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मैदान बचाओ, खेल बचाओ अभियान की ऐच्छर गांव से शुरुआत


क्षेत्रीय खेल परिसर में हॉकी स्टेडियम के प्रस्ताव के विरोध में जनजागरण तेज, युवाओं ने मैदान बचाने की लड़ाई को गांव-गांव पहुंचाने का लिया संकल्प
   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
क्षेत्रीय खेल परिसर, सेक्टर-37 ग्रेटर नोएडा में दर्जनों खेलों के अभ्यास तथा सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उपयोगी रनिंग ट्रैक और खेल मैदान को बंद कर वहां हॉकी स्टेडियम बनाए जाने के प्रस्ताव के विरोध में खेल मैदान बचाओ समिति ने अपना जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में समिति के सदस्यों ने ऐच्छर गांव पहुंचकर ग्रामीणों और युवाओं से संवाद किया तथा खेल मैदान को लेकर उनकी समस्याएं और चिंताएं सुनीं।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्रीय खेल परिसर केवल खिलाड़ियों के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों और सेक्टरों के बच्चों, युवाओं, महिलाओं तथा बुजुर्गों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान के रूप में उपयोग होता है। यहां युवा विभिन्न खेलों का अभ्यास करने के साथ-साथ सेना, पुलिस एवं अन्य सरकारी नौकरियों की शारीरिक दक्षता परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं।
मैदान छिना तो जनप्रतिनिधियों के बहिष्कार की चेतावनी
बैठक में खेल मैदान बचाओ समिति और ग्रामीणों ने एकमत होकर कहा कि यदि खेल मैदान को बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना हॉकी स्टेडियम का निर्माण कराया गया, तो इसके विरोध में आंदोलन को गांव-गांव और सेक्टर-सेक्टर तक पहुंचाया जाएगा।
समिति की ओर से कहा गया कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जो भी जनप्रतिनिधि युवाओं की आवाज नहीं सुनेगा, उसके खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। समिति ने आगामी चुनावों में ऐसे जनप्रतिनिधियों के सामाजिक एवं राजनीतिक बहिष्कार का आह्वान करने की चेतावनी भी दी है, हालांकि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति के संबंध में अंतिम निर्णय स्थानीय नागरिकों एवं मतदाताओं का ही होगा।
किसानों के बकाया मुआवजे और 10 प्रतिशत भूखंड का मुद्दा भी उठा
बैठक में किसान अनिल नागर ने कहा कि जिस जमीन पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा खेल परिसर विकसित किया गया है, उससे जुड़े किसानों के 10 प्रतिशत आबादी भूखंड और मुआवजा/प्रतिकर से संबंधित दावे अभी भी लंबित बताए जाते हैं। ऐसे में किसानों के बकाया मामलों का समाधान किए बिना उसी जमीन पर नई परियोजना शुरू करने को लेकर किसानों में सवाल और असंतोष है।
उन्होंने मांग की कि प्राधिकरण पहले किसानों से जुड़े लंबित मामलों का पारदर्शी तरीके से निस्तारण करे और खेल मैदान के संबंध में स्थानीय ग्रामीणों तथा खिलाड़ियों की आपत्तियों को भी गंभीरता से सुने।
बच्चों से बुजुर्गों तक के लिए उपयोगी है मैदान
किसान विक्रम भाटी ने कहा कि क्षेत्रीय खेल परिसर के मैदान में गांव के बड़ी संख्या में बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं प्रतिदिन पहुंचते हैं। किशोर और युवा यहां खेलों का अभ्यास करने के साथ सरकारी नौकरियों की शारीरिक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मैदान की मौजूदा गतिविधियों को बंद कर दिया जाता है, तो इसका सीधा असर स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों पर पड़ेगा। उनका कहना था कि खेल सुविधाओं का विस्तार होना चाहिए, लेकिन किसी मौजूदा सार्वजनिक खेल मैदान और रनिंग ट्रैक को समाप्त करके नहीं।
गांव-गांव चलेगा जनजागरण अभियान
खेल मैदान बचाओ समिति के सदस्यों ने कहा कि यह अभियान किसी एक गांव या संगठन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्षेत्रीय खेल परिसर में हॉकी स्टेडियम बनाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार नहीं करता है, तो समिति आसपास के विभिन्न गांवों और सेक्टरों में जाकर लोगों को जागरूक करेगी।
समिति का कहना है कि युवाओं के लिए उपलब्ध खेल मैदानों को सुरक्षित रखना और खेल सुविधाओं का विस्तार करना दोनों जरूरी हैं। समिति प्राधिकरण से मांग कर रही है कि हॉकी स्टेडियम के लिए ऐसी वैकल्पिक भूमि पर विचार किया जाए, जिससे वर्तमान खेल गतिविधियां और रनिंग ट्रैक प्रभावित न हों।
‘मैदान बचाओ’ को युवाओं की मुहिम बनाने की तैयारी
ऐच्छर गांव की बैठक के साथ समिति ने इस मुद्दे को व्यापक जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में पहला कदम उठाया है। समिति का कहना है कि आने वाले दिनों में अन्य गांवों में भी बैठकें और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे।
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि खेल मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा संसाधन है। इसलिए किसी भी निर्माण परियोजना से पहले स्थानीय खिलाड़ियों, युवाओं, ग्रामीणों और संबंधित हितधारकों की राय ली जानी चाहिए।
ये लोग रहे मौजूद
बैठक में ऐच्छर गांव से किसान विक्रम भाटी, बलराम भाटी, अनिल नागर, आशीष नागर, सोनू नागर और परवीन भाटी सहित खेल मैदान बचाओ समिति के सदस्य एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
नोट: हॉकी स्टेडियम निर्माण, जमीन, किसानों के 10 प्रतिशत भूखंड एवं मुआवजे से संबंधित दावों पर प्राधिकरण का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। प्राधिकरण का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


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