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विशेष ग्राउंड रिपोर्ट — 103 वां श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला ₹1.51 लाख की ‘सबसे बड़ी कुश्ती’ से शुरू हुआ दंगल, फैसले ने बदला अखाड़े का माहौल; आखिर सात ₹31 हजार की कुश्तियों में निकला रास्ता


पहलवानों की भारी भीड़ के चलते आयोजन समिति ने बदला मुकाबले का प्रारूप, एक बड़ी कुश्ती की जगह सात मुकाबले कराने के फैसले पर पहलवानों और कुश्ती प्रेमियों ने उठाए सवाल; घंटों की गहमागहमी के बाद अखाड़े में उतरे पहलवान और जमकर हुआ दांव-पेच
मौहम्मद इल्यास- ‘दनकौरी’ /दनकौर (गौतमबुद्धनगर )
दनकौर के ऐतिहासिक 103वें श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले के तीसरे दिन मंगलवार को आयोजित विशाल कुश्ती दंगल में इस बार अखाड़े के भीतर पहलवानों की ताकत से ज्यादा चर्चा उस फैसले की रही, जिसने घोषित सबसे बड़ी कुश्ती का पूरा प्रारूप बदल दिया। जिस दंगल में पहले ₹1.51 लाख की एक बड़ी कुश्ती को मुख्य आकर्षण बनाया गया था, वहां पहलवानों की भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति ने एक बड़ी कुश्ती के बजाय ₹31-₹31 हजार की सात अलग-अलग कुश्तियां कराने का निर्णय लिया।
आयोजन समिति के अनुसार इस बदलाव के बाद कुल इनामी राशि ₹2.51 लाख के आसपास निर्धारित हुई। लेकिन जैसे ही एक बड़ी कुश्ती को सात मुकाबलों में बदलने का फैसला सामने आया, अखाड़े के आसपास मौजूद पहलवानों और कुश्ती प्रेमियों के बीच चर्चा तेज हो गई। कई पहलवानों ने फैसले पर आपत्ति जताई। दर्शकों में भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ समय तक दंगल स्थल पर असमंजस और गहमागहमी का माहौल बना रहा।
हालांकि बाद में काफी देर की बातचीत और विचार-विमर्श के बाद मुकाबलों का आयोजन सात ₹31 हजार की कुश्तियों के रूप में किया गया। इसके बाद अखाड़े में उतरे पहलवानों ने अपने-अपने मुकाबलों में पूरी ताकत झोंक दी और हजारों दर्शकों को रोमांचक कुश्तियां देखने को मिलीं।
शुरुआत से ही अखाड़े में दिखाई दी पहलवानों की भीड़
मंगलवार को दंगल शुरू होने से पहले ही दनकौर का कुश्ती मैदान पहलवानों और कुश्ती प्रेमियों से भरने लगा था। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा दूसरे जनपदों और राज्यों से भी पहलवान पहुंचे। जैसे-जैसे मुकाबले शुरू होने का समय नजदीक आया, अखाड़े के आसपास दर्शकों की भीड़ बढ़ती चली गई।
दर्शकों में युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्ग और ग्रामीण भी मौजूद रहे। कई लोग पारंपरिक कुश्ती देखने के लिए काफी पहले ही दंगल स्थल पर पहुंच गए थे।
अखाड़े में पहलवानों की संख्या अधिक होने के कारण सबसे बड़ी कुश्ती को लेकर भी विशेष उत्सुकता बनी हुई थी। ₹1.51 लाख के इनाम की घोषणा ने पहले से ही इस मुकाबले को दंगल का सबसे बड़ा आकर्षण बना दिया था।
लेकिन यहीं से दंगल में एक नया मोड़ आया।
₹1.51 लाख की एक कुश्ती की जगह सात मुकाबलों का फैसला
आयोजन समिति की ओर से पहले ₹1.51 लाख की सबसे बड़ी कुश्ती निर्धारित की गई थी। लेकिन बड़ी संख्या में पहलवानों के पहुंचने और मुकाबले के लिए दावेदारी को देखते हुए समिति ने फैसला लिया कि एक ही पहलवान जोड़ी को ₹1.51 लाख देने के बजाय अधिक पहलवानों को मौका दिया जाए।
इसके तहत एक बड़ी कुश्ती के बजाय ₹31 हजार की सात अलग-अलग कुश्तियां कराने का निर्णय लिया गया।
यही फैसला दंगल के दौरान चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया।
कई पहलवानों ने इस बदलाव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उनका तर्क था कि जब सबसे बड़ी कुश्ती के लिए पहले से ₹1.51 लाख का ऐलान किया गया था तो अंतिम समय में उसका प्रारूप बदलना उचित नहीं है। दूसरी ओर आयोजन समिति की ओर से पहलवानों की भारी संख्या और अधिक प्रतिभागियों को मुकाबले का अवसर देने को फैसले का आधार बताया गया।
कुश्ती देखने पहुंचे दर्शकों में भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय सामने आई। कुछ दर्शक चाहते थे कि पहले घोषित बड़ी कुश्ती ही कराई जाए, जबकि कुछ लोगों ने ज्यादा पहलवानों को मौका देने के फैसले को भी उचित बताया।
इस तरह दंगल का अखाड़ा कुछ समय के लिए कुश्ती से ज्यादा फैसले को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया।
गहमागहमी के बाद सात मुकाबलों पर बनी सहमति
दंगल स्थल पर स्थिति को लेकर काफी देर तक गहमागहमी बनी रही। पहलवानों और आयोजन से जुड़े लोगों के बीच चर्चा के बाद अंततः सात अलग-अलग ₹31 हजार की कुश्तियां कराने पर सहमति बनी।
इसके बाद एक-एक करके पहलवान अखाड़े में उतरे और मुकाबले शुरू हुए।
यहीं से दंगल का माहौल फिर पूरी तरह खेलमय हो गया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों के साथ पहलवानों का उत्साह बढ़ाना शुरू कर दिया।
अभिषेक नागर ने मोंटी रोहतक को दी पटखनी
पहली ₹31 हजार की कुश्ती में अभिषेक नागर जुनेदपुर और मोंटी रोहतक आमने-सामने आए।
दोनों पहलवानों के अखाड़े में उतरते ही दर्शकों में उत्साह दिखाई दिया। मुकाबले में दोनों ओर से दांव-पेच आजमाए गए। अंततः अभिषेक नागर जुनेदपुर ने मोंटी रोहतक को हराकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
संदीप जुनेदपुर ने दीपक सोनीपत को हराया
दूसरे मुकाबले में संदीप जुनेदपुर का मुकाबला दीपक सोनीपत से हुआ।
दोनों पहलवानों ने अपनी-अपनी तकनीक और ताकत का प्रदर्शन किया। मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती गई। अंततः संदीप जुनेदपुर ने दीपक सोनीपत को पराजित कर जीत हासिल की।
तंत्रा रोशनपुर की जीत
तीसरी ₹31 हजार की कुश्ती में तंत्रा रोशनपुर और दीपक के बीच मुकाबला हुआ।
अखाड़े में दोनों पहलवानों ने कई दांव आजमाए। दर्शक लगातार तालियां बजाकर दोनों का उत्साह बढ़ाते रहे। मुकाबले के निर्णायक क्षणों में तंत्रा रोशनपुर ने बढ़त बनाई और दीपक को हराकर कुश्ती अपने नाम कर ली।
उपकार धनोरी ने अंकित गुड़गांव को दी मात
चौथी कुश्ती में उपकार धनोरी और अंकित गुड़गांव आमने-सामने थे।
यह मुकाबला भी दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। दोनों पहलवानों ने अखाड़े में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। आखिरकार उपकार धनोरी ने अंकित गुड़गांव को हराकर ₹31 हजार की कुश्ती जीत ली।
दक्ष ओखला ने बद्री मुर्शदपुर को हराया
पांचवीं कुश्ती में दक्ष ओखला और बद्री मुर्शदपुर के बीच मुकाबला हुआ।
अखाड़े के चारों ओर बैठे दर्शक इस मुकाबले को बेहद उत्सुकता से देखते रहे। दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे पर बढ़त बनाने का प्रयास किया। अंततः दक्ष ओखला ने बद्री मुर्शदपुर को शिकस्त देकर मुकाबला अपने नाम किया।
बंटी हमीदपुर ने भीम दिल्ली को किया पराजित
छठे मुकाबले में बंटी हमीदपुर और भीम दिल्ली के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिली।
मुकाबले के दौरान दोनों पहलवानों की ताकत और तकनीक का प्रदर्शन देखने को मिला। कई मौकों पर दर्शकों की निगाहें अखाड़े पर टिक गईं। अंततः बंटी हमीदपुर ने भीम दिल्ली को हराकर जीत हासिल की।
दानिश अनवरगढ़ और अमित रोहतक के बीच अंतिम मुकाबला
सातवीं और अंतिम ₹31 हजार की कुश्ती में दानिश अनवरगढ़ का सामना अमित रोहतक से हुआ।
इस मुकाबले को देखने के लिए दर्शकों में विशेष उत्साह रहा। दोनों पहलवानों ने अखाड़े में अपना दमखम दिखाया। आखिरकार दानिश अनवरगढ़ ने अमित रोहतक को पराजित कर सातवीं कुश्ती भी अपने नाम कर ली।
इस तरह सातों मुकाबलों के विजेता रहे—
अभिषेक नागर जुनेदपुर, संदीप जुनेदपुर, तंत्रा रोशनपुर, उपकार धनोरी, दक्ष ओखला, बंटी हमीदपुर और दानिश अनवरगढ़।
₹71 हजार से ₹5,100 तक की कुश्तियों ने भी बांधा समां
दंगल में केवल ₹31 हजार की सात कुश्तियां ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहीं। इसके अलावा ₹71 हजार, ₹51 हजार, ₹21 हजार, ₹11 हजार और ₹5,100 सहित विभिन्न इनामी मुकाबले भी आयोजित किए गए।
हर मुकाबले के साथ अखाड़े में दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। पहलवानों के दांव-पेच पर तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा।
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने किया दंगल का शुभारंभ
दंगल का शुभारंभ सांसद डॉ. महेश शर्मा, कोकिला वन शनिदेव मंदिर के उत्तराधिकारी श्री श्री जानकीदास महाराज तथा जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया।
इस अवसर पर सांसद डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि दनकौर का श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि खेल न केवल शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना भी पैदा करते हैं।
विधायक धीरेन्द्र सिंह ने बताई 103 साल पुरानी परंपरा की अहमियत
जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि दनकौर का श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला 103 वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि कुश्ती दंगल भारतीय ग्रामीण खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीण और स्थानीय प्रतिभाओं को बड़े मंच पर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को पारंपरिक खेलों से जोड़ना समय की आवश्यकता है और दनकौर का दंगल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
समिति ने कहा—परंपरा को आगे बढ़ाना प्राथमिकता
श्री द्रोण गौशाला समिति (रजि.) के प्रबंधक रजनीकान्त अग्रवाल ने कहा कि दनकौर का श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेला 103 वर्षों की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। कुश्ती दंगल इस मेले की पुरानी और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास है कि पारंपरिक कुश्ती को मंच मिलता रहे और ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं आगे बढ़ें।
दंगल स्थल पर दिखी पीढ़ियों की साझी विरासत
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यह रही कि अखाड़े के चारों ओर सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों की भी बड़ी संख्या दिखाई दी। कई बुजुर्ग दर्शक पारंपरिक कुश्ती के पुराने मुकाबलों को याद करते हुए वर्तमान पहलवानों के प्रदर्शन पर चर्चा करते नजर आए।
दनकौर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रही है। मेले के दौरान आयोजित दंगल इसी परंपरा को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।
आयोजन समिति के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक रहे मौजूद
दंगल के दौरान श्री द्रोण गौशाला समिति (रजि.) के अध्यक्ष राकेश कुमार गर्ग, प्रबंधक रजनीकान्त अग्रवाल, उप प्रबंधक संजीव कुमार गुप्ता, मोहित कुमार गर्ग, सुशील कुमार मांगलिक, संजय कुमार गोयल, पंकज गर्ग, मनोज त्यागी, सोनू वर्मा (सांसद प्रतिनिधि), सत्यवीर नागर (पूर्व लोकसभा प्रत्याशी), पवन खटाना (राष्ट्रीय महामंत्री, भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक), ओमवीर सिंह भाटी, डॉ. गिरीश कुमार वत्स, चंद्रपाल सिंह नागर और ध्रुव गोयल सहित समिति के पदाधिकारी, सदस्य और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दंगल का सबसे बड़ा सवाल भी यहीं रहा
इस वर्ष के दंगल की चर्चा लंबे समय तक केवल विजेता पहलवानों के कारण नहीं, बल्कि ₹1.51 लाख की घोषित सबसे बड़ी कुश्ती के अंतिम समय में बदले गए प्रारूप को लेकर भी होती रहेगी।
एक ओर आयोजन समिति ने पहलवानों की भारी संख्या को देखते हुए अधिक पहलवानों को मौका देने के उद्देश्य से सात कुश्तियां कराने का निर्णय लिया, वहीं दूसरी ओर कुछ पहलवानों और कुश्ती प्रेमियों ने पहले से घोषित ₹1.51 लाख की एक बड़ी कुश्ती के बजाय सात मुकाबले कराने पर सवाल उठाए।
हालांकि अंततः मुकाबले हुए, पहलवानों ने अखाड़े में अपना दमखम दिखाया और हजारों दर्शकों ने पूरे उत्साह के साथ उनका समर्थन किया।
अखाड़े में जीत पहलवानों की, लेकिन चर्चा फैसले की रही
103वें श्री कृष्ण जन्मोत्सव मेले के तीसरे दिन का दंगल कई मायनों में खास रहा। एक तरफ अखाड़े में पहलवानों ने अपनी ताकत, तकनीक और मेहनत का प्रदर्शन किया, तो दूसरी तरफ सबसे बड़ी कुश्ती के प्रारूप में बदलाव ने आयोजन को लेकर चर्चा को नई दिशा दे दी।
₹1.51 लाख की एक बड़ी कुश्ती से शुरू हुई कहानी अंततः ₹31 हजार की सात कुश्तियों पर जाकर खत्म हुई। सातों मुकाबलों में विजेता पहलवानों ने अपने प्रदर्शन से दर्शकों का दिल जीता, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि ग्रामीण खेलों के बड़े आयोजनों में पहलवानों की बढ़ती संख्या, पुरस्कार राशि और मुकाबलों के प्रारूप को लेकर लिए जाने वाले फैसले कितने महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
दनकौर के ऐतिहासिक मेले का यह दंगल एक बार फिर साबित कर गया कि आधुनिक खेलों के दौर में भी मिट्टी के अखाड़े, पारंपरिक दांव-पेच और हजारों दर्शकों की तालियों का आकर्षण बरकरार है।
श्री द्रोण गौशाला समिति की ओर से सांसद डॉ. महेश शर्मा, श्री श्री जानकीदास महाराज, विधायक धीरेन्द्र सिंह, सभी पहलवानों, सहयोगियों, समिति पदाधिकारियों और कुश्ती प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
103 वर्ष पुरानी परंपरा के इस दंगल में मंगलवार को अखाड़ा कई बार गरमाया, मुकाबले कई बार रोमांचक हुए और सबसे बड़ी कुश्ती का फैसला अंत तक चर्चा में रहा—लेकिन जब पहलवान अखाड़े में उतरे तो सारी बहस पीछे छूट गई और सामने रह गया सिर्फ कुश्ती का जुनून।


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