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हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर साहित्य और पत्रकारिता का अनूठा संगम


करते ही सुमिरन हिंदी का, मन छंद-छंद हो जाता है : पं. सुरेश नीरव
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकार संगोष्ठी एवं भव्य कवि सम्मेलन, देश-विदेश के साहित्यकारों ने ऑनलाइन और प्रत्यक्ष रूप से की सहभागिता
    मौहम्मद इल्यास- दनकौरी/ ग्रेटर नोएडा
 हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर ग्रेटर नोएडा के पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट में साहित्य, पत्रकारिता और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के तत्वावधान में पत्रकार संगोष्ठी एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे साहित्यकारों, कवियों और पत्रकारों ने भी प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
कार्यक्रम में हिंदी भाषा की महत्ता, साहित्य और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, मीडिया की विश्वसनीयता, सामाजिक सरोकारों तथा भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। इसके बाद आयोजित कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से हिंदी के प्रति प्रेम, सम्मान और गौरव की भावना को स्वर दिया।
सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ लोकप्रिय कवयित्री मधु मिश्रा की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर पत्रकार संगोष्ठी आयोजित की गई। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रज्ञान आंदोलन के संपादक पंडित सुरेश नीरव ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पंडित सुरेश नीरव ने हिंदी भाषा और साहित्य की भावनात्मक शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा—
करते ही सुमिरन हिंदी का, मन छंद-छंद हो जाता है।”
उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय समाज की संवेदनाओं, संस्कृति, लोकजीवन और विचार परंपरा को अभिव्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण भाषा है।
साहित्य और पत्रकारिता एक ही सिक्के के दो पहलू
पंडित सुरेश नीरव ने साहित्य और पत्रकारिता के बीच गहरे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्य समाज के शाश्वत सत्य, मानवीय संवेदनाओं और जीवन-मूल्यों को स्वर प्रदान करता है, जबकि पत्रकारिता समकालीन घटनाओं, जनसरोकारों और सामाजिक यथार्थ का दस्तावेज प्रस्तुत करती है। दोनों की भूमिका अलग-अलग होते हुए भी उनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और विचारशील बनाना है।
उन्होंने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन मीडिया के विस्तार के साथ पत्रकारिता का दायरा लगातार व्यापक हुआ है। हालांकि इसके साथ विश्वसनीयता, निष्पक्षता, तथ्यपरकता और बाजारगत दबाव जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं।
उन्होंने पत्रकारिता से जुड़े लोगों का आह्वान करते हुए कहा कि पत्रकारिता को साहस, सत्यनिष्ठा और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ अपने मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। साहित्य पत्रकारिता के अंतर्मन को संवेदनशील बनाता है, वहीं पत्रकारिता साहित्य के विचारों और सामाजिक सरोकारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
तथ्यपरक और जिम्मेदार पत्रकारिता समय की आवश्यकता
संगोष्ठी में प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र हिंद आत्मा के संपादक एवं प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की कार्यकारिणी के सदस्य अशोक कौशिक ने वर्तमान हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के सामने सत्य को प्रभावशाली, तथ्यपरक और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना तथा समाचार माध्यमों की विश्वसनीयता बनाए रखना है। तेजी से बदलते मीडिया परिवेश में समाचारों की गति महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ तथ्य-सत्यापन, निष्पक्षता और जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने समाचारों के प्रसार को बेहद तेज कर दिया है। ऐसे में पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि किसी भी सूचना को प्रसारित करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और तथ्यात्मकता सुनिश्चित की जाए।
कवि सम्मेलन में हिंदी की महिमा और भारतीय संस्कृति की गूंज
कार्यक्रम के दूसरे चरण में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देश-विदेश से जुड़े कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति श्रद्धा, प्रेम और सम्मान की भावधारा प्रवाहित की।
कवयित्री रचना दीक्षित ने अपनी सरस एवं प्रभावशाली कविताओं से श्रोताओं को भावविभोर किया। कवि सम्मेलन में हिंदी की महिमा, मातृभाषा का गौरव, भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, विज्ञान और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत की गईं।
कवियों की विविध रचनाओं ने कार्यक्रम को साहित्यिक रंग देने के साथ-साथ श्रोताओं को सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर सोचने के लिए भी प्रेरित किया।
बड़ी संख्या में साहित्यकारों ने की सहभागिता
आयोजन में राजपाल यादव ‘राज’, उपमा गुप्ता, महेश अद्याना ‘मधुर’, प्रमिला भारद्वाज व्यास, प्रतीक्षा तिवारी, आर.एन. सिंह, के.पी. चौहान, भूदत्त शर्मा, अलका शर्मा, उमानाथ त्रिपाठी, गीता रस्तोगी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राधा बिष्ट, डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा, डॉ. रवींद्र कीर्ति, डॉ. सुनीति रावत, डॉ. एन. झा, मृत्युंजय दीक्षित, रूपचंद्र झा ‘मयंक’, बोधिसत्व गौतम, दया सिन्हा, विमल बहुगुणा, यज्ञपाल सिंह ‘यश’, डॉ. श्रद्धानंद झा, नीलम पाठक, गिरिजा कुलश्रेष्ठ, ऋषि सिन्हा, अजय शर्मा, दीपशिखा रावल तथा डॉ. नरेंद्र प्रसाद ‘प्राची’ सहित अनेक साहित्यकारों एवं कवियों ने सहभागिता की।
विदेशों से भी जुड़ी हिंदी की साहित्यिक आवाजें
कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि विदेशों में रह रहे प्रवासी साहित्यकारों ने भी ऑनलाइन माध्यम से इसमें सहभागिता की। अमेरिका, चीन, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कुवैत और सऊदी अरब से जुड़े साहित्यकारों एवं रचनाकारों ने कार्यक्रम में ऑनलाइन सहभागिता कर हिंदी के वैश्विक स्वरूप को रेखांकित किया।
अमेरिका से सुभाष चंद्र लखेड़ा एवं आनंद कुमार वर्मा, चीन से सुनीता चौहान एवं चिन्मय चतुर्वेदी, स्विट्जरलैंड से शाश्वती दीक्षित, जर्मनी से शरद गुप्ता एवं प्रकाश स्वरूप, कुवैत से संगीता चंद्र गुप्ता एवं उमेश चंद गैरोला तथा सऊदी अरब से डॉ. अजीत वर्मा, सुनीता माहेश्वरी, सुरेंद्र कुमार सैनी, अमीना खातून एवं अब्बास हैदर सहित अनेक रचनाकार कार्यक्रम से जुड़े।
इस अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने हिंदी को केवल भारत की भाषा के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में बसे भारतीयों और हिंदी प्रेमियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक कड़ी के रूप में भी प्रस्तुत किया।
हिंदी के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य और पत्रकारिता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना। एक ओर जहां पत्रकार संगोष्ठी में मीडिया की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई, वहीं कवि सम्मेलन ने हिंदी भाषा के साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्ष को मजबूती से सामने रखा।
आयोजन का संदेश स्पष्ट रहा कि बदलते तकनीकी और मीडिया परिवेश के बीच हिंदी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। साहित्यकारों, पत्रकारों और रचनाकारों के सामूहिक प्रयासों से हिंदी को नई पीढ़ी और वैश्विक मंच तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।


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