हैं। इस मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
प्रभु श्रीराम के आदर्श चरित्र और करुणा का संदेश
रामलीला के इन प्रसंगों ने प्रभु श्रीराम के मर्यादित आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और समस्त जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम एवं सम्मान का संदेश दिया। जटायु के प्रति प्रभु श्रीराम का व्यवहार यह दर्शाता है कि सच्ची करुणा और धर्म की भावना किसी एक वर्ग या प्रजाति तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रत्येक प्राणी के प्रति संवेदना और सम्मान में निहित होती है।
कलाकारों के शानदार मंचन पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं। प्रभु श्रीराम और माता सीता के जयकारों से पूरा श्री धार्मिक रामलीला परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ लीलाओं का आनंद लिया।
आगामी कार्यक्रमों में होंगे कई आकर्षक प्रसंग
समिति के अनुसार, 18 अक्टूबर को शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा लीला और बाली वध सहित प्रमुख प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। इसके बाद लंका दहन, सेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध तथा राम-कुंभकरण और रावण युद्ध का मंचन प्रस्तावित है। 20 अक्टूबर को महोत्सव का समापन होगा।
आयोजकों के अनुसार, रामलीला एवं दशहरा महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का अवसर है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं, मर्यादा, त्याग, भाईचारे और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है।
समिति के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैनपाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता सागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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