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लिफ्ट में महिला सेना अधिकारी से कथित अभद्रता का आरोप, रिटायर्ड सैन्य अधिकारी के खिलाफ FIR


BNS की धारा 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज, CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच का अहम आधार
मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ / ग्रेटर नोएडा
 गुरजिंदर विहार स्थित AWHO टाउनशिप के एक आवासीय परिसर में महिला सेना अधिकारी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल, अपमानजनक व्यवहार और धमकी देने का मामला सामने आया है। महिला अधिकारी की शिकायत पर थाना बीटा-2 पुलिस ने एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351(2) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। FIR संख्या 0340/2026 है, जिसे 5 सितंबर 2026 को शाम 7:04 बजे दर्ज किया गया। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक अखिलेश कुमार को सौंपी गई है।
21 अगस्त की दोपहर लिफ्ट में कथित तौर पर हुआ विवाद
FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक घटना 21 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 2:20 से 2:30 बजे के बीच की बताई गई है। शिकायतकर्ता महिला सेना अधिकारी के अनुसार वह अपने पति के साथ कार्यालय से घर लौटी थीं और आवासीय टावर के लिफ्ट क्षेत्र में पहुंचीं।
शिकायत के मुताबिक दोनों लिफ्ट का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान लिफ्ट का दरवाजा खुला और उसमें मौजूद एक व्यक्ति ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता की ओर देखकर ऊंची आवाज में बोलना शुरू कर दिया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने बिना किसी पूर्व बातचीत या विवाद के उनके साथ कथित तौर पर अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। शिकायत में यह भी आरोप है कि उन्हें ‘मेड’ कहकर संबोधित किया गया तथा एक अन्य कथित आपत्तिजनक वाक्य भी कहा गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार कथित व्यवहार उनके पति तथा आसपास मौजूद अन्य लोगों के सामने हुआ, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
शिकायतकर्ता ने घटना को सामान्य कहासुनी से अलग बताया
पुलिस को दिए गए शिकायत आवेदन में महिला अधिकारी ने आरोप लगाया है कि यह घटना महज सामान्य मौखिक विवाद या असहमति नहीं थी, बल्कि उनके प्रति जानबूझकर अपमानजनक और आक्रामक व्यवहार किया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि घटना से पहले आरोपी से उनका कोई व्यक्तिगत परिचय अथवा विवाद नहीं था। उनके अनुसार इस कथित घटना के बाद उन्हें अपने ही आवासीय परिसर में सुरक्षा और सम्मान को लेकर चिंता हुई।
हालांकि, ये सभी बातें शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
CCTV फुटेज जांच का अहम आधार
मामले में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से घटना के समय की लिफ्ट, लिफ्ट लॉबी और आसपास के सामान्य क्षेत्रों की CCTV फुटेज सुरक्षित करने तथा कब्जे में लेने का अनुरोध किया है।
शिकायत के अनुसार घटना के बाद भी संबंधित सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया गया था।
अब जांच में यह महत्वपूर्ण होगा कि CCTV रिकॉर्ड में घटना का कितना हिस्सा दिखाई देता है, उस समय कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे और घटनाक्रम किस क्रम में हुआ।
पति और सुरक्षा कर्मियों सहित कई लोगों के गवाह होने का दावा
शिकायतकर्ता ने अपने पति को घटना का प्रत्यक्षदर्शी बताया है। इसके अलावा टावर पर तैनात सुरक्षा कर्मियों तथा आसपास मौजूद अन्य लोगों के भी घटना देखने या कथित बातचीत सुनने की बात शिकायत में कही गई है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से इन लोगों के बयान दर्ज करने तथा CCTV और सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर अन्य संभावित गवाहों की पहचान करने का अनुरोध किया है।
जांच के दौरान इन गवाहों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि उनके माध्यम से शिकायत में लगाए गए आरोपों और वास्तविक घटनाक्रम के बीच की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
घटना के करीब दो सप्ताह बाद दर्ज हुई FIR
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार घटना 21 अगस्त 2026 की बताई गई है, जबकि FIR 5 सितंबर 2026 को दर्ज हुई। FIR में शिकायतकर्ता द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने में हुई देरी के संबंध में अलग कॉलम मौजूद है, लेकिन उपलब्ध FIR प्रति में उसमें कोई स्पष्ट कारण दर्ज दिखाई नहीं देता।
यह पहलू भी जांच के दौरान पुलिस के संज्ञान में आ सकता है और मामले की घटनाक्रम संबंधी टाइमलाइन को समझने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
आरोपी का पक्ष सामने आना बाकी
इस मामले में उपलब्ध FIR और शिकायत के आधार पर फिलहाल महिला अधिकारी की ओर से लगाए गए आरोप ही सामने आए हैं। आरोपी का पक्ष अथवा घटना के संबंध में उनका विस्तृत बयान उपलब्ध FIR प्रति में दर्ज नहीं है।
ऐसे में पत्रकारिता की दृष्टि से आरोपों को अंतिम सत्य अथवा अपराध सिद्ध होने के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। मामले में दोष अथवा निर्दोषता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
पुलिस ने शुरू की विवेचना
FIR दर्ज होने के बाद मामले की जांच उपनिरीक्षक अखिलेश कुमार को सौंपी गई है। अब पुलिस द्वारा शिकायत में बताए गए घटनास्थल, CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक अथवा सुरक्षा रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी होगा कि CCTV और स्वतंत्र गवाहों के बयानों से शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए घटनाक्रम की कितनी पुष्टि होती है।
मामला आवासीय परिसर की सुरक्षा और गरिमा से भी जुड़ा
यह मामला केवल दो व्यक्तियों के बीच कथित मौखिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि शिकायत में आवासीय परिसर के सामान्य क्षेत्र में एक महिला के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति अथवा किसी प्रकार की धमकी की आशंका को देखते हुए कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इस पूरे मामले में वास्तविक स्थिति पुलिस विवेचना, CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।


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