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उद्यमिता के दीप से विकसित भारत के स्वर्णिम युग तक एमएसएमई कार्यशाला में 150 से अधिक उद्यमियों ने जाना आत्मनिर्भरता, सरकारी खरीद, निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का मार्ग


शिक्षा, पत्रकारिता एवं सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए भगवत प्रसाद शर्मा सम्मानित
   मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी" / ग्रेटर नोएडा
किसी राष्ट्र का विकास केवल ऊंची इमारतों, बड़े औद्योगिक परिसरों, चमकते एक्सप्रेसवे अथवा आर्थिक आंकड़ों की वृद्धि से नहीं मापा जा सकता। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तब दिखाई देती है, जब छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में काम करने वाला उद्यमी, श्रमिक, युवा, महिला और सामान्य नागरिक भी विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनता है।
भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम—एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका इसी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। छोटे उद्यमों के माध्यम से उत्पादन, रोजगार, नवाचार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और बाजार की गतिविधियों को गति मिलती है। ऐसे में उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता, सार्वजनिक खरीद, गुणवत्ता मानकों, निर्यात तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए ग्रेटर नोएडा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र से संबंधित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के विकास एवं सुविधा कार्यालय, ओखला, नई दिल्ली, औद्योगिक व्यवसाय संघ, ग्रेटर नोएडा तथा आईआईएलएम विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक उद्यमियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला का प्रमुख केंद्र ‘खरीद एवं विपणन सहायता योजना’ रहा। कार्यक्रम में वित्तीय सहायता, सरकारी खरीद, विपणन, गुणवत्ता संवर्धन, निर्यात, अंतरराष्ट्रीय बाजार तथा आधुनिक विनिर्माण प्रणाली जैसे विषयों पर उद्यमियों को जानकारी दी गई।
दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम, आईएएस द्वारा दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
अपने संबोधन में उन्होंने जिले की औद्योगिक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक निवेश जैसे क्षेत्रों में मौजूद अवसरों का उल्लेख किया। उन्होंने उद्यमियों को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर व्यापक और वैश्विक बाजार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।
गौतम बुद्ध नगर पहले से ही औद्योगिक और निवेश गतिविधियों के लिहाज से उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विकसित हो रहा औद्योगिक आधार, बेहतर कनेक्टिविटी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां तथा जेवर क्षेत्र में विकसित हो रही बुनियादी संरचनाएं आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को और व्यापक कर सकती हैं।
ऐसे वातावरण में स्थानीय एमएसएमई को बाजार, वित्त, तकनीक और सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़ना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
वित्तीय सहायता से लेकर निर्यात तक—उद्यमियों के लिए विस्तृत जानकारी
कार्यशाला के दौरान उद्यमियों को केवल योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित न रहते हुए उनके व्यावहारिक उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के उप निदेशक ओ. पी. सिंह ने ऋण प्रत्याभूति योजनाओं और वित्तीय सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने उद्यमियों को उपलब्ध वित्तीय विकल्पों तथा संस्थागत सहायता के बारे में अवगत कराया।
वहीं राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम के मुख्य प्रबंधक ऋषि भाटिया एवं राजन उप्रेती ने अंतरराष्ट्रीय विपणन और निर्यात संवर्धन से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी। उद्यमियों के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश छोटे और मध्यम उद्योगों के विस्तार के नए अवसर खोल सकता है।
निर्यात के क्षेत्र में उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, प्रमाणन, बाजार की समझ, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन और ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन जैसे अनेक पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। कार्यशाला में इन्हीं विषयों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास किया गया।
सरकारी खरीद में एमएसएमई के लिए अवसर
कार्यशाला में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में एमएसएमई की भागीदारी के अवसरों पर भी विशेष चर्चा हुई।
इंडियन ऑयल तथा ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन के खरीद अधिकारियों ने सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में खरीद प्रक्रिया तथा एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी।
छोटे उद्यमियों के लिए सरकारी खरीद बाजार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। हालांकि इसके लिए आवश्यक पंजीकरण, गुणवत्ता मानकों, तकनीकी पात्रताओं, दस्तावेजी प्रक्रियाओं और समयबद्ध आपूर्ति जैसी आवश्यकताओं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी संदर्भ में कार्यशाला ने उद्यमियों को सरकारी खरीद व्यवस्था की संभावनाओं को समझने का एक मंच उपलब्ध कराया।
गुणवत्ता, उत्पादकता और आधुनिक तकनीक पर जोर
कार्यशाला में सरकारी ई-बाजार (GeM), जीरो डिफेक्ट–जीरो इफेक्ट (ZED) प्रमाणन तथा दक्ष एवं मितव्ययी विनिर्माण प्रणाली जैसे विषयों पर भी जानकारी साझा की गई।
आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में केवल उत्पादन करना पर्याप्त नहीं है। उत्पाद की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, लागत नियंत्रण, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, तकनीकी दक्षता और ग्राहक की अपेक्षाओं को पूरा करना भी व्यवसाय की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस दृष्टि से आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन प्रणालियों को अपनाने पर दिया गया जोर एमएसएमई क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संदेश रहा।
उद्योग–प्रशासन संवाद को बताया गया आवश्यक
औद्योगिक व्यवसाय संघ के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय एवं महासचिव सुनील दत्त शर्मा ने उद्योग, प्रशासन और उद्यमियों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्योग जगत की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए प्रशासन तथा उद्यमियों के बीच सीधा संवाद महत्वपूर्ण माना जाता है। बिजली, सड़क, जल निकासी, प्रदूषण संबंधी अनुपालन, श्रम, वित्त, बाजार, सरकारी खरीद और अन्य व्यावसायिक विषयों पर समयबद्ध संवाद से औद्योगिक वातावरण को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला के संवादात्मक सत्र में उद्यमियों ने अपनी जिज्ञासाएं और व्यावहारिक समस्याएं भी सामने रखीं, जिन पर संबंधित विशेषज्ञों द्वारा जानकारी एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
आईआईएलएम विश्वविद्यालय की सहभागिता
कार्यक्रम में आईआईएलएम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जयशंकर वरियार, प्रति-कुलपति डॉ. निहार अमोनकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
इसके अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्य निदेशक डॉ. आर. के. भारती सहित विभागीय अधिकारियों और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
शिक्षा संस्थानों, प्रशासन और उद्योग जगत के बीच इस प्रकार का संवाद युवाओं और नए उद्यमियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। शिक्षा और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल से कौशल, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता को एक-दूसरे से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के लिए भगवत प्रसाद शर्मा सम्मानित
कार्यक्रम का एक विशेष अवसर उस समय सामने आया, जब शिक्षा, पत्रकारिता तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में योगदान के लिए भगवत प्रसाद शर्मा को सम्मानित किया गया।
औद्योगिक व्यवसाय संघ के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय द्वारा उन्हें स्मृति-चिह्न प्रदान किया गया।
यह सम्मान शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संवाद एवं जनजागरूकता को बढ़ावा देने वाले प्रयासों के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य केवल घटनाओं का विवरण प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की आवाज को सामने लाना, महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद स्थापित करना और जनहित से जुड़े मुद्दों को व्यापक विमर्श का हिस्सा बनाना भी है।
इसी प्रकार शिक्षा समाज में विचार और विवेक का निर्माण करती है, जबकि सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां समुदायों के बीच संवाद और सहभागिता को मजबूत करती हैं। इन तीनों क्षेत्रों का समन्वय समाज को अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाने में योगदान दे सकता है।
विकसित भारत@2047—आर्थिक शक्ति के साथ सामाजिक सहभागिता का संकल्प
भारत के विकास की चर्चा आज ‘विकसित भारत@2047’ के व्यापक लक्ष्य के संदर्भ में की जा रही है। वर्ष 2047 में देश स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। इस लक्ष्य की दिशा में आने वाले दो दशक भारत की आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और औद्योगिक यात्रा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
इस यात्रा में एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एक छोटा उद्योग जब उत्पादन बढ़ाता है तो उसके साथ श्रमिकों के लिए रोजगार पैदा होते हैं। स्थानीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला विकसित होती है। परिवहन, पैकेजिंग, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों को काम मिलता है। एक उद्यम की सफलता कई परिवारों की आर्थिक स्थिरता से जुड़ सकती है।
इसलिए एमएसएमई केवल आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है।
छोटे उद्यमी की सफलता में छिपी है बड़ी आर्थिक कहानी
भगवत प्रसाद शर्मा के शब्दों में—
“भारत के विकास की असली कहानी उस छोटे उद्यमी की सफलता में लिखी जाएगी, जिसने सीमित साधनों के बावजूद अपने पुरुषार्थ से आगे बढ़ने का प्रयास किया। जब उसके श्रम को नीति का संबल, तकनीक का सहयोग और बाजार का विस्तार मिलता है, तब उसकी सफलता व्यापक आर्थिक विकास का हिस्सा बन जाती है।”
आज आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय उत्पादों को बेहतर गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक के साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए।
‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत@2047’ जैसे व्यापक लक्ष्यों की सफलता में उद्यमियों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और उपभोक्ताओं की सहभागिता महत्वपूर्ण होगी।
महिला उद्यमिता और युवा शक्ति को मिले अवसर
विकसित भारत की कल्पना में युवा शक्ति और मातृशक्ति की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
आज बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ स्टार्टअप, डिजिटल व्यवसाय, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स और तकनीकी उद्यमों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी प्रकार महिलाएं भी घर आधारित कारोबार से लेकर संगठित उद्योगों तक अपनी भूमिका का विस्तार कर रही हैं।
एमएसएमई क्षेत्र में ऐसी संभावनाओं को संस्थागत सहायता, प्रशिक्षण, वित्तीय पहुंच, बाजार और तकनीकी मार्गदर्शन से जोड़ा जाए तो उद्यमिता का आधार और व्यापक हो सकता है।
कार्यशाला का व्यापक संदेश
ग्रेटर नोएडा में आयोजित इस कार्यशाला का मूल संदेश यही रहा कि उद्यमिता केवल व्यक्तिगत आर्थिक सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय विकास की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकारी योजनाओं की जानकारी तभी वास्तविक लाभ में बदलती है, जब उद्यमी उन्हें समझें, पात्रता पूरी करें और उपलब्ध अवसरों का प्रभावी उपयोग करें। इसी प्रकार उद्योग जगत को भी गुणवत्ता, पारदर्शिता, समयबद्धता, तकनीकी दक्षता और बदलते बाजार के अनुरूप स्वयं को निरंतर विकसित करना होगा।
प्रशासन, उद्योग संगठन, वित्तीय संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान और उद्यमी यदि एक साझा मंच पर नियमित संवाद करते रहें, तो औद्योगिक विकास की दिशा में अधिक प्रभावी परिणाम सामने आ सकते हैं।
स्वर्णिम भविष्य की नींव आज के पुरुषार्थ से
किसी भी राष्ट्र का स्वर्णिम भविष्य अचानक नहीं बनता। उसकी नींव वर्षों के परिश्रम, नीतियों, नवाचार, शिक्षा, कौशल और नागरिक सहभागिता से तैयार होती है।
जहां श्रम को सम्मान मिले,
जहां उद्यम को अवसर मिले,
जहां युवा के सपनों को उड़ान मिले,
जहां महिलाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले,
जहां छोटे उद्योगों को बाजार और तकनीक का सहयोग मिले,
और जहां विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंचे—
वहीं विकसित भारत की मजबूत आधारभूमि तैयार हो सकती है।
एमएसएमई कार्यशाला इसी व्यापक यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई, जहां 150 से अधिक उद्यमियों ने वित्त, सरकारी खरीद, विपणन, गुणवत्ता, निर्यात और वैश्विक बाजार से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की।
भारत का 2047 केवल भविष्य की कोई दूर की तारीख नहीं है। वह एक ऐसा लक्ष्य है, जिसकी दिशा आज के निर्णयों, नीतियों, उद्यमिता, नवाचार और सामूहिक पुरुषार्थ से तय हो रही है।
उद्यमिता के छोटे-छोटे दीप जब एक साथ जलते हैं, तो वही प्रकाश विकसित भारत के स्वर्णिम युग की राह को प्रकाशित कर सकता है।

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