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बिन्नू भाटी के हाउस अरेस्ट का संगठन का दावा, DCP सेंट्रल जोन को सौंपा मांग पत्र

रिपोर्ट:- मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के किसानों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (मुलायम) द्वारा सूरजपुर कलेक्ट्रेट पर अनशन का ऐलान किया गया था। संगठन के जिला अध्यक्ष बिन्नू भाटी के नेतृत्व में किसानों ने 10 प्रतिशत आबादी भूखंड सहित कई मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखने की तैयारी की।
संगठन का दावा है कि अनशन से पहले पुलिस ने बिन्नू भाटी के आवास की घेराबंदी कर उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक होने की बात भी सामने आई। इसके बाद किसानों ने कलेक्ट्रेट पर अनशन करने के बजाय DCP सेंट्रल जोन को अपना मांग पत्र सौंपा।
पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के संबंध में कोई लिखित बयान अथवा आधिकारिक आदेश समाचार के लिए उपलब्ध नहीं हो सका है। इसलिए हाउस अरेस्ट से संबंधित विवरण को किसान संगठन के दावे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
10 प्रतिशत आबादी भूखंड की प्रमुख मांग
भारतीय किसान यूनियन (मुलायम) के ज्ञापन में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 39 गांवों के प्रभावित किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड दिए जाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।
इसके साथ ही पूर्व में सुनवाई हो चुकी आबादियों के मामलों का शीघ्र निस्तारण, शिफ्टिंग प्रकरणों की बहाली और लंबित बैकलीज मामलों को पूरा करने की मांग की गई है।
भूमिहीन किसानों के लिए 40-40 वर्गमीटर भूखंड की मांग
संगठन ने गांवों के गरीब एवं भूमिहीन किसान परिवारों को 40-40 वर्गमीटर के भूखंड उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इसके अलावा गांवों में पक्की सड़क, नाली, पार्क, पार्किंग, खेल मैदान, बिजली और स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास की मांग रखी गई है।
DCP को सौंपा मांग पत्र
प्रस्तावित अनशन के बीच किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने DCP सेंट्रल जोन को ज्ञापन सौंपा। संगठन के अनुसार, DCP ने किसानों को उनकी मांगों को जिला प्रशासन, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया।
इस दौरान गौतमबुद्ध नगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष दीपक भाटी ‘चोटीवाला’ की मौजूदगी का भी संगठन की ओर से उल्लेख किया गया है।
समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में भारतीय किसान यूनियन (मुलायम) ने कहा है कि यदि किसानों की मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन महापंचायत, आमरण अनशन और प्रदर्शन जैसे आंदोलनात्मक कदम उठा सकता है।
फिलहाल किसानों ने अपना मांग पत्र प्रशासन तक पहुंचा दिया है। अब किसानों की मांगों पर संबंधित विभागों की ओर से होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।



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