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“AI के दौर में HR का बदलता चेहरा: लॉयड कैंपस में 40+ विशेषज्ञों ने बताया भविष्य के कार्यस्थल का रोडमैप”


HR प्रोफेशनल्स और रिक्रूटर्स ने भर्ती, टैलेंट एनालिटिक्स, कर्मचारी अनुभव और भविष्य के कार्यस्थल पर साझा किए विचार
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच मानव संसाधन यानी HR का पारंपरिक स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। इसी बदलते परिदृश्य और भविष्य की कार्यस्थलीय जरूरतों पर चर्चा के लिए लॉयड कैंपस, ग्रेटर नोएडा में मानव संसाधन प्रौद्योगिकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में देश की विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं से जुड़े 40 से अधिक HR प्रोफेशनल्स एवं रिक्रूटर्स ने सहभागिता की।
कार्यशाला का फोकस HR में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आधुनिक भर्ती प्रक्रियाओं, टैलेंट मैनेजमेंट और उभरती HR प्रथाओं पर रहा। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को उद्योग की बदलती जरूरतों और भविष्य के कार्यस्थल में आवश्यक कौशल से रूबरू कराया।
AI ने बदली HR की कार्यप्रणाली
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी के मुख्य संबोधन से हुई। उन्होंने HR के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि AI और तकनीक अब भर्ती, टैलेंट एनालिटिक्स और कर्मचारी अनुभव जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने HR प्रोफेशनल्स से तकनीकी बदलावों के साथ लगातार अपडेट रहने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानवीय संवेदनाओं और मानवीय जुड़ाव को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
उद्योग और शिक्षा के बीच संवाद पर जोर
इस अवसर पर डॉ. रिपुदमन गौर, डीन, लॉयड बिजनेस स्कूल ने HR विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। उन्होंने वर्तमान समय में HR के सामने मौजूद चुनौतियों, उद्योग की बदलती अपेक्षाओं और विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने में उद्योग–शैक्षणिक सहयोग की भूमिका पर विचार साझा किए।
उन्होंने इस तरह के संवाद को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि इससे उन्हें अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ उद्योग की वास्तविक जरूरतों और कार्यस्थल की बदलती परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है।
विशेषज्ञों ने बताए भविष्य के HR के नए आयाम
कार्यशाला के दौरान डॉ. सौमेंद्र मोहंती, प्रो. मोहित अग्रवाल और डॉ. रागिब ने प्रशिक्षक एवं विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। विशेषज्ञों ने HR में AI के व्यावहारिक उपयोग, आधुनिक भर्ती प्रक्रियाओं, टैलेंट मैनेजमेंट और भविष्य के कार्यस्थल में आवश्यक कौशल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
विद्यार्थियों ने HR विशेषज्ञों से सीधे संवाद करते हुए उद्योग की अपेक्षाओं, नई HR तकनीकों और टेक्नोलॉजी आधारित कार्यस्थल में आवश्यक दक्षताओं से जुड़े सवाल भी किए।
डॉ. नीतू कामरा बाली के समन्वय में हुआ आयोजन
कार्यशाला के सफल संचालन में डॉ. नीतू कामरा बाली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके समन्वय और मार्गदर्शन में कार्यक्रम को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप संरचित किया गया। विद्यार्थियों को विशेषज्ञों के साथ संवाद करने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने के अवसर उपलब्ध कराए गए।
वैश्विक स्तर पर उद्योग–शैक्षणिक सहभागिता
लॉयड द्वारा उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहभागिता बढ़ाने के लिए इस तरह के विशेषज्ञ सत्र देश-विदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में आयोजित किए जा रहे हैं। संस्थान की ओर से भारत के साथ मलेशिया, भूटान और नेपाल के कई विश्वविद्यालयों में भी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए जा चुके हैं।
इन पहलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक उद्योग जगत के बदलते रुझानों, नई तकनीकों और भविष्य के कौशल से जोड़ना है।
विद्यार्थियों को मिला इंडस्ट्री एक्सपोजर
कार्यशाला में विद्यार्थियों को विभिन्न संगठनों से आए HR विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला। इस संवाद के माध्यम से छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया से लेकर टैलेंट मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी आधारित कार्यस्थल तक HR के बदलते आयामों को करीब से समझा।
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. फेहमीना खलीक, एसोसिएट डीन ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षकों और HR विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त ज्ञान को उद्योग की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।
उद्योग-केंद्रित शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
लॉयड कैंपस में आयोजित यह कार्यशाला केवल HR तकनीक पर चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने विद्यार्थियों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया। AI, डिजिटल तकनीक और मानवीय कौशल के संतुलन पर केंद्रित यह पहल लॉयड की उद्योग-केंद्रित शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम और वैश्विक शैक्षणिक सहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई।



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