3 घंटे चली सर्जरी, भोजन नली और श्वासनली की क्षतिग्रस्त संरचनाओं की सफल मरम्मत
नोएडा | विशेष रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास “दनकौरी”
खिलौनों, छोटी गाड़ियों, घड़ियों, रिमोट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली छोटी बटन बैटरियां बच्चों के लिए कितनी खतरनाक हो सकती हैं, इसका एक गंभीर मामला नोएडा के सेक्टर-110 स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सामने आया। यहां 10 माह के मासूम मास्टर युवराज की जान एक जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी के जरिए बचाई गई।
जानकारी के अनुसार, मास्टर युवराज को लगातार खांसी, दूध पीते समय सांस रुकने और बेचैनी जैसी समस्याओं के चलते अस्पताल लाया गया। चिकित्सकीय जांच में बच्चे की गर्दन के पास एक गोलाकार वस्तु फंसी होने का संदेह हुआ। आपातकालीन एंडोस्कोपी के दौरान यह पुष्टि हुई कि बच्चे ने बटन बैटरी निगल ली थी, जो उसकी भोजन नली (इसोफेगस) में फंसी हुई थी।
डॉक्टरों के अनुसार, बटन बैटरी के रासायनिक प्रभाव ने कुछ ही समय में भोजन नली और श्वासनली (ट्रेकिया) को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों के बीच एक असामान्य मार्ग (ट्रेकियो-इसोफेगल कम्युनिकेशन) बन गया था, जिससे बच्चे की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी और उसे बार-बार निमोनिया होने लगा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने पहले चरण में बच्चे को पोषण देने के लिए फीडिंग जेजुनोस्टॉमी की। इसके बाद करीब दो महीने तक लगातार निगरानी और उपचार किया गया, लेकिन जटिलता बनी रहने पर विशेषज्ञ टीम ने रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी करने का निर्णय लिया।
करीब तीन घंटे तक चली इस बेहद जटिल सर्जरी में भोजन नली को श्वासनली से सावधानीपूर्वक अलग किया गया और दोनों की क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत की गई। यह सफल ऑपरेशन यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार एवं पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. जय भारत पंवार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया गया।
सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और आवश्यक देखभाल के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा सामान्य रूप से भोजन कर पा रहा है और चिकित्सकीय निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
इस मामले पर डॉ. जय भारत पंवार ने बताया, “बटन बैटरी निगलना बच्चों में सबसे खतरनाक मेडिकल इमरजेंसी में से एक है। यह कुछ ही घंटों में भोजन नली और आसपास के ऊतकों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इस केस में बैटरी ने भोजन नली और श्वासनली दोनों को प्रभावित कर दिया था, जिससे सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गई थी। समय पर उपचार और टीमवर्क से हम बच्चे की जान बचाने में सफल रहे।”
बच्चे के पिता ने अस्पताल और डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि, “डॉक्टरों की मेहनत और समर्पण की बदौलत हमारे बच्चे को नया जीवन मिला है। हम पूरी टीम के आभारी हैं।”
विशेष चेतावनी:
चिकित्सकों ने अभिभावकों को सचेत करते हुए कहा है कि बटन बैटरियां अत्यंत खतरनाक होती हैं। इन्हें निगलने पर कुछ ही घंटों में अंदरूनी जलन, ऊतकों का नष्ट होना, छिद्र और जानलेवा जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
अभिभावकों से अपील है कि ऐसे छोटे उपकरण और बैटरियां बच्चों की पहुंच से दूर रखें और किसी भी आशंका की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।