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अभिभावक-शिक्षक संवाद से सशक्त होगा विद्यार्थियों का भविष्य : द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में गरिमामय अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह


अभिभावकों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर किया सम्मानित, शैक्षणिक प्रगति एवं सर्वांगीण विकास पर हुआ सार्थक मंथन

मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ गौतमबुद्धनगर 
श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज, दनकौर के कला विभाग द्वारा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, अनुशासन एवं सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास को केंद्र में रखते हुए अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महाविद्यालय, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच प्रभावी संवाद एवं बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सामूहिक सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल एवं प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के दिशा-निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की ओर से उपस्थित अभिभावकों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान अभिभावकों के सहयोग, सहभागिता एवं महाविद्यालय के प्रति उनके विश्वास के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा।
विद्यार्थियों की प्रगति पर शिक्षकों और अभिभावकों ने किया मंथन
अभिभावक-शिक्षक संवाद के दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, अनुशासन, व्यवहार, अध्ययन की आदतों तथा आगामी शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों एवं सुधार की संभावनाओं से अभिभावकों को अवगत कराया, वहीं अभिभावकों ने भी अपने अनुभव, विचार और उपयोगी सुझाव साझा किए।
समारोह में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यार्थी के विकास की प्रक्रिया केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। परिवार और शिक्षण संस्थान के बीच निरंतर संवाद एवं सहयोग से ही विद्यार्थी की प्रतिभा और क्षमताओं को सही दिशा दी जा सकती है।
महाविद्यालय के अनुशासित वातावरण की अभिभावकों ने की सराहना
इस अवसर पर सुभाष भाटी ने महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं अनुशासित वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्य महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और वे संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था एवं सकारात्मक वातावरण से अत्यंत संतुष्ट हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अनुशासित एवं बेहतर शैक्षणिक माहौल की विशेष प्रशंसा की।
वहीं मास्टर देवकरण सिंह नागर ने महाविद्यालय की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज को एक छोटे से पौधे से विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित होते देखा है। उन्होंने कहा कि संस्थापक स्वर्गीय वेद प्रकाश अग्रवाल ने जिस शिक्षा के स्वप्न को देखा था, वह आज साकार रूप ले रहा है और महाविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
अभिभावकों के सुझाव संस्थान के लिए महत्वपूर्ण : रजनीकान्त अग्रवाल
महाविद्यालय के सचिव रजनीकान्त अग्रवाल ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह का उद्देश्य अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ना, विद्यार्थियों की प्रगति पर संयुक्त रूप से विचार करना तथा संस्थान के विकास के लिए उनके महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त करना है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास महाविद्यालय का सर्वोच्च लक्ष्य है और इस दिशा में संस्थान निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने अभिभावकों से महाविद्यालय के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने की अपील की।
शिक्षा के साथ संस्कार और जिम्मेदारी भी जरूरी : प्राचार्य
प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स ने कहा कि विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में शिक्षक और अभिभावक दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अभिभावकों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, अध्ययन, अनुशासन एवं सकारात्मक व्यवहार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेहतर संस्कार देने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में दिखाई महाविद्यालय की विकास यात्रा
कार्यक्रम के दौरान अंग्रेजी विभाग की डॉ. अजमत आरा ने प्रभावशाली पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, विभिन्न विभागों, उपलब्ध सुविधाओं, सह-शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपलब्धियों एवं संस्थान की विकास यात्रा से विस्तारपूर्वक अवगत कराया।
प्रस्तुति के माध्यम से अभिभावकों को महाविद्यालय की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक अवसरों की समग्र जानकारी मिली। अभिभावकों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए महाविद्यालय की उपलब्धियों और निरंतर प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की।
अभिभावकों का सहयोग विद्यार्थियों की सफलता की कुंजी : डॉ. देवानन्द सिंह
कला संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. देवानन्द सिंह ने अभिभावकों से संवाद करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत प्रगति में अभिभावकों का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अभिभावकों से महाविद्यालय के साथ निरंतर सहयोग एवं समन्वय बनाए रखने की अपील की, ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा और क्षमता को उचित दिशा प्रदान करते हुए उन्हें सफलता के शिखर तक पहुंचाया जा सके।
प्रभावशाली मंच संचालन ने बांधा समां
कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावशाली मंच संचालन डॉ. निशा शर्मा ने किया। उनकी ओजपूर्ण वाणी, सहज संवाद शैली एवं उत्कृष्ट शब्द-संयोजन ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत एवं सुव्यवस्थित बनाए रखा। उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्येक चरण को गरिमापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए उपस्थित अभिभावकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से जोड़े रखा।
अभिभावक और शिक्षक मिलकर बनाते हैं विद्यार्थी का भविष्य”
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उप-प्राचार्या एवं आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. रश्मि गुप्ता ने सभी अभिभावकों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा—
“जब अभिभावक और शिक्षक एक साथ विद्यार्थी के भविष्य को दिशा देते हैं, तब शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व एवं जीवन-निर्माण का सशक्त माध्यम बन जाती है।”
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास के लिए महाविद्यालय और अभिभावकों के बीच निरंतर संवाद, विश्वास एवं सहयोग बेहद आवश्यक है।
सकारात्मक संवाद से बनी भविष्य की कार्ययोजना
कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय एवं सकारात्मक उपस्थिति ने समारोह को सार्थकता प्रदान की। अभिभावक-शिक्षक संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति एवं व्यक्तिगत विकास के लिए भविष्य की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
समारोह का समापन सकारात्मक संवाद, पारस्परिक विश्वास एवं सहयोग की भावना के साथ राष्ट्रगान द्वारा हुआ।
अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब महाविद्यालय, शिक्षक और अभिभावक एकजुट होकर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में सहभागी बनते हैं, तो शिक्षा की दिशा और उसका प्रभाव दोनों अधिक सशक्त एवं सार्थक हो जाते हैं।
इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, सहायक आचार्यगण एवं गैर-शिक्षणेत्तर कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
विशेष टिप्पणी
द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज का यह आयोजन केवल औपचारिक अभिभावक-शिक्षक बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर महाविद्यालय और अभिभावकों की साझा जिम्मेदारी एवं प्रतिबद्धता का प्रभावशाली मंच बनकर सामने आया।


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