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जेवर एयरपोर्ट के साए में किसान बनाम विकास—स्थानीय असंतोष को लेकर कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक हमला”

  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
देश की महत्वाकांक्षी अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर सरकार इसे विकास और वैश्विक कनेक्टिविटी का प्रतीक बता रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों और विस्थापितों के मुद्दे अब भी सुलझे नहीं हैं। इसी पृष्ठभूमि में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले जिला कांग्रेस कमेटी गौतमबुद्ध नगर ने प्रेस वार्ता कर सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपक भाटी चोटीवाला ने ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि “विकास” के नाम पर स्थानीय किसानों और निवासियों के साथ अन्याय हो रहा है, जबकि सरकार जमीनी समस्याओं से आंख मूंदे हुए है।
🔶 “विकास बनाम विस्थापन”—किसानों की अनसुनी आवाज
दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना का सबसे बड़ा योगदान स्थानीय किसानों की जमीन है, लेकिन आज वही किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
“सरकार एयरपोर्ट को अपनी उपलब्धि बता रही है, जबकि असली सृजक किसान हैं, जिन्हें उजाड़कर यह परियोजना खड़ी की गई है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक उनके मुद्दों का समाधान नहीं हुआ।”
उन्होंने आरोप लगाया कि:
भूमि अधिग्रहण के बदले मिलने वाले 10% भूखंड के मामले वर्षों से लंबित हैं
किसान आबादी निस्तारण 2017 से अटका हुआ है
प्रभावित किसानों के साथ दमनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है
🔶 “दौरे तो कई, संवाद शून्य”
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार जनपद दौरों पर भी सवाल उठाए।
“मुख्यमंत्री कई बार गौतमबुद्ध नगर आते हैं, लेकिन कभी किसानों से मिलने या उनकी समस्याएं सुनने का समय नहीं निकालते। आंदोलन करने वालों को लखनऊ बुलाकर दबाव बनाया जाता है, जबकि दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।”
साथ ही आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं को नजरबंद किया जाता है, जिससे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाया जा सके।
🔶 स्थानीय मुद्दों का अंबार: “औद्योगिक शहर, लेकिन बुनियादी सुविधाएं गायब
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने जनपद की जमीनी समस्याओं को विस्तार से उठाया:
🔻 शहरी और ग्रामीण संकट:
गांवों में सड़क, सीवर और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार और मनमानी
🔻 ग्रेटर नोएडा वेस्ट की समस्याएं:
मेट्रो के वादे अधूरे
लाखों निवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन लगभग शून्य
कई लोगों को अब तक फ्लैट का मालिकाना हक नहीं मिला
🔻 शिक्षा और जमीन:
सस्ती दरों पर जमीन लेकर निजी स्कूलों द्वारा अत्यधिक फीस वसूली
🔶 “रोजगार में स्थानीयों की अनदेखी”
कांग्रेस ने यह भी मुद्दा उठाया कि औद्योगिक हब होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही।
“यहां उद्योग तो लगे, लेकिन रोजगार बाहरी लोगों को मिल रहा है। स्थानीय युवा आज भी बेरोजगारी से जूझ रहे हैं।”
🔶 केंद्र सरकार पर भी हमला: “आर्थिक और कूटनीतिक विफलता”
दीपक भाटी चोटीवाला ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए:
रुपया कमजोर
महंगाई चरम पर
आम आदमी पर आर्थिक दबाव
“प्रधानमंत्री ज्वलंत मुद्दों से दूर रहकर चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, जबकि जनता परेशान है।”
कांग्रेस नेता दुष्यंत नागर ने विदेश नीति को लेकर भी सरकार को घेरा:
“अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है और पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाए रखने में सरकार असफल रही है।”
🔶 “जन आंदोलन की चेतावनी”
कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
“किसानों, युवाओं और आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर व्यापक जन आंदोलन करेगी।”
🔶 राजनीतिक संदेश: दौरे से पहले दबाव की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले इस प्रेस वार्ता का आयोजन एक रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है, ताकि:
जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान किसानों के मुद्दे प्रमुखता से उठें
सरकार पर जवाबदेही का दबाव बने
स्थानीय असंतोष को राजनीतिक विमर्श में लाया जाए
कांग्रेस ने यह भी घोषणा की है कि वह अपने प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से दोनों नेताओं से मिलकर किसानों के लिए न्याय की मांग करेगी।
🔶 निष्कर्ष: “विकास की चमक बनाम जमीनी हकीकत”
जेवर एयरपोर्ट परियोजना जहां एक ओर भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़ा कर रही है कि क्या विकास की कीमत स्थानीय लोगों के अधिकारों से चुकाई जा रही है?
गौतमबुद्ध नगर में उठ रही यह बहस केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास मॉडल बनाम सामाजिक न्याय की व्यापक बहस का हिस्सा बन चुकी है।
आने वाले दिनों में, जब देश और प्रदेश के शीर्ष नेता यहां पहुंचेंगे, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह आवाजें सत्ता के गलियारों तक पहुंच पाती हैं, या फिर विकास की चकाचौंध में दबकर रह जाती हैं।