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गुर्जर समाज की राजनीतिक भागीदारी पर ग्रेटर नोएडा में मंथन, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी में 2027 तक संघर्ष का संकल्प

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी बनी संगोष्ठी का प्रमुख आकर्षण, संगठन महामंत्री बच्चू सिंह बैसला बोले— समाज के सम्मान और अधिकारों से नहीं होगा कोई समझौता
स्पेशल स्टोरी | विजन लाइव न्यूज
रिपोर्ट : मौहम्मद इल्यास 'दनकौरी'
ग्रेटर नोएडा। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (स्थापित 1908) के बैनर तले रविवार को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-3 स्थित दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल के सभागार में एक भव्य राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य गुर्जर समाज की राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को मजबूत बनाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना तथा वर्ष 2027 तक समाज के अधिकारों की लड़ाई को संगठित रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प लेना था।
कार्यक्रम का संयोजन राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. बी.एस. रावत (अधिवक्ता) ने किया, जबकि अध्यक्षता उत्तर प्रदेश प्रदेशाध्यक्ष चंद्रवीर नगर ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगठन के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बच्चू सिंह बैसला रहे।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों और अतिथियों का स्वागत किया गया। सभागार में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे समाज के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, महिला पदाधिकारियों और युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी पर केंद्रित रहा मंथन
संगोष्ठी का मुख्य विषय गुर्जर समाज की राजनीतिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना रहा। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब उसकी निर्णय प्रक्रिया में सम्मानजनक भागीदारी हो। इसके लिए समाज को संगठित होकर शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत करना होगा।
वक्ताओं ने इस बात पर भी बल दिया कि समाज को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रशासनिक सेवाओं, न्यायपालिका, शिक्षा, उद्योग, कृषि और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बनी चर्चा का केंद्र
राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। महिला इकाई की पदाधिकारियों ने समाज में महिलाओं की भूमिका, नेतृत्व क्षमता, शिक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे।
महिला नेताओं ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। इसलिए समाज को महिलाओं को निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में आगे लाने के लिए संगठित प्रयास करने होंगे। उनके विचारों को उपस्थित प्रतिनिधियों ने सराहा और महिला नेतृत्व को और अधिक मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।
2027 तक संघर्ष जारी रहेगा : बच्चू सिंह बैसला
मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बच्चू सिंह बैसला ने अपने संबोधन में कहा कि अखिल भारतीय गुर्जर महासभा समाज के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक गुर्जर समाज को राजनीतिक और प्रशासनिक पदों पर उसकी उचित भागीदारी नहीं मिल जाती, तब तक संगठन वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में अपना जनजागरण अभियान जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी के खिलाफ संघर्ष करना नहीं, बल्कि समाज को उसका उचित अधिकार दिलाना है। इसके लिए शिक्षा, संगठन और सामाजिक एकता को सबसे बड़ा हथियार बनाना होगा।
बच्चू सिंह बैसला ने कहा कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है जब राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक सभी क्षेत्रों में संतुलित प्रगति हो। उन्होंने युवाओं और महिलाओं से संगठन की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य गुर्जर समाज को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना:- रावत 
राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक एवं अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (स्थापित 1908) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. बी. एस. रावत (अधिवक्ता) ने अपने संबोधन में कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य गुर्जर समाज को राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, औद्योगिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को उचित दिशा एवं अवसर प्रदान करना, उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाज को संगठित एवं जागरूक करना इस आयोजन की मूल भावना है।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं सुव्यवस्थित मंच संचालन उत्तर प्रदेश संगठन महामंत्री अमरजीत चौधरी ने किया।
विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने रखे विचार
संगोष्ठी में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आए अनेक वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रमुख वक्ताओं में दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष राकेश चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष विवेक बैसला, हरियाणा कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष टीटू पटेल, राष्ट्रीय मंत्री हरिओम बैसला, दिल्ली महिला इकाई अध्यक्ष कुसुमलता, राष्ट्रीय प्रवक्ता (महिला इकाई) ममता रेक्सवाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश महिला इकाई क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनल नागर, कार्यकारी अध्यक्ष बबीता चौहान, नवनियुक्त प्रदेश प्रवक्ता वंदना नागर, प्रदेश संगठन मंत्री अमरजीत चौधरी, फरीदाबाद जिला अध्यक्ष मलखान सिंह चपराना, वरिष्ठ समाजसेवी महेश भाटी लुहाली तथा वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र कुमार भाटी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल का मिला सहयोग
कार्यक्रम में दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल की चेयरपर्सन श्रीमती कंचन कुमारी तथा प्रधानाचार्य डॉ हेमा शर्मा की उपस्थिति भी विशेष रही। विद्यालय प्रबंधन ने इस सामाजिक एवं वैचारिक आयोजन के लिए सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं, जिसके लिए आयोजकों ने उनका आभार व्यक्त किया।
सैकड़ों पदाधिकारियों की रही मौजूदगी
संगोष्ठी में ब्रज क्षेत्र, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें मास्टर सहज राम, वीरचंद गुर्जर, डॉ. मनोज कटारिया, विनोद चौधरी, अमूल चौधरी, संजय भैया, सुखबीर आर्य, देवेंद्र कसाना, रवि टाइगर, रविंद्र चौधरी, अरविंद भाटी, बबलू गुर्जर, कैप्टन पंचशील, तेजपाल लोहिया, संजय खटाना, राकेश चपराना, रतिपाल नागर सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समाज को संगठित करने का लिया गया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर गुर्जर समाज के सामाजिक उत्थान, शैक्षिक प्रगति, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के नेतृत्व विकास तथा राजनीतिक एवं प्रशासनिक भागीदारी को मजबूत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि समाज शिक्षा, संगठन और नेतृत्व के तीन सूत्रों पर आगे बढ़ता है तो आने वाले वर्षों में उसकी भागीदारी और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से यह राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के गुर्जर समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जहां समाज के भविष्य, नेतृत्व और अधिकारों को लेकर गंभीर चिंतन के साथ आगामी रणनीति की स्पष्ट रूपरेखा भी सामने रखी गई।
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