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दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर कंचन कुमारी और प्रिंसिपल डॉ. हेमा शर्मा ने महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र की प्रगति को लेकर आवाज बुलंद की

स्पेशल स्टोरी | महिला सशक्तिकरण की बुलंद आवाज: अखिल भारतीय गुर्जर महासभा की विचार गोष्ठी में शिक्षा, अधिकार और सामाजिक बदलाव पर मंथन
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"
VISION LIVE NEWS | ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा के दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, नॉलेज पार्क-3 में आयोजित अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (स्थापित 1908) की महत्वपूर्ण बैठक एवं विचार गोष्ठी केवल एक संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह महिला अधिकार, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे अहम विषयों पर गंभीर चिंतन का मंच भी बनी। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने भाग लिया और महिलाओं की शिक्षा, सम्मान तथा समान भागीदारी को लेकर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर कंचन कुमारी और प्रिंसिपल डॉ. हेमा शर्मा ने महिला सशक्तिकरण को समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब महिलाओं को शिक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों। महिलाओं को केवल परिवार तक सीमित न रखकर निर्णय प्रक्रिया, नेतृत्व और सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
डायरेक्टर कंचन कुमारी ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और आत्मनिर्भर बनने की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और प्रोत्साहन मिले तो वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
वहीं प्रिंसिपल डॉ. हेमा शर्मा ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी आधार होता है। बच्चों, विशेषकर बालिकाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नैतिक मूल्यों का विकास करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षित महिला पूरे परिवार और समाज को सकारात्मक दिशा देने का सामर्थ्य रखती है।
वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि महिला अधिकारों को लेकर समाज में निरंतर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, समान अवसर और सम्मानजनक स्थान मिलना एक विकसित और संवेदनशील समाज की पहचान है। शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से ही लैंगिक समानता और महिला सम्मान के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने महिला शिक्षा, सामाजिक समरसता और समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर अपने विचार साझा किए तथा ऐसे संवादों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।


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