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पैकेजिंग उद्योग को राहत देने की मांग, IEA ने वित्त मंत्री से इनवर्टेड GST खत्म करने और ऑटोमैटिक रिफंड लागू करने की अपील


गौतमबुद्ध नगर के उद्यमियों ने कहा– कार्यशील पूंजी फंसने से उद्योग संकट में, जल्द समाधान नहीं हुआ तो इकाइयों पर बंदी का खतरा

रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"

Vision Live News / गौतमबुद्धनगर

इंडस्ट्रियल एंट्रेपरेणुर्स एसोसिएशन (IEA), गौतमबुद्ध नगर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर पैकेजिंग उद्योग में लागू इनवर्टेड जीएसटी (Inverted GST Structure) को समाप्त करने तथा जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को स्वचालित, सरल और समयबद्ध बनाने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा कर व्यवस्था के कारण उद्योगों की बड़ी कार्यशील पूंजी रिफंड में फंस रही है, जिससे विशेषकर एमएसएमई इकाइयों पर गंभीर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।


IEA के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन लगातार वित्त मंत्री से मुलाकात का समय मांग रही है, लेकिन समय नहीं मिलने के कारण उद्योग की गंभीर समस्याओं को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर देश का प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां बड़ी संख्या में पैकेजिंग उद्योग संचालित हैं और ये उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने के साथ देश के विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।


उन्होंने बताया कि अधिकांश तैयार पैकेजिंग उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है, जबकि उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य प्रमुख इनपुट पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। इस 13 प्रतिशत के अंतर के कारण उद्योगों की बड़ी राशि जीएसटी रिफंड में लंबे समय तक फंसी रहती है, जिससे नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) प्रभावित होता है और कारोबार चलाना कठिन हो जाता है।


संजीव शर्मा ने कहा कि वर्तमान जीएसटी रिफंड प्रक्रिया अत्यधिक जटिल और समय लेने वाली है। यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो कई पैकेजिंग इकाइयां बंद होने की स्थिति में पहुंच सकती हैं, जिसका सीधा असर हजारों कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ेगा।


IEA की प्रमुख मांगें


पैकेजिंग उद्योग में इनपुट और आउटपुट पर जीएसटी की समान दर लागू कर इनवर्टेड जीएसटी व्यवस्था समाप्त की जाए।


तब तक जीएसटी रिफंड प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए।


आयकर रिफंड की तर्ज पर "वन-क्लिक ऑटोमैटिक मंथली जीएसटी रिफंड" प्रणाली लागू की जाए।


निर्यातोन्मुख और रोजगार सृजित करने वाले पैकेजिंग उद्योगों के लिए विशेष राहत और प्रोत्साहनकारी नीतियां बनाई जाएं।



IEA ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे हजारों पैकेजिंग इकाइयों को राहत मिलेगी, रोजगार सुरक्षित रहेगा और 'मेक इन इंडिया' तथा 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी मजबूती मिलेगी।


वहीं, एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पी.के. तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि उद्योगों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उद्यमियों को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।



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