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E20 पेट्रोल नीति के खिलाफ जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल का ऐलान



कांग्रेस नेता रोबिन माईकल ने केंद्र सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 18 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा
     मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’  / नई दिल्ली 
E20 एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल नीति को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध का स्वर तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व भारतीय युवा कांग्रेस राष्ट्रीय प्रवक्ता रोबिन माईकल ने घोषणा की है कि वह अपने साथियों के साथ 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। प्रस्तावित आंदोलन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी गई है।
रोबिन माईकल का कहना है कि पिछले करीब दो महीनों से वह अपने साथियों के साथ E20 एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल नीति के खिलाफ दिल्ली और हरियाणा में लगातार विरोध प्रदर्शन एवं जनजागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार, इस दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास, दिल्ली भाजपा कार्यालय सहित दिल्ली की करीब आठ अन्य प्रमुख जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए।
अब तकनीकी नहीं, जनसरोकार का मुद्दा बनाने की कोशिश
रोबिन माईकल के मुताबिक E20 का सवाल अब केवल पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से जुड़ा तकनीकी विषय नहीं रह गया है। उनके अनुसार इसका सीधा संबंध वाहन मालिकों, किसानों, ईंधन की कीमत, वाहनों की कार्यक्षमता और आम उपभोक्ताओं की जेब से भी है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि E20 नीति के आर्थिक, तकनीकी, पर्यावरणीय और उपभोक्ता संबंधी प्रभावों को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने रखी जाए।
माईकल का तर्क है कि किसी भी बड़े ईंधन नीति परिवर्तन से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसके फायदे और संभावित नुकसान का स्वतंत्र वैज्ञानिक परीक्षण हो तथा आम उपभोक्ता को पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
रोबिन माईकल ने 18 सितंबर से प्रस्तावित आंदोलन के लिए चार प्रमुख मांगें सामने रखी हैं।
1. E20 नीति पर पुनर्विचार और वापसी की मांग
माईकल ने E20 पेट्रोल के अनिवार्य प्रयोग को लेकर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस नीति को लेकर वाहन मालिकों और आम उपभोक्ताओं के बीच आशंकाएं हैं तो सरकार को उनका समाधान करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर नीति को वापस लेना चाहिए।
2. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग
आंदोलनकारियों ने E20 नीति को लेकर उठ रहे सवालों की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
माईकल का कहना है कि सरकार को नीति से जुड़े सभी सवालों का तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब जनता के सामने रखना चाहिए।
3. कथित कारोबारी हितों की स्वतंत्र जांच की मांग
माईकल ने E20 नीति से जुड़े कथित कारोबारी लाभ और संभावित हितों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
उन्होंने नितिन गडकरी के पुत्रों से जुड़े संभावित कारोबारी हितों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की भी जांच कराने और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग रखी है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है। ऐसे में इस पूरे मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और किसी सक्षम जांच एजेंसी की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी।
4. उपभोक्ताओं को ईंधन चुनने का विकल्प मिले
आंदोलन की चौथी प्रमुख मांग उपभोक्ता विकल्प से जुड़ी है। माईकल की मांग है कि E20 या भविष्य में किसी भी हाई-एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को व्यापक रूप से लागू करने से पहले स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं तकनीकी परीक्षण कराया जाए।
इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता और वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल अथवा प्योर पेट्रोल में विकल्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
माईकल का कहना है कि यदि ब्लेंडेड फ्यूल से वास्तव में उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ होता है तो उसका प्रभाव पेट्रोल की कीमत में भी दिखाई देना चाहिए।
हम वैकल्पिक ईंधन के खिलाफ नहीं हैं”
रोबिन माईकल ने कहा कि उनका विरोध वैकल्पिक ईंधन या देश में ऊर्जा के नए विकल्प विकसित करने के खिलाफ नहीं है। उनका सवाल नीति को लागू करने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों से जुड़ा है।
उन्होंने कहा, “हम विकास या वैकल्पिक ईंधन के खिलाफ नहीं हैं। हमारा सवाल नीति लागू करने के तरीके को लेकर है। जनता, वाहन मालिकों और किसानों से जुड़े किसी भी बड़े फैसले से पहले पर्याप्त साइंटिफिक टेस्टिंग, ट्रांसपेरेंसी और कंज्यूमर को विकल्प मिलना जरूरी है।”
18 सितंबर को जंतर-मंतर पर जुटने की अपील
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के ऐलान के साथ ही माईकल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, पार्टी के विभिन्न संगठनों, किसानों, युवाओं, वाहन मालिकों और आम नागरिकों से 18 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचकर शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन करने की अपील की है।
अब देखना होगा कि प्रस्तावित आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कितना समर्थन मिलता है तथा केंद्र सरकार की ओर से E20 नीति को लेकर उठाई जा रही इन आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार रोबिन माईकल द्वारा जारी किए गए दावों, मांगों और प्रस्तावित आंदोलन के संबंध में है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया जा रहा है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।


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