डॉ. शशि यादव को मिला 'आरोग्य सेवा सम्मान', विशेषज्ञों ने कहा— स्वस्थ नागरिक ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सबसे बड़ी शक्ति

   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / नई दिल्ली
भारत को निरोग, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आरोग्य सृजन न्यास के तत्वावधान में द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 का भव्य एवं गरिमामय आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, न्यायविदों, समाजसेवियों, पत्रकारों, शोधकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लेकर स्वास्थ्य, योग, आयुर्वेद, भारतीय जीवन-दर्शन, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, जनस्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर व्यापक मंथन किया।
सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारत की समृद्ध स्वास्थ्य परंपराओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ते हुए समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, निवारक स्वास्थ्य (Preventive Healthcare) को प्रोत्साहित करना तथा "स्वस्थ भारत–सशक्त भारत" के राष्ट्रीय संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना रहा। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि उसके नागरिकों का उत्तम स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली होती है।
स्वास्थ्य केवल शरीर नहीं, संपूर्ण जीवन का संतुलन है: डॉ. शशि यादव
सम्मेलन की विशिष्ट अतिथि एवं प्रख्यात समाजसेविका डॉ. शशि यादव ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगों से मुक्त होना नहीं है, बल्कि शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित जीवन जीना ही वास्तविक आरोग्य है।
उन्होंने कहा कि आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मानसिक तनाव, प्रदूषण, अनियमित खान-पान, मोबाइल और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता तथा शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण जीवनशैली संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा और मानसिक अवसाद जैसी समस्याएं समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में नियमित योग, प्राणायाम, ध्यान, संतुलित एवं पौष्टिक भोजन, समय पर विश्राम, सकारात्मक सोच और सेवा भाव को अपनाए तो अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मिक शांति और मानसिक संतुलन के बिना शारीरिक स्वास्थ्य भी अधूरा है।
डॉ. यादव ने महिलाओं, युवाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष बल देते हुए कहा कि यदि परिवार का प्रत्येक सदस्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होगा, तभी स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होगा। उन्होंने सभी से स्वास्थ्य को अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य के रूप में भी स्वीकार करने का आह्वान किया।
'आरोग्य सेवा सम्मान' से सम्मानित हुईं डॉ. शशि यादव
स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक सेवा, महिला सशक्तिकरण और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. शशि यादव को सम्मेलन में प्रतिष्ठित "आरोग्य सेवा सम्मान" से सम्मानित किया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, योग प्रशिक्षक, स्वयंसेवी और जनसेवक का सम्मान है, जो निस्वार्थ भाव से समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें और अधिक समर्पण के साथ समाज की सेवा करने की प्रेरणा देगा।
स्वस्थ भारत ही विकसित भारत की आधारशिला: डॉ. भूप सिंह यादव
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि डॉ. भूप सिंह यादव, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि "यदि भारत को विश्वगुरु बनना है तो सबसे पहले देश को स्वस्थ बनाना होगा।"
उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों की कार्यक्षमता, अनुशासन और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। उन्होंने योग, नियमित व्यायाम, पौष्टिक आहार, स्वच्छता और नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वास्थ्य जागरूकता को गांव-गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है, तभी स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन संभव होगा।
भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य ही जीवन का आधार: न्यायाधीश अनिल कुमार
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि  अनिल कुमार, अपर न्यायाधीश, प्रयागराज ने भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्य के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन परंपराएं सदैव योग, आयुर्वेद, संयम, सात्विक आहार, स्वच्छता और प्रकृति के संरक्षण पर आधारित रही हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में इन मूल्यों से दूरी बढ़ने के कारण अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। यदि युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और स्वास्थ्यपरक जीवनशैली को अपनाए तो समाज अधिक स्वस्थ, अनुशासित और संस्कारित बन सकता है।
योग, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के समन्वय पर विशेष बल
सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल अस्पतालों और दवाओं पर आधारित नहीं हो सकती। समाज को रोग होने के बाद उपचार के बजाय रोगों की रोकथाम पर अधिक ध्यान देना होगा।
वक्ताओं ने योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, संतुलित आहार, स्वच्छ पर्यावरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य जागरूकता को जनआंदोलन बनाने का संकल्प
सम्मेलन में देशभर से आए चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और पत्रकारों ने स्वास्थ्य जागरूकता को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी बस्तियों में नियमित स्वास्थ्य शिविर, योग प्रशिक्षण, पौधारोपण, स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में उमेश प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी विशिष्ट अतिथियों, चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, पत्रकारों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में प्रस्तुत सुझाव आने वाले समय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और जनजागरूकता अभियानों को नई दिशा प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान तथा "स्वस्थ भारत–समृद्ध भारत" के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
विजन लाइव विश्लेषण
द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 ऐसे समय आयोजित हुआ है जब भारत सहित पूरी दुनिया जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, मानसिक तनाव, प्रदूषण, असंतुलित खान-पान और बदलती कार्यशैली जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में स्थापित करने का गंभीर प्रयास बनकर सामने आया।
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि स्वास्थ्य केवल अस्पतालों और दवाइयों का विषय नहीं, बल्कि परिवार, समाज, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण और व्यक्तिगत अनुशासन से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी दिनचर्या में योग, व्यायाम, संतुलित भोजन, मानसिक संतुलन, स्वच्छता और नशामुक्त जीवनशैली को अपनाता है तो देश में गैर-संचारी रोगों (Lifestyle Diseases) का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सम्मेलन में भारतीय चिकित्सा परंपरा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वय पर दिया गया जोर भी विशेष महत्व रखता है। वर्तमान समय में विश्वभर में योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता यह संकेत देती है कि भारत अपनी पारंपरिक ज्ञान-परंपरा के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की भूमिका निभा सकता है।
डॉ. शशि यादव को "आरोग्य सेवा सम्मान" प्रदान किया जाना स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करने का सकारात्मक संदेश है। वहीं डॉ. भूप सिंह यादव और न्यायाधीश अनिल कुमार के विचारों ने यह स्पष्ट किया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब नागरिक शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से संतुलित, सांस्कृतिक रूप से जागरूक और सामाजिक रूप से उत्तरदायी होंगे।
विजन लाइव का मानना है कि यदि ऐसे सम्मेलन केवल सभागारों तक सीमित न रहकर इनके निष्कर्षों को गांव, शहर, विद्यालय, विश्वविद्यालय और सामाजिक संस्थाओं तक योजनाबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए, तो "स्वस्थ भारत–सशक्त भारत" का संकल्प एक जनआंदोलन का रूप ले सकता है। आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा में स्वास्थ्य जागरूकता, योग, आयुर्वेद, स्वच्छता और निवारक चिकित्सा की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।