मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा

 औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक अक्सर समय, संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण नियमित स्वास्थ्य जाँच से दूर रह जाते हैं। ऐसे में आर्या फैशन्स, इकोटेक-III में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच शिविर ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया, जहाँ “काम की जगह पर ही स्वास्थ्य” का मॉडल देखने को मिला।

यथार्थ हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा और इंडियन बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस शिविर का शुभारंभ एसडीएम सदर आशुतोष गुप्ता ने किया। कार्यक्रम की अगुवाई आर्या फैशन्स की संस्थापक डॉ. खुशबू सिंह ने की, जिनकी पहल पर न केवल फैक्ट्री के कर्मचारियों बल्कि आसपास की औद्योगिक इकाइयों के श्रमिकों को भी इसमें शामिल किया गया।

श्रमिकों के लिए क्यों खास रहा यह शिविर?

सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रमिक जाँच के लिए पहुँचे। यहाँ शुगर, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, ईसीजी, दंत व नेत्र जाँच जैसी सुविधाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई गईं। सबसे बड़ी बात यह रही कि जाँच के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयाँ और विशेषज्ञ परामर्श भी दिया गया—वह भी बिना किसी लंबी कतार या अस्पताल जाने की परेशानी के।

कई श्रमिकों ने बताया कि काम के चलते वे अक्सर अस्पताल नहीं जा पाते। ऐसे में फैक्ट्री परिसर में ही स्वास्थ्य सेवाएँ मिलना उनके लिए “राहत और सुरक्षा” दोनों लेकर आया।

प्रशासन और चिकित्सा विशेषज्ञों का नजरिया

एसडीएम आशुतोष गुप्ता ने इसे सरकार की “अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने” की सोच का जमीनी रूप बताया। उन्होंने श्रमिकों को सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की।

वहीं, यथार्थ हॉस्पिटल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अश्वनी ने कहा कि बीपी, शुगर और हृदय रोग जैसी समस्याएँ शुरुआती अवस्था में ही पकड़ी जाएँ तो गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। उन्होंने नियमित जाँच, संतुलित आहार और स्वच्छता को जरूरी बताया।

श्रमिक ही सबसे बड़ी पूँजी’—डॉ. खुशबू सिंह

आयोजक डॉ. खुशबू सिंह ने स्पष्ट कहा कि उद्योग की असली ताकत उसके श्रमिक होते हैं। “उनका स्वस्थ रहना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उद्योग की स्थिरता के लिए भी जरूरी है।” उन्होंने भविष्य में भी ऐसे शिविर जारी रखने की बात कही।

बड़ी तस्वीर क्या कहती है? (Vision Angle)

यह शिविर सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि एक मॉडल है—जहाँ उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएँ और प्रशासन मिलकर श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बना सकते हैं। अगर इस तरह की पहलें नियमित रूप से होती रहें, तो औद्योगिक क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में श्रमिकों ने आयोजकों के प्रति आभार जताया, वहीं यह पहल क्षेत्र में “वर्कप्लेस हेल्थ केयर” की एक मजबूत मिसाल बनकर उभरी।