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सरस्वती शिशु मंदिर दनकौर में वैदिक परंपरा के साथ हुआ 'विद्यारंभ संस्कार', 15 नन्हे विद्यार्थियों ने शिक्षा यात्रा का रखा पहला कदम

मां सरस्वती की आराधना, दीप प्रज्ज्वलन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ कार्यक्रम, अनिल कुमार गोयल बोले— संस्कारयुक्त शिक्षा ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है
रिपोर्ट: मौहम्मद इल्यास "दनकौरी"
Vision Live News / दनकौर (गौतमबुद्धनगर)
भारतीय संस्कृति में शिक्षा का आरंभ केवल विद्यालय में प्रवेश नहीं, बल्कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत करते हुए सरस्वती शिशु मंदिर जूनियर हाईस्कूल, दनकौर में शुक्रवार को नर्सरी कक्षा के नन्हे विद्यार्थियों का विद्यारंभ संस्कार अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, मां सरस्वती की वंदना और अभिभावकों की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। उपस्थित माताओं ने सामूहिक रूप से मां सरस्वती की आराधना कर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना की। विद्यालय परिसर में मौजूद अभिभावकों और अतिथियों ने इस आयोजन को भारतीय संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रेरणादायी प्रयास बताया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य देवदत्त शर्मा ने कहा कि विद्या मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने का आधार है। उन्होंने कहा कि जीवन को सुखमय, आनंदमय और सफल बनाने के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कारों का होना भी उतना ही आवश्यक है। सरस्वती शिशु मंदिर का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्रदान करना है।
इस अवसर पर नर्सरी कक्षा के 15 नन्हे भैया-बहनों ने विधिवत विद्यारंभ संस्कार में भाग लेकर अपने शैक्षिक जीवन की पहली औपचारिक शुरुआत की। विद्यालय परिवार ने तिलक एवं आशीर्वाद के साथ बच्चों का स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अनिल कुमार गोयल का विशेष उद्बोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अनिल कुमार गोयल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि बच्चे राष्ट्र की सबसे अमूल्य धरोहर हैं और उनके व्यक्तित्व का निर्माण बचपन से ही शुरू होता है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा में संस्कार, अनुशासन, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति का समावेश हो, वही शिक्षा समाज और राष्ट्र को नई दिशा देती है।
उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को केवल अंक प्राप्त करने की दौड़ तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार, सेवा भाव, ईमानदारी, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से भी जोड़ें। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चे के पहले गुरु होते हैं और विद्यालय उस नींव को मजबूत करता है। यदि परिवार और विद्यालय मिलकर बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का संकल्प लें, तो भविष्य में वही बच्चे समाज और देश का गौरव बनते हैं।
गोयल ने सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षा पद्धति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विद्यालय बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम की भावना भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कारयुक्त शिक्षा की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
मुख्य अतिथि जगदीश अग्रवाल ने भी बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है और प्रत्येक विद्यार्थी को परिश्रम, अनुशासन और संस्कारों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम का संयोजन आचार्या नीतू सिंह के निर्देशन में हुआ। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को विद्यारंभ संस्कार के महत्व से अवगत कराते हुए बताया कि भारतीय परंपरा में यह संस्कार ज्ञान, विवेक और सदाचार की यात्रा का शुभारंभ माना जाता है।
इस अवसर पर 12 मातृशक्ति ने कार्यक्रम में भाग लेकर मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया और पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम में कु. बंशीका, कु. भावना, कु. चाहत, कु. शिवानी, कु. कोमल, नरेंद्र शर्मा, ललन भैया सहित अनेक अभिभावक एवं विद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में सभी उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रधानाचार्य देवदत्त शर्मा ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब शिक्षा, संस्कार और परिवार का स्नेह एक साथ मिले।
यह आयोजन केवल नन्हे विद्यार्थियों के शैक्षिक जीवन की शुरुआत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रनिर्माण की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रेरक संदेश भी बनकर उभरा।

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