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“10% प्लॉट लेकर रहेंगे—जमीन हमारी है, आपकी नहीं, किसी के बाप की नहीं” के नारों से गूंजा धरना स्थल


तीसरे दिन भी गरमाया किसान आंदोलन, 10% प्लॉट की मांग पर किसानों और महिलाओं ने भरी हुंकार
किसान संघर्ष मोर्चा के धरने में सैकड़ों किसानों की मौजूदगी, महिलाओं ने भी संभाला मोर्चा
किसानों ने 10% प्लॉट, आबादियों के निस्तारण और नए कानून के अनुसार 20% प्लॉट की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया
  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"  / ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा में किसानों की मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आयोजित धरना-प्रदर्शन में सैकड़ों किसानों के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी भाग लिया। धरना स्थल पर किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों की मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
धरने के दौरान “10% प्लॉट लेकर रहेंगे—जमीन हमारी है, आपकी नहीं, किसी के बाप की नहीं” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा। आंदोलनकारियों ने कहा कि किसानों की जमीनों के अधिग्रहण के बाद शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार हुआ, लेकिन जमीन देने वाले किसानों के पुनर्वास, आबादी और प्लॉट से जुड़े अधिकारों का समाधान अभी भी पूरी तरह नहीं हुआ है।
तीसरे दिन के धरने की अध्यक्षता शांति देवी ने की, जबकि संचालन किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने किया।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने आंदोलन को दिया नया स्वरूप
किसान आंदोलन के तीसरे दिन महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। बड़ी संख्या में महिला किसानों ने धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों की मांगों का समर्थन किया और आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
धरना स्थल पर किसानों और महिलाओं ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आंदोलनकारियों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और आबादी से जुड़े मुद्दों का प्रभाव केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य जुड़ा हुआ है।
इसी कारण किसान संगठनों का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी आंदोलन को सामाजिक स्तर पर भी व्यापक आधार प्रदान कर रही है।
10% प्लॉट की मांग बनी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा
किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन में 10% प्लॉट की मांग प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आई।
किसान नेताओं का कहना है कि जिन किसानों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए ली गई, उनके अधिकारों और पुनर्वास से संबंधित मांगों का प्रभावी समाधान किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि किसानों के लिए जमीन केवल आर्थिक संपत्ति नहीं होती, बल्कि उनकी आजीविका, सामाजिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी होती है।
धरने में वक्ताओं ने दोहराया कि जब तक किसानों की प्रमुख मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, आंदोलन जारी रहेगा।
आबादी के निस्तारण और नए कानून के अनुसार 20% प्लॉट की भी मांग
धरने के दौरान किसानों की मांगों का दायरा केवल 10% प्लॉट तक सीमित नहीं रहा। किसान नेताओं ने आबादियों के निस्तारण तथा नए कानून के अनुसार 20% प्लॉट लागू किए जाने की मांग भी उठाई।
सूरन प्रधान ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा इन मुद्दों को लेकर गंभीर है और किसानों के हितों से जुड़े इन विषयों पर पीछे हटने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रखने का संकल्प है, जब तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं किया जाता।
डॉ. रुपेश वर्मा बोले—शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार
धरने को संबोधित करते हुए डॉ. रुपेश वर्मा ने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन को नागरिकों का बुनियादी संवैधानिक अधिकार बताया।
उन्होंने अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि शक्तियों का प्रयोग करते समय अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
डॉ. रुपेश वर्मा ने आकृति चौधरी के मामले में लगाए गए ₹5 लाख के जुर्माने का उल्लेख करते हुए अधिकारियों द्वारा शक्तियों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि न्यायालय की टिप्पणियों का सार यह है कि अधिकारी जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं। उनके अनुसार, प्रशासनिक शक्तियों के साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार नागरिकों के बुनियादी अधिकारों में शामिल है और किसी भी परिस्थिति में शक्तियों के कथित दुरुपयोग के माध्यम से नागरिकों की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।
सुखबीर खलीफा का आरोप—जिन किसानों की जमीन पर शहर बसा, उन्हीं के हक की लड़ाई
धरने को संबोधित करते हुए सुखबीर खलीफा ने कहा कि आज जिन जमीनों पर शहर और विकास परियोजनाएं खड़ी हैं, उनमें बड़ी संख्या उन किसानों की जमीनों की है जिन्होंने विकास के लिए अपनी भूमि दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन और किसानों के अधिकारों से जुड़े मामलों में दलाली और भ्रष्टाचार का बोलबाला है।
सुखबीर खलीफा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन की ओर से गांवों में फ्लैग मार्च के माध्यम से किसानों में भय पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को संविधान के प्रति निष्ठावान रहते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और किसी भी आंदोलनकारी को भयभीत करने के बजाय बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशना चाहिए।
उन्होंने किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से ऐसी कार्रवाई की निंदा किए जाने की बात कही।
किसानों की मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा”
किसान नेताओं ने धरने के दौरान साफ किया कि आंदोलन को किसी तात्कालिक घोषणा के आधार पर समाप्त नहीं किया जाएगा।
सोररन प्रधान ने कहा कि किसान संघर्ष मोर्चा 10% प्लॉट, आबादियों के निस्तारण और नए कानून के अनुसार 20% प्लॉट लागू कराने के मुद्दे पर पूरी तरह वचनबद्ध है।
उन्होंने कहा कि किसानों के उपरोक्त मुद्दों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा और किसान अपने अधिकारों की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
उनके बयान के बाद धरना स्थल पर मौजूद किसानों ने भी नारेबाजी करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।
धरने में किसान नेताओं ने उठाए कई सवाल
तीसरे दिन के धरने में वक्ताओं ने भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों की स्थिति, आबादी से जुड़े मामलों और पुनर्वास एवं प्लॉट संबंधी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
किसान नेताओं का कहना रहा कि विकास की प्रक्रिया में किसानों की भूमि का उपयोग होने के बाद किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने प्रशासन और संबंधित प्राधिकरणों से किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की।
आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी संकेत
तीसरे दिन किसानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी और महिलाओं की भागीदारी से आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का दावा किसान नेताओं ने किया।
किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से स्पष्ट किया गया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक धरना जारी रहेगा।
इससे संकेत है कि आने वाले दिनों में किसानों की ओर से आंदोलन को और व्यापक रूप देने की कोशिश की जा सकती है।
कौन-कौन रहे मौजूद?
धरना-प्रदर्शन में पूनम, जोगेंद्री, जयप्रकाश आर्य, पप्पू नागर, बीरी प्रधान, पप्पू ठेकेदार, निशांत रावल, प्रशांत भाटी, बाबा करतार, नरेश नागर, मैन मुखिया, डॉ. गजेंद्र, सुंदर भाटी, बुधपाल यादव, गबरी मुखिया, सतबीर यादव और तिलक देवी सहित बड़ी संख्या में किसान एवं महिलाएं मौजूद रहीं।
धरना स्थल पर किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और आंदोलन को आगे जारी रखने का संकल्प दोहराया।
किसानों की मांगों पर अब प्रशासन की अगली भूमिका अहम
किसान आंदोलन के तीसरे दिन की तस्वीर यह संकेत देती है कि 10% प्लॉट, आबादी के निस्तारण और अन्य भूमि संबंधी मांगें अब भी किसानों के बीच प्रमुख मुद्दा बनी हुई हैं।
एक तरफ किसान संगठन आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने इस आंदोलन को संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में ले जाने की चुनौती है।
आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्राधिकरण और प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच किसी सार्थक संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
किसानों का संदेश साफ—मांग पूरी होने तक संघर्ष
तीसरे दिन के धरने से किसान संघर्ष मोर्चा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि 10% प्लॉट और आबादी से जुड़े मुद्दे उनके लिए महज प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि भूमि और अधिकारों से जुड़ा बड़ा सवाल हैं।
किसानों और महिलाओं की मौजूदगी, लगातार नारेबाजी और आंदोलन जारी रखने के ऐलान ने धरना-प्रदर्शन को और मुखर बना दिया।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि किसान संघर्ष मोर्चा के आंदोलन और प्रशासन के बीच संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और किसानों की प्रमुख मांगों पर समाधान की कोई ठोस राह निकलती है या नहीं।


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