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महिलाओं की शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी को लेकर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (महिला प्रकोष्ठ) की उत्तर प्रदेश संयोजक व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मंजू नागर ने लिया संकल्प

महिलाएं केवल परिवार की आधारशिला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की मजबूत भागीदार बनें: मंजू नागर
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ हापुड़ / कुचेसर
स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा महिला प्रकोष्ठ की उत्तर प्रदेश संयोजक एवं उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मंजू नागर ने महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब समाज की आधी आबादी यानी महिलाएं भी शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में समान रूप से भागीदारी करेंगी।
श्रीमती मंजू नागर ने कहा कि आज के समय में महिलाओं की भूमिका केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाएं परिवार की रीढ़ होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की प्रगति की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। इसलिए उन्हें शिक्षित, आत्मनिर्भर, जागरूक और सामाजिक रूप से सक्रिय बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल घर के चूल्हे-चौके तक सीमित रखने की सोच को बदलना होगा। परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए महिलाएं शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, राजनीति, व्यवसाय, खेल, विज्ञान, तकनीक, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में भी अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन कर सकती हैं। जब महिलाओं को समान अवसर और उचित मंच मिलता है तो वे न केवल अपने परिवार को आगे बढ़ाती हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए संगठन प्रतिबद्ध
मंजू नागर ने कहा कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की सोच भी यही है कि समाज की महिलाओं को आगे लाया जाए और उन्हें सामाजिक एवं राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिले। महिला प्रकोष्ठ के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने, उन्हें सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने और उनकी प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा को केवल व्यक्तिगत विकास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। एक शिक्षित महिला पूरे परिवार को शिक्षित और जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बेटी शिक्षित होती है तो आने वाली पीढ़ियों पर भी उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए समाज में बेटियों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।
आधी आबादी की भागीदारी के बिना विकास अधूरा
मंजू नागर ने कहा कि यदि समाज की लगभग आधी आबादी शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से पीछे रह जाएगी तो समाज की प्रगति भी अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित होकर सामाजिक और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से आगे आएं, इसके लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अवसर देने का अर्थ पुरुषों से प्रतिस्पर्धा कराना नहीं, बल्कि उन्हें पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ने का समान अवसर देना है। परिवार, समाज और राष्ट्र तभी मजबूत हो सकता है, जब महिला और पुरुष दोनों समान रूप से अपनी क्षमता और प्रतिभा का उपयोग करें।
दूसरे देशों से सीखने की जरूरत
श्रीमती मंजू नागर ने कहा कि दुनिया के कई देशों में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभा रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, उद्योग, तकनीक, खेल और सामाजिक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी उन देशों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को भी सकारात्मक उदाहरणों से सीख लेते हुए महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना चाहिए। हमारा उद्देश्य किसी अन्य समाज की नकल करना नहीं, बल्कि अच्छी व्यवस्थाओं और सकारात्मक सोच से प्रेरणा लेकर भारतीय समाज को और मजबूत बनाना होना चाहिए।
बेटियों की शिक्षा से बदलेगा समाज
मंजू नागर ने कहा कि समाज में बदलाव की शुरुआत घर से होती है। यदि परिवार अपनी बेटियों को बेटों के समान शिक्षा, सम्मान और अवसर देगा तो आने वाले समय में इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बेटियों की शिक्षा को बोझ न समझें, बल्कि इसे परिवार और समाज के उज्ज्वल भविष्य में निवेश के रूप में देखें।
उन्होंने कहा कि शिक्षित महिला अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझती है। वह अपने बच्चों को बेहतर संस्कार और शिक्षा देने के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं के प्रति भी अधिक जागरूक होती है। इसलिए महिलाओं की शिक्षा समाज के समग्र विकास की बुनियाद है।
स्वतंत्रता दिवस पर लिया महिला सशक्तिकरण का संकल्प
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संदेश में मंजू नागर ने कहा कि देश की आजादी हमें समानता, सम्मान और अवसरों के मूल्यों की याद दिलाती है। यदि हम वास्तव में विकसित और मजबूत भारत का निर्माण करना चाहते हैं तो महिलाओं को विकास की मुख्यधारा में समान अवसर देना होगा।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा महिला प्रकोष्ठ महिलाओं की शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने आह्वान किया कि समाज के प्रत्येक परिवार को अपनी बेटियों और महिलाओं को शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा और आगे बढ़ने के अवसर देने का संकल्प लेना चाहिए। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से जागरूक होकर आगे आएंगी, तभी समाज का वास्तविक विकास संभव होगा और राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
मंजू नागर ने कहा कि “जिस समाज की महिलाएं शिक्षित, जागरूक और सशक्त होती हैं, उस समाज की आने वाली पीढ़ियां भी मजबूत होती हैं। इसलिए महिलाओं को आगे बढ़ाना केवल महिलाओं का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य का सवाल है।”
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