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हिंदन के डूब क्षेत्र में कृषि भूमि पर कथित निर्माण का मामला गरमाया, एडीएम न्यायिक ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा

सूरजपुर के पूर्व प्रधान एवं किसान टेकचंद की शिकायत पर स्थलीय निरीक्षण; सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन से मांगी गई जानकारी
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’
Vision Live News /  ग्रेटर नोएडा
सूरजपुर क्षेत्र में हिंदन नदी के डूब क्षेत्र में कृषि भूमि पर कथित रूप से पक्के निर्माण और सड़क बनाए जाने की शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है। सूरजपुर के पूर्व प्रधान एवं किसान टेकचंद द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र के बाद एडीएम (न्यायिक) प्रियंका ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हिंदन के डूब क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि पर निर्धारित नियमों के विपरीत निर्माण गतिविधियां की जा रही हैं तथा कुछ जमीनों को कथित रूप से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच और संबंधित अभिलेखों के आधार पर ही हो सकेगी।
जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में क्या कहा गया?
टेकचंद ने 27 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि ग्राम सूरजपुर में उनकी और उनकी पत्नी के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कृषि भूमि है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि हिंदन नदी के डूब क्षेत्र में आती है और वह वहां कृषि कार्य करते रहे हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आसपास की कुछ कृषि भूमि की खरीद के बाद मौके पर पक्की सड़क और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी भूमि पर भी कथित कब्जे और निर्माण गतिविधियों का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने आसपास की अन्य कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त तथा उसके कथित रूप से बदले जा रहे उपयोग की भी जांच कराने की मांग की है।
मौके पर पहुंचीं एडीएम न्यायिक
शिकायत के बाद एडीएम (न्यायिक) प्रियंका द्वारा मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किए जाने की जानकारी सामने आई है। निरीक्षण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों से डूब क्षेत्र में चल रही गतिविधियों तथा पूर्व में की गई विभागीय कार्रवाई के संबंध में जानकारी ली गई।
सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन से यह भी पूछा गया कि क्षेत्र में चल रही निर्माण गतिविधियों के संबंध में विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से मामले से संबंधित रिपोर्ट नोएडा प्राधिकरण को भेजे जाने की बात कही गई। इसके बाद रिपोर्ट कब और किन तथ्यों के आधार पर भेजी गई, इस संबंध में भी जानकारी मांगी गई।
सरकारी चकरोड की भी कराई गई पैमाइश
मौके पर सरकारी चकरोड की स्थिति की भी जांच और पैमाइश कराए जाने की जानकारी है। हालांकि पैमाइश की विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए चकरोड की अंतिम स्थिति के संबंध में प्रशासनिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
किसान ने की विस्तृत जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता टेकचंद ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दोबारा सक्षम अधिकारियों की समिति गठित की जाए। उन्होंने अपनी भूमि से कथित कब्जा हटाने, राजस्व अभिलेखों की जांच कराने तथा डूब क्षेत्र में किए गए निर्माण की वैधता की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई किए जाने तथा डूब क्षेत्र में कृषि भूमि के उपयोग से जुड़े नियमों की जांच की भी मांग की गई है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक जांच और संबंधित विभागों की रिपोर्ट होगी। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मौके पर हुए निर्माण और सड़क निर्माण के लिए संबंधित अनुमति या वैधानिक आधार मौजूद है अथवा नहीं तथा संबंधित भूमि का वास्तविक राजस्व और भूमि उपयोग संबंधी दर्जा क्या है।
डूब क्षेत्र में निर्माण पर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण
हिंदन नदी के डूब क्षेत्र में कृषि भूमि के उपयोग और निर्माण गतिविधियों से जुड़े मामलों में राजस्व, सिंचाई तथा संबंधित प्राधिकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इस मामले में हुई स्थलीय जांच के बाद आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि मौके पर चल रही गतिविधियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।
फिलहाल प्रशासनिक निरीक्षण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

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