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नशा मुक्त युवा, विकसित भारत' का संकल्प: जीएनआईओटी एमबीए कॉलेज में विद्यार्थियों ने ली नशामुक्ति की शपथ

रिपोर्ट : मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"
Vision Live News / ग्रेटर नोएडा
विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन यदि यही युवा नशे की गिरफ्त में आ जाएं, तो उनका भविष्य ही नहीं, बल्कि देश की प्रगति भी प्रभावित होती है। इसी सोच के साथ भारत सरकार के 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत' अभियान के अंतर्गत नॉलेज पार्क-2 स्थित जीएनआईओटी एमबीए कॉलेज में संस्थान के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में नशामुक्ति जागरूकता एवं प्रेरणादायी सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया और उन्हें स्वस्थ, अनुशासित तथा नशामुक्त जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे स्वयं किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। पूरे सभागार में जब सैकड़ों विद्यार्थियों ने एक स्वर में नशामुक्त भारत का संकल्प दोहराया, तो वातावरण राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक जागरूकता के संदेश से गूंज उठा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती बीके सिस्टर ललिता, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका एवं आध्यात्मिक अध्यापिका, ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि "युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और नशा इसी शक्ति को भीतर से कमजोर कर देता है।" उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के शरीर को ही नहीं, बल्कि उसकी सोच, परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करता है। यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है तो युवाओं को मानसिक रूप से मजबूत, सकारात्मक और आत्मानुशासित बनना होगा।
उन्होंने कहा कि केवल बाहरी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मन की शांति और आत्मबल के लिए राजयोग मेडिटेशन अत्यंत प्रभावी माध्यम है। आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक विचार और आत्मिक मूल्यों को अपनाकर युवा तनाव, गलत संगति और नशे जैसी बुराइयों से स्वयं को दूर रख सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने वास्तविक आत्मिक स्वरूप—शांति, पवित्रता और सकारात्मकता—को पहचानने तथा जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाने का आह्वान किया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अंशुल शर्मा ने कहा कि शिक्षित और जागरूक युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे न केवल स्वयं नशे से दूर रहें, बल्कि अपने परिवार और समाज में भी नशामुक्ति का संदेश लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, खेल, नवाचार और सामाजिक सेवा के माध्यम से युवा देश को नई दिशा दे सकते हैं, जबकि नशा उनके सपनों और क्षमताओं को समाप्त कर देता है।
जीएनआईओटी ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार गुप्ता तथा उपाध्यक्ष श्री गौरव गुप्ता ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति जैसे अभियान युवाओं को सही दिशा देने और स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता रही। सभी ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर नशामुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करने का संदेश दिया।
आज जब देश 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब ऐसे जनजागरूकता अभियान यह स्पष्ट करते हैं कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि जागरूक और जिम्मेदार युवाओं की भागीदारी से संभव है। जीएनआईओटी एमबीए कॉलेज का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, जिसने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि नशामुक्त जीवन ही स्वस्थ, सफल और सशक्त भारत की आधारशिला है।

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