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84 की उम्र, 30-35% हार्ट पंपिंग और सिर्फ एक गुर्दा—फोर्टिस ग्रेटर नोएडा ने मित्राक्लिप से बचाया हाई-रिस्क मरीज


गंभीर हार्ट फेलियर और लीकिंग मित्रल वाल्व से जूझ रहे मरीज का बिना ओपन-हार्ट सर्जरी सफल उपचार, क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मामला

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" /  ग्रेटर नोएडा
 बढ़ती उम्र के साथ हृदय संबंधी बीमारियों का इलाज अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन जब मरीज की उम्र 84 वर्ष हो, हृदय की पंपिंग क्षमता महज 30-35 प्रतिशत रह गई हो और केवल एक गुर्दा काम कर रहा हो, तो उपचार का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे ही एक जटिल और हाई-रिस्क मामले का सफल प्रबंधन फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में किया गया है।

अस्पताल के अनुसार, कार्डियोलॉजी टीम ने मित्राक्लिप (MitraClip) प्रक्रिया की मदद से गंभीर हार्ट फेलियर से जूझ रहे 84 वर्षीय मरीज के लीकिंग मित्रल वाल्व का सफल उपचार किया। अस्पताल ने इसे क्षेत्र में अपनी तरह का पहला मामला बताया है।

इस मामले की खास बात यह रही कि मरीज की उम्र और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था। ऐसे में चिकित्सकों ने मिनिमली इनवेसिव, कैथेटर आधारित उपचार को विकल्प के तौर पर चुना।

सांस फूलना और बार-बार हार्ट फेलियर से परेशान थे मरीज

मरीज जब अस्पताल पहुंचे तो उनकी हालत चिंताजनक थी। उन्हें लगातार सांस फूलने की शिकायत थी और शरीर में काफी कमजोरी आ चुकी थी। इसके अलावा उन्हें बार-बार हार्ट फेलियर की स्थिति का सामना करना पड़ रहा था।

जांच के दौरान पता चला कि उनके हृदय का मित्रल वाल्व ठीक से बंद नहीं हो रहा था। इसके कारण हृदय से बाहर जाने वाला रक्त पूरी तरह आगे जाने के बजाय कुछ मात्रा में वापस हृदय की ओर रिस रहा था। इस स्थिति को मित्रल वाल्व रिगर्जिटेशन कहा जाता है।

मरीज का हृदय पहले से ही काफी कमजोर था और उसकी पंपिंग क्षमता केवल 30-35 प्रतिशत रह गई थी। ऐसे में वाल्व से होने वाला रिसाव हृदय पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा था और हार्ट फेलियर की समस्या को और बढ़ाने का खतरा बना हुआ था।

फरवरी में दो स्टेंट, एक ही गुर्दा और यूरिनरी इंफेक्शन ने बढ़ाई चुनौती

मामला इसलिए भी जटिल था क्योंकि मरीज को पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। फरवरी 2026 में उनकी हृदय धमनियों में मौजूद अवरोध को दूर करने के लिए दो स्टेंट डाले गए थे।

इसके अलावा उनका केवल एक गुर्दा काम कर रहा था। मरीज की प्रोस्टेट ग्रंथि भी बढ़ी हुई थी और उन्हें गंभीर यूरिनरी इंफेक्शन की समस्या थी।

84 वर्ष की उम्र, कमजोर हृदय, हाल में किए गए कार्डियक इंटरवेंशन, एक ही गुर्दे का काम करना और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए डॉक्टरों के लिए यह तय करना चुनौतीपूर्ण था कि किस तरीके से वाल्व का उपचार किया जाए, जिससे मरीज को कम से कम अतिरिक्त जोखिम हो।

ओपन-हार्ट सर्जरी की जगह चुना गया मिनिमली इनवेसिव विकल्प

मरीज की पूरी स्थिति का विशेषज्ञों ने मूल्यांकन किया। पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी में सीने में बड़ा चीरा लगाना पड़ता और इस मरीज में सर्जरी से जुड़े जोखिम अधिक हो सकते थे।

ऐसे में फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की कार्डियोलॉजी टीम ने मित्राक्लिप प्रक्रिया का विकल्प चुना।

मित्राक्लिप एक कैथेटर आधारित मिनिमली इनवेसिव तकनीक है। इसमें पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी की तरह सीने को खोलने की आवश्यकता नहीं होती। शरीर की रक्तवाहिका के रास्ते एक कैथेटर हृदय तक पहुंचाया जाता है और विशेष क्लिप की मदद से लीक कर रहे मित्रल वाल्व के पत्तों को इस तरह जोड़ा जाता है कि रक्त का पीछे की ओर होने वाला रिसाव कम हो सके।

3डी इमेजिंग की मदद से वाल्व पर लगाई गई MitraClip XTW G4

डॉ. हरनीश सिंह भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट-कार्डियोलॉजी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी टीम ने प्रक्रिया को अंजाम दिया।

प्रक्रिया के दौरान पैर की रक्तवाहिका के रास्ते कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया गया। इसके बाद 3डी इमेजिंग तकनीक की सहायता से लीक कर रहे मित्रल वाल्व की स्थिति को देखा गया।

डॉक्टरों ने MitraClip XTW G4 क्लिप को वाल्व के उचित स्थान पर लगाया। इसका उद्देश्य वाल्व को बेहतर तरीके से बंद कराना और रक्त के पीछे की ओर होने वाले रिसाव को कम करना था।

अस्पताल के अनुसार, पूरी प्रक्रिया बिना किसी बड़ी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी हुई और वाल्व का रिसाव भी कम हुआ।

प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत में आया सुधार

उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार देखा गया। सांस फूलने समेत उनकी शिकायतों में राहत मिली और उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डिस्चार्ज के बाद भी मरीज कार्डियोलॉजी टीम की निगरानी में हैं और उनका नियमित फॉलो-अप किया जा रहा है।

चिकित्सकों के मुताबिक, लीकिंग मित्रल वाल्व को समय पर नियंत्रित करना जरूरी था, क्योंकि लगातार वाल्व लीकेज से कमजोर हृदय पर दबाव बढ़ सकता था। इससे हार्ट फेलियर की स्थिति बिगड़ने और भविष्य में बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आशंका बढ़ सकती थी।

डॉ. हरनीश भाटिया ने बताया—क्यों था यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण

डॉ. हरनीश सिंह भाटिया ने कहा कि मरीज की उम्र, गंभीर हार्ट फेलियर, हृदय की धमनियों में अवरोध के लिए हाल में किए गए उपचार और केवल एक गुर्दे के काम करने के कारण यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था।

उनके अनुसार, ऐसे हाई-रिस्क मरीज में ओपन-हार्ट सर्जरी करना सुरक्षित तरीके से काफी मुश्किल हो सकता है। मित्राक्लिप ने बिना सीने में बड़ी सर्जरी किए लीकिंग वाल्व के उपचार का विकल्प उपलब्ध कराया।

उन्होंने कहा कि इस तरह की सफलता यह दर्शाती है कि सावधानीपूर्वक मरीज का चयन और उन्नत कार्डियक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल उन मरीजों के उपचार में भी मदद कर सकता है, जिनके लिए पारंपरिक उपचार विकल्प सीमित होते हैं।

बिंदु शर्मा बोलीं—उन्नत तकनीक और विशेषज्ञ टीम का तालमेल जरूरी

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की फैसिलिटी डायरेक्टर बिंदु शर्मा ने कहा कि जटिल हृदय रोगों के मामलों में केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि चिकित्सकीय अनुभव, विशेषज्ञता और टीम के बीच बेहतर तालमेल भी बेहद महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा मरीजों को उनके घर के नजदीक उन्नत कार्डियक उपचार विकल्प उपलब्ध कराने के लिए अपनी सेवाओं को लगातार मजबूत कर रहा है।

उनके मुताबिक, मरीज की विभिन्न स्वास्थ्य चुनौतियों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद टीम ने उनकी स्थिति के अनुरूप अपेक्षाकृत कम इनवेसिव उपचार उपलब्ध कराया। प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत में आया सुधार हाई-रिस्क मरीजों के लिए विशेषज्ञ कार्डियक केयर की अहमियत को दर्शाता है।

क्या है मित्राक्लिप और क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?

मित्राक्लिप एक मिनिमली इनवेसिव कैथेटर-आधारित प्रक्रिया है, जिसका उपयोग चयनित मरीजों में मित्रल वाल्व के रिसाव को कम करने के लिए किया जाता है।

इस तकनीक में सीने को खोलने के बजाय रक्तवाहिका के रास्ते कैथेटर को हृदय तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद विशेष क्लिप को लीक कर रहे वाल्व पर लगाया जाता है, जिससे वाल्व के पत्तों के बीच होने वाला रिसाव कम किया जा सके।

विशेष रूप से ऐसे मरीजों में, जिनमें पारंपरिक सर्जरी का जोखिम अधिक हो सकता है, चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद यह एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प हो सकता है। हालांकि हर मरीज के लिए मित्राक्लिप उपयुक्त नहीं होती और इसका निर्णय हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा मरीज की पूरी मेडिकल स्थिति का आकलन करने के बाद किया जाता है।

हाई-रिस्क मरीजों के लिए बढ़ रहे उपचार विकल्प

इस मामले का महत्व केवल एक सफल प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। उम्रदराज मरीजों में जब हार्ट फेलियर के साथ अन्य गंभीर बीमारियां भी मौजूद हों, तब चिकित्सकों को उपचार के लाभ और संभावित जोखिम के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

ऐसे मामलों में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की उन्नत तकनीकें उन मरीजों के लिए विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी अपेक्षाकृत अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा का यह मामला इसी दिशा में एक उदाहरण के तौर पर सामने आया है, जहां मरीज की उम्र, कमजोर हृदय और अन्य जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए कम इनवेसिव प्रक्रिया के जरिए लीकिंग वाल्व का उपचार किया गया।
विजन लाइव न्यूज का विशेष विश्लेषण

84 वर्षीय मरीज का यह मामला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी चुनौती मरीज की उम्र नहीं, बल्कि उम्र के साथ मौजूद कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक साथ होना थी। कमजोर हृदय, 30-35 प्रतिशत पंपिंग क्षमता, हाल में लगाए गए स्टेंट, एक ही गुर्दे का काम करना और संक्रमण जैसी परिस्थितियां किसी भी बड़ी सर्जिकल प्रक्रिया के जोखिम को बढ़ा सकती थीं।

ऐसे में चिकित्सकों का फोकस केवल वाल्व के इलाज पर नहीं, बल्कि मरीज के समग्र जोखिम को कम रखने पर भी रहा। मित्राक्लिप जैसी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया ने इस मामले में एक वैकल्पिक उपचार मार्ग उपलब्ध कराया।

फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के अनुसार, प्रक्रिया के बाद मरीज की हालत में सुधार हुआ और उन्हें स्थिर अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। हालांकि, ऐसे मरीजों में आगे का नियमित फॉलो-अप और चिकित्सकीय निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
यहां चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी यह उपलब्धि ग्रेटर नोएडा के लिए इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि अस्पताल के अनुसार, क्षेत्र में इस तरह के हाई-रिस्क मरीज का मित्राक्लिप प्रक्रिया से सफल उपचार पहली बार किया गया है। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि आधुनिक कार्डियक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं अब दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख शहरी केंद्रों से बाहर भी जटिल हृदय रोगों के उपचार के विकल्पों को विस्तार दे रही हैं।


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