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शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों को बढ़ावा देने की पहलघरभरा में श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज का सामाजिक जागरूकता अभियान, पर्यावरण, दहेज, शिक्षा, लैंगिक समानता और नशा उन्मूलन पर हुआ संवाद



रिपोर्ट:- मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ /  गौतमबुद्धनगर 
स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल के सामाजिक एवं शैक्षिक सरोकारों को आगे बढ़ाने की दिशा में श्री द्रोण गौशाला समिति के अंतर्गत संचालित श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर द्वारा ग्राम घरभरा में व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत ग्रामीणों के साथ पर्यावरण संरक्षण, दहेज प्रथा, शिक्षा, लैंगिक समानता, नशा उन्मूलन, नैतिक मूल्यों और स्वस्थ जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद किया गया।
महाविद्यालय के सचिव रजनीकांत अग्रवाल के साकेतवासी पिताजी स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल द्वारा महाविद्यालय के लिए देखे गए उस सामाजिक दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा को केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर समाज सेवा, जनजागरूकता और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की भावना प्रमुख रही।
ग्रामीण समाज के साथ संवाद बना अभियान का केंद्र
कार्यक्रम की मेजबानी ग्राम घरभरा के मास्टर जी सुंदर भाटी ने की। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ नागरिक नेपाल जी ने की, जबकि संचालन विज्ञान संकाय के विभागाध्यक्ष एवं एनएसएस सहायक कार्यक्रम अधिकारी अमित नागर ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद महाविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्राओं ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखते हुए ग्रामीणों से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवनशैली पर जोर
कार्यक्रम के संचालक अमित नागर ने पर्यावरण प्रदूषण पर विस्तृत चर्चा करते हुए भूमि एवं वायु प्रदूषण तथा आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और प्रकृति के साथ अनावश्यक हस्तक्षेप का प्रभाव मानव जीवन के साथ-साथ समस्त जीव-जगत पर पड़ रहा है।
उन्होंने मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अत्यधिक एवं असावधानीपूर्ण उपयोग के प्रति भी लोगों को जागरूक किया तथा युवाओं से तकनीक का संतुलित और विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने का आह्वान किया।
उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्वच्छ वातावरण और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी द्वारा पर्यावरण के प्रति बरती गई लापरवाही का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है।
खान-पान में संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने स्थानीय एवं पारंपरिक भारतीय जीवन-पद्धति में मौजूद स्वास्थ्यकर पहलुओं को समझने और अपनाने का भी आह्वान किया।
दहेज प्रथा के खिलाफ युवाओं से पहल का आह्वान
इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ. नाज परवीन ने दहेज प्रथा को गंभीर सामाजिक समस्या बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव केवल आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सामाजिक स्थिति से भी जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि दहेज की मांग के कारण अनेक परिवार आर्थिक दबाव का सामना करते हैं और महिलाओं को मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने ग्रामीण समाज से दहेज प्रथा के विरुद्ध व्यक्तिगत एवं सामूहिक पहल करने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से दहेज-विरोधी संकल्प लेने तथा विवाह को आर्थिक लेन-देन के बजाय समानता, सम्मान और पारिवारिक सहयोग का संबंध बनाने की अपील की।
शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का आधार बताया
समाजशास्त्र एवं शिक्षा विभाग के सहायक आचार्य तथा विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव पांडे ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति में विवेक, सामाजिक चेतना और जिम्मेदारी विकसित करने का महत्वपूर्ण साधन है।
उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ सकता है। शिक्षा व्यक्ति को अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियों, भेदभाव और नशे जैसी समस्याओं के प्रति जागरूक करती है।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा को केवल परीक्षा और रोजगार तक सीमित न रखने तथा उनमें संवेदनशीलता, अनुशासन, ईमानदारी, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मानवीय मूल्यों के विकास पर भी ध्यान देने का आह्वान किया।
नुक्कड़ नाटक ने दिया लैंगिक समानता का संदेश
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण लैंगिक भेदभाव पर आधारित नुक्कड़ नाटक रहा। यह प्रस्तुति प्रसिद्ध नाटककार महेश दत्तानी के नाटक ‘तारा’ से प्रेरित थी, जिसका निर्देशन डॉ. अजमत आरा के मार्गदर्शन में किया गया।
नाटक में जुड़वां बच्चों की कहानी के माध्यम से समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव और पुरुष प्रधान मानसिकता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने दिखाया कि सामाजिक सोच और लैंगिक पक्षपात किस प्रकार बालिकाओं के अधिकारों और संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।
कविता, संवाद और अभिनय के माध्यम से बेटे और बेटी के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने का संदेश दिया गया। प्रस्तुति ने उपस्थित ग्रामीणों को प्रभावित किया और ग्रामीणों ने छात्राओं के अभिनय तथा विषय की प्रस्तुति की सराहना की।
नुक्कड़ नाटक में बी.ए. प्रथम वर्ष की माही नागर, शिवानी, प्रेरणा, साइबा, ज्योति पुत्री रामकुमार, मेहविश एवं ज्योति तथा बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की नाजिश, नाजिया, पायल भाटी, खुशी नागर एवं रश्मि ने सक्रिय भूमिका निभाई।
नशे के खिलाफ सामूहिक जागरूकता की जरूरत
अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सूर्य प्रताप राघव ने नशा उन्मूलन पर विचार रखते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए परिवार, शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर जागरूकता का वातावरण तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने युवाओं से खेल, शिक्षा, साहित्य, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जुड़ने की अपील की। साथ ही अभिभावकों से बच्चों के व्यवहार और संगति पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान देने का आग्रह किया।
नैतिक मूल्यों और संस्कारों पर विशेष जोर
महाविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया ने बच्चों और युवाओं में नैतिक मूल्यों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास के साथ संस्कार, संवेदनशीलता, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, छोटे के प्रति स्नेह और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सूचना की उपलब्धता अपने आप में ज्ञान और विवेक की गारंटी नहीं है। परिवार, विद्यालय और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए उचित वातावरण दिया जाए।
उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को पर्याप्त समय देने, उनके साथ संवाद बनाए रखने और मोबाइल एवं डिजिटल माध्यमों के संतुलित उपयोग के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
प्राचार्य डॉ. गिरिश कुमार वत्स ने बताया परिवार को पहली पाठशाला
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कुमार वत्स ने बच्चों के नैतिक मूल्यों, संस्कार, परिवेश, खान-पान, अनुशासन और आदर्श जीवन-पद्धति पर विस्तार से विचार रखे।
उन्होंने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल पुस्तकीय ज्ञान से संभव नहीं है। उनके व्यक्तित्व में संस्कार, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास भी जरूरी है।
उन्होंने परिवार को बच्चे की पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माता-पिता की भूमिका बच्चे के व्यक्तित्व निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या, खान-पान और संगति पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।
डॉ. वत्स ने संतुलित एवं पौष्टिक खान-पान पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ विचारों के विकास की बेहतर संभावना होती है। उन्होंने स्थानीय एवं पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जुड़ाव बनाए रखना भी आवश्यक है। उन्होंने बच्चों में ईमानदारी, परिश्रम, करुणा, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और मानवता जैसे मूल्यों को विकसित करने पर जोर दिया।
प्राचार्य ने कहा कि शिक्षण संस्थान और समाज एक-दूसरे के पूरक हैं। जब महाविद्यालय और गांव मिलकर सामाजिक समस्याओं पर काम करेंगे, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रभावी प्रयास संभव होंगे।
ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों का सम्मान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नेपाल जी ने सभी वक्ताओं, शिक्षकों, छात्राओं एवं ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण समाज में जागरूकता पैदा करने और नई पीढ़ी को सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने में उपयोगी हैं।
इस अवसर पर ग्राम घरभरा के प्रमुख नागरिकों एवं गणमान्य व्यक्तियों नेपाल जी, चरण नंबरदार, उदयवीर सिंह, चतर सिंह, ओमपाल भाटी, मानिक भाटी, सुंदर भाटी, पवन गोयल, गजब सिंह, राजेश भाटी, सतीश भाटी, ऋषिपाल भाटी, जोगिंदर भाटी, जिले सिंह फौजी, पुष्पेंद्र भाटी, कालू भाटी, सुबीन भाटी, बाबू भाटी, सत्य भाटी, धर्मावती, रामादेवी, कमला देवी, शशि देवी, साधना देवी, संगीता देवी, बबीता देवी एवं सविता सहित अन्य ग्रामवासियों को स्मृति-भेंट एवं पटका देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित करने वालों में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कुमार वत्स, कला संकाय के विभागाध्यक्ष अमित नागर, वाणिज्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति रानी सेन, बी.एड. विभाग की सहायक आचार्य हनी शर्मा, अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रशांत कनौजिया, अंग्रेजी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अजमत आरा, कला संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव पांडे (उर्फ पिंटू), डॉ. सूर्य प्रताप राघव, लिपिक करन नागर तथा इतिहास विभाग की सहायक आचार्या डॉ. नाज परवीन शामिल रहे।
राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में ग्राम घरभरा के मेजबान मास्टर जी सुंदर भाटी द्वारा महाविद्यालय से आए आचार्यों, छात्राओं एवं ग्रामवासियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई।
कार्यक्रम के पश्चात ग्रामवासियों ने महाविद्यालय के शिक्षकों एवं छात्राओं को विदाई दी तथा पर्यावरण संरक्षण, दहेज प्रथा के विरोध, शिक्षा के प्रसार, लैंगिक समानता, नशा उन्मूलन और नैतिक मूल्यों के संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता संदेशों को दैनिक जीवन में अपनाने का प्रयास करने की बात कही।
स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल के सामाजिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की पहल
ग्राम घरभरा में आयोजित यह जागरूकता अभियान स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल के उस सामाजिक एवं शैक्षिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आया, जिसमें शिक्षा को केवल कक्षा और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर समाज के व्यापक हित, सेवा, संवाद और जनजागरूकता से जोड़ने की भावना निहित थी।
महाविद्यालय की इस पहल ने शिक्षण संस्था और ग्रामीण समाज के बीच संवाद एवं सहभागिता को मजबूत करने के साथ सामाजिक विषयों पर सामूहिक चिंतन का अवसर भी प्रदान किया।



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