BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

UPITS 2026: हुनर से कारोबार तक… अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूपी की महिला उद्यमियों की नई उड़ान


किसी ने शौक को बनाया व्यवसाय, किसी ने स्वयं सहायता समूह से बदली जिंदगी | उत्पाद बनाने से लेकर ब्रांडिंग, बिक्री और बाजार विस्तार तक महिलाओं ने संभाली कमान

रिपोर्ट:- मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’

Vision Live News / यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026,     ग्रेटर नोएडा

 कभी शौक के तौर पर शुरू किया गया काम आज कारोबार बन चुका है। किसी महिला ने अपनी चित्रकारी को कपड़ों पर उतारकर उसे बाजार तक पहुंचाया, तो किसी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आय का जरिया बनाया, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंची महिला उद्यमियों की कहानियां महिला सशक्तीकरण की बदलती तस्वीर को सामने ला रही हैं।

यहां महिलाएं सिर्फ अपने हाथों से उत्पाद तैयार करने वाली कारीगर नहीं रह गई हैं। वे उत्पाद की डिजाइनिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, बिक्री, ग्राहक संपर्क और नए बाजार तलाशने तक कारोबार की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ट्रेड शो उनके लिए अपने उत्पादों की बिक्री के साथ देश और विदेश के खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर भी बन रहा है।

पीतल की कलाकृतियों से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच

मेरठ के कंकरखेड़ा से आईं हरप्रीत कौर अपनी फर्म सॉल फॉर अर्थ के माध्यम से पीतल से बनी विभिन्न कलाकृतियां और ट्रॉफी लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं।

हरप्रीत के मुताबिक, ऐसे बड़े मंचों ने उन्हें अपने उत्पादों को व्यापक बाजार के सामने रखने का अवसर दिया है। उनका कहना है कि उनके उत्पाद अब दूसरे देशों के बाजारों तक भी पहुंच बना रहे हैं।

उनके लिए ट्रेड शो केवल बिक्री का माध्यम नहीं, बल्कि नए खरीदारों से संपर्क और अपने उत्पादों की पहचान को व्यापक बनाने का अवसर है।

शौक को बनाया कारोबार, सात महिलाओं को मिला रोजगार

गाजियाबाद के बजरिया से आईं अंजली ने अपने चित्रकारी के शौक को कारोबार में बदलने की कहानी लिखी है। अंजली क्रिएशन के माध्यम से वह कपड़ों पर की गई चित्रकारी से तैयार उत्पाद लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं।

उन्होंने जिला ग्रामोद्योग विकास से ऋण लेकर सादे कपड़ों पर चित्रकारी का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ी और आज उनके तैयार किए गए सूट, दुपट्टे, जींस और ट्राउजर करीब 10 हजार रुपये तक की कीमत में बिक रहे हैं।

अंजली की सफलता का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कारोबार बढ़ने के साथ उन्होंने सात अन्य महिलाओं को नियमित रोजगार भी दिया है।

यानी एक महिला का अपना कारोबार शुरू करना अब उसके साथ दूसरी महिलाओं के लिए भी आय के नए अवसर पैदा कर रहा है।

हैंडमेड फैशन और जूट उत्पादों को बाजार से जोड़ रहीं प्रतिभा

गाजियाबाद के वसुंधरा से आईं प्रतिभा त्यागी प्रतिभा डिजाइनर हब के जरिए हैंडमेड सूट, दुपट्टे, लहंगे और जूट से बने विभिन्न प्रकार के बैग लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं।

उनका कारोबार हस्तनिर्मित उत्पादों को ग्राहकों और बाजार से जोड़ने पर केंद्रित है। ट्रेड शो में उन्हें नए ग्राहकों से संपर्क करने और अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने का अवसर मिल रहा है।

हस्तनिर्मित उत्पादों की मांग को देखते हुए ऐसे मंच महिला उद्यमियों को स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर बड़े बाजार तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं।

स्वयं सहायता समूह बना आत्मनिर्भरता का आधार

बुलंदशहर के नंगला गोविंदपुर की सितारा बेडशीट लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं। वह आजीविका स्वयं सहायता समूह का संचालन करती हैं, जिसमें 13 महिलाएं जुड़ी हैं।

सितारा के अनुसार, समूह से जुड़ी महिलाएं विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

उनके लिए स्वयं सहायता समूह केवल उत्पाद तैयार करने का माध्यम नहीं है, बल्कि महिलाओं को आय का नियमित जरिया उपलब्ध कराने और सामूहिक रूप से कारोबार आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।

सहारनपुर की सुधा सैनी की चौथी बार ट्रेड शो में भागीदारी

सहारनपुर के नांगल क्षेत्र से आईं सुधा सैनी विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। वह चलोरी स्वयं सहायता समूह का संचालन करती हैं और नोएडा में आयोजित इस ट्रेड शो में लगातार चौथी बार हिस्सा ले रही हैं।

सुधा के मुताबिक, इस मंच ने उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार की सीमाओं से बाहर निकालकर व्यापक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लगातार ट्रेड शो में भागीदारी उनके लिए खरीदारों से संपर्क बनाने, उत्पादों की पहचान बढ़ाने और बाजार की मांग को समझने का अवसर भी बन रही है।

महिला उद्यमिता की बदलती तस्वीर

इन महिला उद्यमियों की कहानियों में एक साझा बदलाव साफ दिखाई देता है—महिलाएं अब केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं हैं।

वे कारोबार की योजना बना रही हैं, उत्पादों की ब्रांडिंग कर रही हैं, ग्राहकों से संवाद कर रही हैं, बिक्री संभाल रही हैं और नए बाजार तलाश रही हैं। कई महिलाएं अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।

स्वयं सहायता समूह इस बदलाव का महत्वपूर्ण आधार बनकर सामने आए हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से उत्पादन और बिक्री से जुड़ रही हैं तथा अपनी आर्थिक भागीदारी बढ़ा रही हैं।

EXCLUSIVE STORY ANGLE

UPITS 2026 के प्रदर्शनी हॉल में रखे ये उत्पाद सिर्फ सामान नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे महिलाओं के संघर्ष, हुनर और बदलती आर्थिक भूमिका की कहानियां हैं।

मेरठ की पीतल कला से लेकर गाजियाबाद की कपड़ा चित्रकारी, जूट उत्पादों से लेकर बुलंदशहर की बेडशीट और सहारनपुर के हस्तशिल्प तक—उत्तर प्रदेश की महिला उद्यमिता अलग-अलग स्थानीय हुनर को कारोबार में बदल रही है।

सबसे अहम बदलाव यह है कि महिला अब केवल उत्पाद की निर्माता नहीं, बल्कि अपने ब्रांड और बाजार की संचालक भी बन रही है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो जैसा मंच इन महिलाओं को खरीदारों, नए बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की संभावनाओं से जोड़ रहा है। इससे स्थानीय हुनर को बाजार मिलने के साथ उन महिलाओं के लिए भी अवसर पैदा हो रहे हैं, जो आने वाले समय में उद्यमिता की राह चुनना चाहती हैं।


.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }