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ग्रेटर नोएडा में किसानों की हुंकार: मुख्यमंत्री योगी तक पहुंचेगी 4 प्रतिशत आबादी प्लॉट की मांग



बिरौंडा में 44 गांवों के किसानों की पंचायत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक ज्ञापन भेजने की रणनीति; चेनपाल प्रधान बोले—अब शासन स्तर पर उठाएंगे किसानों की आवाज
   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के 44 गांवों से जुड़े किसानों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की आवाज तेज होती दिखाई दे रही है। सोमवार को ग्राम बिरौंडा में आयोजित पंचायत में किसानों ने 4 प्रतिशत आबादी प्लॉट सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर मंथन किया। पंचायत में किसानों ने स्पष्ट किया कि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मांग उठाए जाने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं होने पर अब उनकी आवाज शासन स्तर तक पहुंचाई जाएगी।
पंचायत की अध्यक्षता प्रकाश प्रधान ने की, जबकि संचालन चेनपाल प्रधान ने किया। पंचायत में बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे मांग
पंचायत में किसानों ने रणनीति बनाई कि अब अपनी मांगों को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। किसानों का कहना है कि क्षेत्र के विधायकों और सांसदों के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाया जाएगा, ताकि शासन स्तर पर किसानों की समस्याओं का संज्ञान लेकर समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
चेनपाल प्रधान ने कहा कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर अब शासन स्तर पर आवाज उठाने की जरूरत है। किसानों का उद्देश्य है कि उनकी समस्याओं और मांगों का विस्तृत ब्यौरा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाए, जिससे मामले में उच्च स्तर पर हस्तक्षेप हो सके।
44 गांवों के किसानों की एकजुटता पर जोर
पंचायत में किसानों ने कहा कि क्षेत्र के 44 गांवों से जुड़े किसानों के हितों से संबंधित मुद्दों को लेकर एकजुटता जरूरी है। किसानों का कहना है कि जमीन और आबादी से जुड़े मामलों का सीधा असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है, इसलिए इन मुद्दों का स्थायी समाधान आवश्यक है।
किसानों ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से आगे की रणनीति तैयार करेंगे। पंचायत में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों की मांगों को स्पष्ट रूप से शासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा जाए, ताकि संबंधित स्तर पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।
महापंचायत के बाद निर्णायक रणनीति की ओर किसान
किसानों की ओर से पहले भी महापंचायतों और आंदोलनों के माध्यम से अपनी मांगें उठाई जाती रही हैं। बिरौंडा में हुई पंचायत को उसी क्रम में महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मुद्दों पर अब केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि उन्हें ठोस समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
पंचायत में किसानों ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आगे की रणनीति सामूहिक रूप से तय की जाएगी। हालांकि, किसानों ने फिलहाल अपनी आवाज को शासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने को प्राथमिकता देने की बात कही है।
आबादी प्लॉट का मुद्दा बना प्रमुख केंद्र
किसानों की प्रमुख मांगों में 4 प्रतिशत आबादी प्लॉट का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया। किसानों का कहना है कि आबादी से जुड़े मामलों का समाधान उनके परिवारों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मांग को लेकर किसान लंबे समय से प्राधिकरण के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं।
किसानों का कहना है कि विकास प्राधिकरण क्षेत्र में जमीन से जुड़े मामलों में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान उनकी प्राथमिकता में होना चाहिए। इसी उद्देश्य से अब वे अपनी मांगों को उच्च स्तर तक ले जाने की तैयारी में हैं।
पंचायत में इन ग्रामीण प्रतिनिधियों की रही मौजूदगी
पंचायत में धर्मवीर नंबरदार, अमित पहलवान, राकेश नंबरदार, बाबूराम भाटी, मुखिया बीडीसी महावीर नागर, प्रमोद मुखिया, विजयपाल भाटी, लाला प्रधान, बालवीर प्रधान, प्रताप आर्य, राहुल आर्य, ओमेंद्र भाटी, महावीर भाटी, नरेंद्र भाटी, श्रीचंद शर्मा, रूपा गौतम और गोपीचंद सहित अन्य किसान एवं ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे।
अब शासन स्तर पर समाधान की उम्मीद
बिरौंडा की पंचायत के बाद किसानों की रणनीति का अगला कदम अपने क्षेत्रीय सांसदों और विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक अपनी मांगों को पहुंचाना है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन तैयार कर जनप्रतिनिधियों को सौंपेंगे और उनसे इसे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आग्रह करेंगे।
अब देखना होगा कि 44 गांवों के किसानों की यह आवाज शासन स्तर तक पहुंचने के बाद किस तरह का रुख सामने आता है और 4 प्रतिशत आबादी प्लॉट समेत किसानों की अन्य मांगों के समाधान को लेकर सरकार एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।


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