एआई टूल्स से पिच डेक, मार्केट रिसर्च और फाइनेंशियल प्रोजेक्शंस को प्रभावी बनाने के मिले व्यावहारिक गुर

 मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा

स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती भूमिका को ध्यान में रखते हुए आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के इंस्टीट्यूशन्स इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा नायडू हॉल में “फंडरेज़िंग एवं इन्वेस्टर पिच प्रिपरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग” विषय पर एक विशेष एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप के प्रति उत्साही प्रतिभागियों को फंडिंग जुटाने तथा निवेशकों के समक्ष अपने बिजनेस आइडिया को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में एआई की उपयोगिता से परिचित कराना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक एवं IIC अध्यक्ष डॉ. मयंक गर्ग के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम में एआई के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का सही उपयोग विद्यार्थियों को बेहतर नवाचार, प्रभावी बिजनेस कम्युनिकेशन और मजबूत स्टार्टअप मॉडल विकसित करने में सक्षम बना सकता है।

एआई से स्टार्टअप फंडिंग की तैयारी कैसे बने आसान?

कार्यशाला के विशेषज्ञ वक्ता श्री देव खंडूजा, संस्थापक, इंटेलिजेंटिया लैब्स प्राइवेट लिमिटेड, ने फंडरेज़िंग और इन्वेस्टर कम्युनिकेशन में एआई की बदलती भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि उद्यमी एआई आधारित टूल्स की मदद से प्रभावशाली पिच डेक तैयार करने, मार्केट रिसर्च करने, फाइनेंशियल प्रोजेक्शंस विकसित करने, संभावित निवेशकों की पहचान करने और डेटा आधारित बिजनेस एनालिसिस को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

उन्होंने लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को यह भी दिखाया कि आधुनिक एआई प्लेटफॉर्म का उपयोग कर बिजनेस मॉडल तैयार करना, स्टार्टअप आइडिया का वैलिडेशन, एग्जीक्यूटिव समरी तैयार करना और निवेशकों के लिए प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग किस प्रकार की जा सकती है।

सिर्फ एआई नहीं, सही रणनीति भी जरूरी

विशेषज्ञ ने फंडरेज़िंग के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई एक प्रभावी सहायक तकनीक है, लेकिन निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए तथ्य आधारित जानकारी, स्पष्ट बिजनेस मॉडल, बेहतर संचार और मजबूत विजन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

लाइव डेमोंस्ट्रेशन से प्रतिभागियों ने समझा कि एआई न केवल तैयारी में लगने वाले समय को कम कर सकता है, बल्कि निवेश प्रस्ताव की प्रस्तुति और गुणवत्ता को भी अधिक प्रभावशाली बना सकता है।

विद्यार्थियों और फैकल्टी ने किया उत्साहपूर्ण सहभागिता

कार्यशाला में बी.टेक. एवं एमबीए के विद्यार्थियों सहित संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने एआई आधारित बिजनेस प्लानिंग, स्टार्टअप फंडिंग के अवसरों और निवेशकों के समक्ष अभिनव विचारों की प्रस्तुति से जुड़े अनेक सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञ ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।

कार्यक्रम का समापन IIC संयोजक डॉ. राजीव रंजन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विशेषज्ञ वक्ता के व्यावहारिक एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कॉलेज प्रबंधन, संकाय सदस्यों, आयोजन समिति और सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना की।

स्टार्टअप संस्कृति और एआई नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यशाला प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक साबित हुई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि एआई केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप फंडिंग, बिजनेस प्लानिंग और निवेशकों के साथ संवाद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज की यह पहल विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच, नवाचार और तकनीक आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।