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श्रम, सृजन और तकनीकी दक्षता का संदेश दे गई विश्वकर्मा जयंती


श्री द्रोणाचार्य कॉलेज में श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ आयोजन, विद्यार्थियों ने लिया कर्मठता व नवाचार का संकल्प
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ / यीडा सिटी
 श्री द्रोणाचार्य (पी.जी.) कॉलेज, दनकौर में गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाई गई। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को भगवान विश्वकर्मा के सृजन, शिल्प, निर्माण-कला और तकनीकी दक्षता से जुड़े आदर्शों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में श्रम की गरिमा, रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और निरंतर सीखने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स एवं उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता ने भगवान विश्वकर्मा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित करके किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संगीता रावल ने किया।
इस अवसर पर डॉ. निशा शर्मा ने भगवान विश्वकर्मा के व्यक्तित्व एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए उन्हें सृजन, शिल्पकला, वास्तुकला और निर्माण-कला का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा से जुड़े आदर्श विद्यार्थियों को मेहनत, रचनात्मक सोच, कौशल विकास और अपने कार्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीकी ज्ञान और कौशल केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और विकास की महत्वपूर्ण आधारशिला भी हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप नए कौशल सीखें तथा बदलती तकनीक के साथ स्वयं को निरंतर अपडेट करते रहें।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विद्यार्थियों ने श्रम की गरिमा को समझने, तकनीकी ज्ञान को व्यवहार में उतारने, नवाचार को अपनाने और अपने कार्य को पूरी निष्ठा से करने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता, अनुशासन और कर्मठता आवश्यक है।
प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने अपने संबोधन में कहा कि आज के तकनीकी युग में तकनीकी दक्षता और व्यावहारिक ज्ञान आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र के विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमताओं को लगातार विकसित करें और नई तकनीकों को सीखने के लिए सदैव तत्पर रहें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में सृजनात्मक सोच, कौशल और नवाचार की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। परिश्रम और निरंतर सीखने की आदत ही युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर सकती है।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजन में उपस्थित सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। भगवान विश्वकर्मा जयंती का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर ही नहीं, बल्कि श्रम के सम्मान, कौशल विकास, सृजनशीलता, तकनीकी दक्षता और कर्मठता का प्रेरणादायी संदेश भी दे गया।


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