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गौतमबुद्धनगर बार चुनाव 2025-26: अध्यक्ष पद के लिए सियासी सरगर्मी तेज, मैदान में दिग्गज आमने-सामने

      मौहम्मद इल्यास-"दनकौरी" / गौतमबुद्धनगर
जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन, गौतमबुद्धनगर के वार्षिक चुनाव 2025-26 को लेकर अधिवक्ता समुदाय में सरगर्मी तेज हो गई है। एल्डर्स कमेटी द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही विभिन्न पदों के दावेदारों ने अपने-अपने स्तर पर प्रचार और समर्थन जुटाने की कवायद शुरू कर दी है।

एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन ब्रहम सिंह नागर एडवोकेट की अध्यक्षता में 12 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। घोषित कार्यक्रम के अनुसार 19 और 20 दिसंबर को नामांकन, 24 दिसंबर को मतदान तथा उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

अध्यक्ष पद पर सबसे ज्यादा मुकाबला

बार अध्यक्ष पद को लेकर इस बार मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है। अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व अध्यक्ष मनोज भाटी (बोड़ाकी) और योगेंद्र भाटी (सैंथली) के साथ-साथ एडवोकेट शिवकुमार बैसला एवं जगतपाल भाटी भी सक्रिय हैं। खास बात यह है कि प्रमुख दावेदारों में से मनोज भाटी और योगेंद्र भाटी दोनों ही पूर्व में अध्यक्ष रह चुके हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

मनोज भाटी को मिल रहा व्यापक समर्थन

पूर्व बार अध्यक्ष मनोज भाटी (बोड़ाकी) ने अपने समर्थन में आदर्श गांव बिसरख, हल्दौनी, खैरपुर, घंगोला, घोड़ी बछेड़ा और अपने पैतृक गांव बोडाकी के अधिवक्ताओं की बैठक आयोजित की। बैठक में उपस्थित अधिवक्ताओं ने उन्हें पूर्ण सहयोग, समर्थन और आशीर्वाद देने की घोषणा की।
मनोज भाटी की छवि एक ऐसे अधिवक्ता नेता की मानी जाती है जो अधिवक्ता हितों के मुद्दों पर बिना विलंब के मैदान में उतरते हैं। युवा अधिवक्ताओं से लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं तक उनकी मजबूत पकड़ बताई जा रही है, जिसका असर उनके प्रचार में साफ दिखाई दे रहा है।

चुनावी माहौल में तेजी

बार के अन्य पदों—वरिष्ठ उपाध्यक्ष, कनिष्ठ उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, सह सचिव, पुस्तकालय सचिव और सांस्कृतिक सचिव—के लिए भी दावेदारों ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। अधिवक्ता हित, सुविधाएं, पारदर्शी कार्यप्रणाली और एकजुटता जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं।

कुल मिलाकर, जनपद दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन का यह चुनाव न केवल नेतृत्व चयन का माध्यम होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले वर्ष में अधिवक्ताओं की आवाज किस दिशा में आगे बढ़ेगी। अब सभी की नजरें 24 दिसंबर के मतदान और उसके परिणाम पर टिकी हैं।