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दादरी विधानसभा में भाजपा की चुनावी बिसात बिछनी शुरू, युवा नेता देवा भाटी की मजबूत दावेदारी से बदले सियासी समीकरण


जिला पंचायत सदस्य, पूर्व जिला उपाध्यक्ष और संगठन के पुराने कार्यकर्ता के रूप में उभर रहे प्रमुख दावेदार, टिकट की दौड़ हुई और रोचक
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"| विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ ही गौतमबुद्धनगर की सबसे चर्चित सीटों में शामिल दादरी विधानसभा (62) में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट को लेकर मंथन शुरू हो चुका है और संभावित दावेदारों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान, सामाजिक कार्यक्रम, संगठनात्मक बैठकों में भागीदारी और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद तेज हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार भाजपा में टिकट के इच्छुक नेताओं की संख्या दर्जन के आसपास पहुंच चुकी है, जिससे मुकाबला पहले की तुलना में कहीं अधिक दिलचस्प होता जा रहा है।
इन्हीं संभावित दावेदारों में देवा भाटी का नाम तेजी से चर्चा में है। वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य और भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष रहे देवा भाटी स्वयं को संगठन का समर्पित कार्यकर्ता बताते हैं। लंबे समय से पार्टी के लिए लगातार काम करने, युवाओं के बीच मजबूत पकड़ और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय जनसंपर्क के कारण उन्हें भाजपा के संभावित टिकट दावेदारों में गंभीरता से देखा जा रहा है।
छात्र राजनीति से भाजपा संगठन तक का सफर
देवा भाटी का राजनीतिक जीवन छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से शुरू हुआ। वर्ष 2007 से 2009 तक उन्होंने एबीवीपी में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद 2009 से भाजपा संगठन में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय होकर पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
वर्ष 2011 से 2015 के बीच उन्होंने दादरी क्षेत्र के गांवों में लगातार भ्रमण किया। इस दौरान युवाओं को भाजपा से जोड़ने, संगठन का विस्तार करने और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के बीच अपनी पहचान बनाने का प्रयास किया। यही वह दौर था जब उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की।
हर चुनाव में निभाई सक्रिय भूमिका
देवा भाटी का दावा है कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव तक उन्होंने प्रत्येक चुनाव में भाजपा के लिए पूरी सक्रियता के साथ कार्य किया। चाहे विधानसभा चुनाव हो, लोकसभा चुनाव हो या नगर निकाय चुनाव—वे लगातार संगठन के साथ खड़े रहे।
2016 के जिला पंचायत चुनाव में उनकी माता श्रीमती महेन्द्री देवी भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं। बेहद कांटे के मुकाबले में उन्हें मात्र 242 मतों से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद देवा भाटी ने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता कम नहीं होने दी और संगठन के साथ लगातार जुड़े रहे।
टिकट नहीं मिला, फिर भी पार्टी के साथ खड़े रहे
वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में देवा भाटी ने भाजपा से टिकट के लिए आवेदन किया। दोनों बार टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में पूरी निष्ठा से चुनाव प्रचार किया। भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग इसे उनकी संगठनात्मक प्रतिबद्धता का उदाहरण मानता है।
इसी प्रकार 2017 और 2023 के नगर पालिका चुनावों में भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में व्यापक प्रचार अभियान चलाया। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने पार्टी के पक्ष में जनसभाओं, जनसंपर्क अभियानों और बूथ स्तर की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
संगठन में मिला महत्वपूर्ण दायित्व
पार्टी में लगातार सक्रियता को देखते हुए वर्ष 2020 में देवा भाटी को भाजपा जिला उपाध्यक्ष, गौतमबुद्धनगर बनाया गया। इससे पहले वे दो बार जिला कार्यकारिणी सदस्य भी रह चुके हैं। संगठन के विभिन्न अभियानों में संयोजक और सह-संयोजक जैसी जिम्मेदारियां भी उन्होंने निभाईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में लंबे समय तक कार्य करने का अनुभव टिकट की दौड़ में उनके लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
जिला पंचायत चुनाव में बड़ी जीत
वर्ष 2021 के जिला पंचायत चुनाव में देवा भाटी भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे और 4,814 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर जिला पंचायत सदस्य बने। इस जीत के बाद उनका राजनीतिक कद और प्रभाव दोनों बढ़ा। जिला पंचायत सदस्य के रूप में उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों, जनसुनवाई और स्थानीय समस्याओं के समाधान के मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।
ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत पकड़
दादरी विधानसभा का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देवा भाटी की पहचान गांवों में लंबे समय से सक्रिय रहने वाले नेता के रूप में बनी है। किसान, युवा और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी नियमित मौजूदगी उन्हें अन्य दावेदारों की तुलना में अलग पहचान देती है। हालांकि किसी भी नेता की वास्तविक जनस्वीकृति का आकलन चुनाव के समय ही संभव होता है।
टिकट की दौड़ में बढ़ी प्रतिस्पर्धा
दादरी विधानसभा में भाजपा की ओर से कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। ऐसे में टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। पार्टी संगठन, जनाधार, सामाजिक स्वीकार्यता, चुनावी क्षमता, जातीय और स्थानीय समीकरण जैसे कई पहलुओं पर विचार करने के बाद ही अंतिम निर्णय ले सकती है।
देवा भाटी की सक्रियता ने इस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को और रोचक बना दिया है। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बैठकों, सामाजिक कार्यक्रमों तथा क्षेत्रीय संपर्क अभियानों को गति दी है, जिससे उनकी दावेदारी को लेकर चर्चाएं और तेज हुई हैं।
अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व के हाथ
भाजपा की परंपरा रही है कि विधानसभा टिकटों का अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश चुनाव समिति द्वारा विभिन्न स्तरों से प्राप्त फीडबैक, संगठनात्मक रिपोर्ट, चुनावी सर्वेक्षण और स्थानीय समीकरणों के आधार पर लिया जाता है। इसलिए फिलहाल किसी भी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
फिर भी राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिस तरह दादरी विधानसभा में संभावित दावेदार अपनी-अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, उससे आने वाले महीनों में यह सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल हो सकती है।

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