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MSP पर किसानों की नाराजगी: ₹25 की बढ़ोतरी पर कृष्ण नागर का सवाल—बढ़ती लागत के बीच किसान को क्या मिला?



गेहूं के समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी को बताया किसानों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं, लाभकारी मूल्य की मांग तेज
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
केंद्र सरकार द्वारा छह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी को लेकर किसानों के बीच चर्चा तेज हो गई है। भारतीय किसान यूनियन (कृषक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्ण नागर ने गेहूं के MSP में ₹25 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को किसानों की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के लिहाज से अपर्याप्त बताया है।
कृष्ण नागर का कहना है कि एक तरफ खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और दूसरी तरफ फसलों के समर्थन मूल्य में सीमित बढ़ोतरी किसानों की आर्थिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि बीज, खाद, डीजल, बिजली, कीटनाशक और कृषि मशीनरी समेत खेती से जुड़े लगभग हर प्रमुख खर्च में किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।
“लागत बढ़ रही है, तो किसान की आय का सवाल भी जरूरी”
कृष्ण नागर ने कहा कि किसान पूरे वर्ष मेहनत करके फसल तैयार करता है, लेकिन उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद उसे अपनी उपज का ऐसा मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे उसकी आय और खर्च के बीच संतुलन कायम हो सके।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, तो क्या MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों को वास्तविक आर्थिक राहत देने के लिए पर्याप्त है?
उनके मुताबिक, किसानों की समस्या केवल MSP घोषित किए जाने तक सीमित नहीं है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि किसान को उसकी उपज का वास्तविक बाजार मूल्य और लाभकारी दाम कितना मिल रहा है।
किसानों को घोषणा नहीं, प्रभावी मूल्य व्यवस्था चाहिए
भारतीय किसान यूनियन (कृषक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें उनकी उत्पादन लागत, मेहनत और कृषि जोखिम को ध्यान में रखते हुए उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो।
उन्होंने सरकार से मांग की कि MSP व्यवस्था को किसानों की वास्तविक लागत और आर्थिक परिस्थितियों से जोड़कर अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसान अपनी फसल बेचने के बाद कर्ज, लागत और घरेलू खर्च के दबाव में न रहे।
कृष्ण नागर बोले—किसान की मेहनत का सम्मान जरूरी
कृष्ण नागर ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में किसान की भूमिका महत्वपूर्ण है। किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, तभी कृषि क्षेत्र भी मजबूत होगा। इसलिए ऐसी नीतियों की जरूरत है, जो खेती को टिकाऊ और किसान की आय को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करें।
उन्होंने कहा कि किसानों को केवल समर्थन मूल्य की घोषणा नहीं, बल्कि उनकी फसल के लिए प्रभावी, पारदर्शी और लाभकारी मूल्य व्यवस्था चाहिए।
कृष्ण नागर ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान यूनियन (कृषक) किसानों के अधिकार, सम्मान, उचित मूल्य और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।
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