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एक्यूरेट में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई विश्वकर्मा पूजा


इंजीनियरिंग शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और नवाचार को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश; डॉ. सुनील मिश्रा ने विद्यार्थियों को दिखाई नई राह

 मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’/ ग्रेटर नोएडा
 एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, ग्रेटर नोएडा में गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा का विधिवत पूजन कर संस्थान, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं समस्त कर्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य, ज्ञान, कौशल और प्रगति की कामना की गई।

विश्वकर्मा पूजा भारतीय परंपरा में सृजन, निर्माण, शिल्प, तकनीकी दक्षता और कर्म के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। इसी भावना को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास से जोड़ते हुए आयोजन में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि वर्तमान युग में इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में योगदान देना है।

डॉ. सुनील मिश्रा ने बताया—तकनीकी शिक्षा की बदलती भूमिका

कार्यक्रम के दौरान एक्यूरेट इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. सुनील मिश्रा ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के व्यापक उद्देश्य से अवगत कराया।

डॉ. सुनील मिश्रा ने कहा कि विश्वकर्मा पूजा हमें सृजन, निर्माण और उत्कृष्टता की भावना से जोड़ती है। भगवान विश्वकर्मा को भारतीय परंपरा में निर्माण एवं तकनीकी कौशल के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है और उनका आदर्श विद्यार्थियों को अपने ज्ञान एवं कौशल का सकारात्मक उपयोग करने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला है, जबकि इंजीनियरिंग शिक्षा उस प्रगति को तकनीकी दिशा प्रदान करती है। आज इंजीनियरिंग का क्षेत्र केवल मशीन, भवन या उद्योग तक सीमित नहीं रह गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और हरित तकनीक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां समाज की बदलती आवश्यकताओं को नए तरीके से संबोधित कर रही हैं।

‘सिर्फ तकनीक समझना नहीं, उसे समाज के लिए उपयोगी बनाना जरूरी’

डॉ. मिश्रा ने विद्यार्थियों से कहा कि आज के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, अनुसंधान की सोच, समस्या समाधान की क्षमता और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी।

उन्होंने कहा कि तकनीक का सर्वोत्तम उपयोग तभी संभव है, जब उसका इस्तेमाल समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाए। एक अच्छा इंजीनियर केवल तकनीक को समझता नहीं, बल्कि उसे समाज के लिए उपयोगी बनाने का प्रयास भी करता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को भगवान विश्वकर्मा की सृजनशीलता और कर्म के प्रति समर्पण से प्रेरणा लेने तथा अपने-अपने क्षेत्र में नई सोच, नए प्रयोग और नए समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

रोजगार से आगे बढ़कर रोजगार सृजन पर जोर

डॉ. सुनील मिश्रा ने कहा कि इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना होना चाहिए, जो रोजगार के अवसरों के लिए तैयार होने के साथ-साथ रोजगार सृजन, अनुसंधान, स्टार्टअप, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने तथा अपने कौशल को लगातार विकसित करने का संदेश दिया।

शिक्षा से कौशल और कौशल से नवाचार की ओर

कार्यक्रम में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया कि तकनीकी शिक्षा को समय की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को कक्षा के ज्ञान के साथ प्रयोगशाला आधारित शिक्षा, परियोजना आधारित अधिगम, उद्योगोन्मुखी अनुभव, तकनीकी प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि देश के युवा इंजीनियर भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए विद्यार्थियों में केवल पाठ्यक्रम पूरा करने की प्रवृत्ति के बजाय सीखने, प्रयोग करने, असफलताओं से सीखने और नए समाधान खोजने की संस्कृति विकसित करना जरूरी है।

एक्यूरेट में तकनीकी शिक्षा और नवाचार पर निरंतर जोर

एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, व्यावहारिक शिक्षा और उद्योगोन्मुखी कौशल से जोड़ने पर निरंतर जोर दिया जा रहा है। संस्थान का प्रयास है कि विद्यार्थी तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया की आवश्यकताओं को समझें और अपने ज्ञान को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में उपयोग कर सकें।

विश्वकर्मा पूजा का यह आयोजन विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक अवसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ज्ञान, तकनीकी कौशल, सृजनात्मकता और कर्मठता के महत्व को समझने का अवसर भी प्रदान किया।

शिक्षकगण एवं पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में बी.टेक प्रथम वर्ष के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एल. राजपूत, कंप्यूटर साइंस एवं एआई-एमएल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नितिन त्यागी, डीन इंजीनियरिंग डॉ. अभिषेक सक्सेना, प्रोफेसर ज़ैदी, प्रोफेसर तरुण सहित अन्य शिक्षकगण एवं संस्थान के पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी ने भगवान विश्वकर्मा का पूजन कर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और संस्थान की निरंतर प्रगति की कामना की।

आयोजन का संदेश

“ज्ञान से कौशल, कौशल से नवाचार और नवाचार से राष्ट्र निर्माण।”

विश्वकर्मा पूजा के माध्यम से एक्यूरेट ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि सच्ची शिक्षा वही है, जो ज्ञान को कौशल, कौशल को सृजन और सृजन को समाज एवं राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करे।


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