मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा स्थित लॉयड बिजनेस स्कूल में “मानसिक स्वास्थ्य सम्मेलन 2026” का भव्य और सफल आयोजन किया गया। “मन के विषय: कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भावनात्मक रूप से सशक्त युवाओं का निर्माण” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और डिजिटल युग की चुनौतियों पर सार्थक संवाद स्थापित करना रहा। कार्यक्रम में शिक्षा, चिकित्सा, मनोविज्ञान, योग और आध्यात्मिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत समूह निदेशक डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने कहा कि आज के एआई और डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्म-जागरूक, भावनात्मक रूप से मजबूत और मूल्य-आधारित जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं, बल्कि संतुलित और संवेदनशील व्यक्तित्व का विकास है। उन्होंने “मन” की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए सकारात्मक सोच और आत्म-नियंत्रण को जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
मुख्य अतिथि डॉ. राकेश कुमार, निदेशक, गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य कोई समस्या नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।” उन्होंने विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग की सलाह दी और कहा कि तकनीक सुविधा दे सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ और सहानुभूति ही समाज को मजबूत बनाती हैं।
आध्यात्मिक वक्ता सिस्टर मोनिका गुप्ता (बीके) ने “स्वयं की आंतरिक यात्रा” पर केंद्रित सत्र में जीवन के उद्देश्य की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उद्देश्यहीन जीवन व्यक्ति को भटकाव की ओर ले जाता है, जबकि उद्देश्यपूर्ण जीवन आत्म-संतुलन और स्पष्टता प्रदान करता है। उन्होंने वर्तमान समय को अनिश्चितताओं से भरा बताते हुए ध्यान, सकारात्मक विचार और आत्म-जागरूकता को मानसिक स्थिरता का आधार बताया। “घर वापसी अभ्यास” के माध्यम से उन्होंने प्रतिभागियों को ध्यान का अनुभव भी कराया।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभिषेक पचौरी ने “आंतरिक जागरण” विषय पर योग, भारतीय दर्शन और आधुनिक मनोविज्ञान के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश जैसी मानसिक बाधाओं का उल्लेख करते हुए तनाव के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को समझाया। उन्होंने मानसिक संतुलन के लिए योग अनुशासन, 21 दिनों का निरंतर अभ्यास और सही विधि अपनाने को आवश्यक बताया तथा श्वास और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से मानसिक शांति के उपाय साझा किए।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पैनल चर्चा रही, जिसका संचालन डॉ. रिपुदमन गौर ने किया। पैनल में डॉ. विकास सक्सेना, डॉ. सौमेंद्र मोहंती, पायल गुप्ता और गुंजन चौधरी शामिल रहे। चर्चा में कोविड-19 के बाद बढ़ती मानसिक समस्याओं, सोशल मीडिया और एआई पर बढ़ती निर्भरता, अकेलापन, सामाजिक घबराहट, नींद की कमी और विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव जैसे मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पास सूचना और स्मृति हो सकती है, लेकिन उसमें मानवीय संवेदनाएँ, अनुभव और आत्म-जागरूकता का अभाव होता है। उन्होंने युवाओं को वास्तविक जीवन के रिश्तों को मजबूत करने, परिवार और मित्रों से संवाद बनाए रखने, नियमित लेखन, शारीरिक गतिविधियों और आत्म-प्रेरणा को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने सम्मेलन को अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी बताया। इस आयोजन ने न केवल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि युवाओं को भावनात्मक रूप से सशक्त और संतुलित जीवन की दिशा में प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।