मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा 
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के बिरौंडी और साकीपुर में संचालित वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन के प्रतिभा विकास केंद्रों में इस वर्ष श्री राम जन्म महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
विजय सिंह पथिक प्रतिभा विकास केंद्र, बिरौंडी तथा स्वामी विवेकानंद प्रतिभा विकास केंद्र, साकीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आयोजन जे.एस. आदर्श विद्यालय, बिरौंडी में किया गया, जहां वंचित एवं जरूरतमंद परिवारों के बच्चों ने अपनी प्रतिभा और संस्कारों का अद्भुत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक भारतीय रीति-रिवाजों के अनुसार भारत माता एवं प्रभु श्री राम के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रिंसिपल रकम सिंह, संतराम मावी, सतीश मावी, ज्ञानचंद, जगदीश प्रधान, सतपाल मावी, ओमवीर मावी, राजेश बिहारी एवं जगत मावी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की विशेषता रही कि प्रतिभा विकास केंद्रों में शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों ने भक्ति गीत, नृत्य, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र, आदर्शों और मर्यादा का सजीव चित्रण किया। बच्चों की प्रस्तुतियों में न केवल कला दिखाई दी, बल्कि उनमें संस्कारों की गहराई भी स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. विवेक कुमार ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और जीवन पद्धति में निहित है। उन्होंने बताया कि हम हजारों वर्षों से अपने जीवन के सभी मांगलिक कार्य हिन्दू पंचांग के अनुसार करते आए हैं और हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में पश्चिमी प्रभाव के कारण लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं और अंग्रेजी कैलेंडर को अधिक महत्व देने लगे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
वहीं राजेश बिहारी ने “राम से रामत्व की ओर” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भगवान श्रीराम केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन शैली के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों—सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग—को अपनाए, तो एक सशक्त और आदर्श समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सतीश मावी ने परहित और समाज सेवा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित वर्गों के बच्चों को शिक्षा और संस्कार प्रदान करना सबसे बड़ा सेवा कार्य है, और ऐसे प्रयास समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं।
इस आयोजन में आचार्या सविता चौधरी, भारती भाटी एवं ब्रजेश कुमार ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
विशेष विश्लेषण (विजन एंगल):
बिरौंडी और साकीपुर के ये प्रतिभा विकास केंद्र आज केवल शिक्षा देने का कार्य नहीं कर रहे, बल्कि वे संस्कारयुक्त समाज निर्माण की आधारशिला रख रहे हैं। वंचित वर्ग के बच्चों को जहां एक ओर शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से भी परिचित कराया जा रहा है।
श्री राम जन्म महोत्सव जैसे आयोजन इस बात का प्रमाण हैं कि यदि सही दिशा और मार्गदर्शन मिले, तो समाज का हर वर्ग न केवल आगे बढ़ सकता है, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए एक बेहतर भविष्य का निर्माण भी कर सकता है।
इस प्रकार यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि “शिक्षा के साथ संस्कार” की उस अवधारणा को साकार करता है, जो किसी भी सशक्त और समृद्ध समाज की नींव होती है।