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आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में ट्रांसलेशनल रिसर्च के लिए ग्रांट प्रस्ताव लेखन पर कार्यशाला


  Vision Live / ग्रेटर नोएडा
 आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को “Sponsored & Seed Grant Proposal Writing for Translational Research” विषय पर एक महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन Institution’s Innovation Council (IIC) के तत्वावधान में कॉलेज के नायडू हॉल में किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को स्पॉन्सर्ड तथा सीड ग्रांट के लिए प्रभावी शोध प्रस्ताव तैयार करने की बारीकियों से अवगत कराना था, ताकि शोध परिणामों को सामाजिक रूप से उपयोगी, व्यावहारिक एवं बाजारोन्मुख नवाचारों में परिवर्तित किया जा सके।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. हिमांशु अग्रवाल, मैनेजर-इन्क्यूबेशन, AIC IIT दिल्ली रहे। उन्होंने शोध प्रस्ताव तैयार करने के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। इनमें शोध समस्या की स्पष्ट पहचान, उद्देश्य निर्धारण, नवाचारी कार्यप्रणाली, यथार्थवादी बजट, अपेक्षित परिणाम तथा संबंधित फंडिंग एजेंसियों की प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रस्ताव को तैयार करना प्रमुख रहा।
डॉ. अग्रवाल ने Translational Research की उपयोगिता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शोध का वास्तविक प्रभाव तभी व्यापक होता है, जब प्रयोगशाला में विकसित विचारों एवं तकनीकों को व्यावहारिक समाधान, उत्पाद, प्रक्रिया अथवा बाजार के लिए तैयार तकनीक में परिवर्तित किया जा सके। उन्होंने प्रतिभागियों को शोध परिणामों के व्यावसायीकरण और सामाजिक उपयोगिता की दिशा में सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को Grant Proposal Writing में आने वाली प्रमुख चुनौतियों तथा उन्हें प्रभावी रणनीतियों के माध्यम से दूर करने के उपायों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन भी दिया गया। संवादात्मक चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया गया और प्रतिस्पर्धी शोध प्रस्ताव तैयार करने के उपयोगी सुझाव साझा किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मयंक गर्ग, निदेशक, आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज एवं अध्यक्ष, IIC के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने संस्थान में शोध, नवाचार एवं उद्यमिता के मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया तथा संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को बाहरी शोध फंडिंग के अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ. राजीव रंजन, संयोजक, IIC ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता, प्रतिभागियों तथा आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के सक्रिय सहयोग की सराहना की।
कार्यशाला में बी.टेक एवं एमबीए कार्यक्रमों के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। व्यावहारिक उदाहरणों, संवादात्मक चर्चाओं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से प्रतिभागियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रतिस्पर्धी शोध प्रस्ताव तैयार करने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं बाहरी फंडिंग अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यशाला ने संस्थान में शोध एवं नवाचार संस्कृति को मजबूत करने तथा शोधकर्ताओं को अनुदान-आधारित परियोजनाओं के लिए अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में अपनी उपयोगिता सिद्ध की।
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