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44 गांवों के किसानों ने खोला मोर्चा: 'शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड हमारा अधिकार', 20 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर करेंगे एक दिवसीय अनशन


  मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
गौतमबुद्ध नगर में किसानों के लंबित मुद्दों को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होता दिखाई दे रहा है। इस बार ग्रेटर नोएडा के 44 गांवों के वे किसान, जिन्हें वर्ष 2011 के समझौते के बावजूद 10 प्रतिशत के स्थान पर केवल 6 प्रतिशत विकसित भूखंड मिलने का दावा है, अपने शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड की मांग को लेकर खुलकर मैदान में उतर आए हैं। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में किसानों ने घोषणा की कि यदि उनकी मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो 20 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर एक दिवसीय अनशन किया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
2011 के समझौते का हवाला
प्रेस वार्ता में किसानों ने बताया कि वर्ष 2011 में 'गजराज एवं अन्य बनाम राज्य सरकार' मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों को मूल मुआवजे पर 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर तथा 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिए जाने का आदेश दिया था। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान न्यायालय जाने लगे, जिससे विकास परियोजनाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका बनी।
किसानों का कहना है कि उसी समय तत्कालीन ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एवं चेयरमैन रमारमन और किसान प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ था। किसानों के अनुसार, उस समझौते में यह आश्वासन दिया गया था कि जो किसान न्यायालय नहीं गए हैं, उन्हें भी 10 प्रतिशत विकसित भूखंड का लाभ दिया जाएगा, ताकि अनावश्यक मुकदमेबाजी न बढ़े और विकास कार्य बाधित न हों।
'64.7 प्रतिशत मुआवजा मिला, लेकिन 4 प्रतिशत भूखंड रोक लिया गया'
किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण ने सभी किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा तो दे दिया, लेकिन जिन किसानों ने अदालत में याचिका दाखिल नहीं की थी, उन्हें 10 प्रतिशत के बजाय केवल 6 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया गया। उनका कहना है कि शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड आज तक नहीं दिया गया, जो किसानों के साथ अन्याय और वादाखिलाफी है।
प्रेस वार्ता में किसानों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने अपने ही समझौते का पालन नहीं किया और हजारों किसान वर्षों से अपने वैध अधिकार के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
एक वर्ष से चल रहा है अभियान
शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड से वंचित किसानों ने बताया कि पिछले लगभग एक वर्ष से वे लगातार शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग उठा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, जनपद प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को कई ज्ञापन सौंपे हैं।
किसानों का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर अपनी समस्या से अवगत कराया है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तक मौन जुलूस निकालकर भी अपनी मांग रखी गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।
20 जुलाई को अनशन, फिर जनप्रतिनिधियों के आवास के बाहर आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि अब भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 20 जुलाई को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर एक दिवसीय अनशन किया जाएगा। इसके बाद भी सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधियों के आवास के बाहर भी शांतिपूर्ण अनशन किया जाएगा।
किसानों का कहना है कि यह किसी प्रकार की नई मांग नहीं, बल्कि वर्षों पहले हुए समझौते के अनुरूप उनका वैध अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब तक शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड नहीं दिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
बढ़ता किसान असंतोष
गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर में इन दिनों किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों—आबादी निस्तारण, 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, लीजबैक, बढ़ा हुआ मुआवजा, रोजगार और विस्थापन—को लेकर आंदोलन तेज हो रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन, विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रियता और अब शेष 4 प्रतिशत विकसित भूखंड से वंचित किसानों के आंदोलन ने जिले की किसान राजनीति को नई गति दे दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।
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