BRAKING NEWS

6/recent/ticker-posts

स्पेशल स्टोरी:---10% पर सिमट गई थी धड़कनों की ताकत, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा के डॉक्टरों ने हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी से दी नई जिंदगी

कार्डियोजेनिक शॉक, फेफड़ों में पानी और बंद हो चुकी धमनियों के बीच डॉक्टरों ने किया असंभव को संभव, हार्ट की पंपिंग क्षमता 10% से बढ़कर 45% हुई
मौहम्मद इल्यास- "दनकौरी"/ ग्रेटर नोएडा
 जब किसी मरीज के दिल की पंपिंग क्षमता (ईजेक्शन फ्रैक्शन) केवल 10 प्रतिशत रह जाए, फेफड़ों में पानी भर जाए, रक्तचाप तेजी से गिरने लगे और मरीज कार्डियोजेनिक शॉक जैसी जानलेवा स्थिति में पहुंच जाए, तब हर पल जिंदगी और मौत के बीच की दूरी कम होती जाती है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों की सूझबूझ और समय पर लिए गए फैसलों ने फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा में एक ऐसा ही चमत्कार कर दिखाया, जहां 52 वर्षीय मरीज को न केवल मौत के मुंह से बाहर निकाला गया, बल्कि कुछ ही दिनों में उसके दिल की कार्यक्षमता 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत तक पहुंचा दी गई।
यह मामला केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि आधुनिक कार्डियक चिकित्सा की क्षमता, विशेषज्ञता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।
जब हर धड़कन बन गई थी चुनौती
अस्पताल के अनुसार 52 वर्षीय मरीज पिछले 24 घंटे से सीने में असहनीय दर्द, लगातार सांस फूलने, बेचैनी और अत्यधिक कमजोरी से परेशान था। परिजन उसे तत्काल फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा लेकर पहुंचे, जहां जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मरीज की स्थिति बेहद नाजुक है।
ईसीजी, इको और अन्य जांचों से पता चला कि मरीज कार्डियोजेनिक शॉक की अवस्था में था। यह ऐसी गंभीर स्थिति होती है, जब दिल शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप मस्तिष्क, किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचती और मरीज की जान को तत्काल खतरा पैदा हो जाता है।
दिल की तीनों प्रमुख धमनियां थीं गंभीर रूप से प्रभावित
जांच में सामने आया कि मरीज की हृदय की प्रमुख धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज था। एक धमनी लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी थी, जबकि अन्य धमनियों में भी अत्यधिक रुकावट मौजूद थी। इसके साथ ही मरीज के फेफड़ों में पानी भर चुका था और रक्तचाप लगातार गिर रहा था। ऐसी स्थिति में सामान्य एंजियोप्लास्टी करना भी डॉक्टरों के लिए बेहद जोखिम भरा होता है।
IABP तकनीक बनी सबसे बड़ी उम्मीद
मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए कार्डियोलॉजी टीम ने सबसे पहले इंट्रा-ऑर्टिक बैलून पंप (IABP) लगाया। यह एक विशेष जीवनरक्षक उपकरण है, जो कमजोर दिल को अस्थायी सहारा देकर शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है और हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है।
IABP की सहायता से मरीज की स्थिति को नियंत्रित करने के बाद विशेषज्ञों ने हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया। पूरी प्रक्रिया के दौरान अनुभवी कार्डियक विशेषज्ञों की टीम लगातार मरीज की निगरानी करती रही।
सफल एंजियोप्लास्टी के बाद लौटने लगी जिंदगी
हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी सफल रही और बंद धमनियों में रक्त प्रवाह दोबारा सामान्य हो गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया। डॉक्टरों ने लगातार दवाइयों, मॉनिटरिंग और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए मरीज की स्थिति पर नजर बनाए रखी।
इलाज का सकारात्मक असर तेजी से दिखाई दिया। पहले हार्ट की पंपिंग क्षमता 10 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हुई और बाद में यह 45 प्रतिशत तक पहुंच गई। स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह नियमित ओपीडी फॉलो-अप पर हैं और जल्द ही कार्डियक रिहैबिलिटेशन कार्यक्रम शुरू करेंगे, जिससे वह सामान्य जीवन और अपने पेशेवर कार्यों में भी लौट सकेंगे।
विशेषज्ञों ने बताया क्यों था यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शांतनु सिंघल ने बताया कि मरीज का हार्ट फंक्शन केवल 10 प्रतिशत रह गया था। वह कार्डियोजेनिक शॉक में था, फेफड़ों में पानी भर चुका था और रक्तचाप लगातार गिर रहा था। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी।
उन्होंने कहा कि पहले IABP की मदद से मरीज की स्थिति को स्थिर किया गया और उसके बाद हाई-रिस्क एंजियोप्लास्टी कर धमनियों में मौजूद रुकावट को सफलतापूर्वक दूर किया गया। यही वजह रही कि मरीज तेजी से रिकवर कर सका।
डॉ. शानू शर्मा बोलीं— विशेषज्ञता और तकनीक का बेहतरीन उदाहरण
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शानू शर्मा ने कहा कि यह सफलता अस्पताल की कार्डियक टीम की विशेषज्ञता, अत्याधुनिक तकनीक और त्वरित निर्णय क्षमता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज हाई-रिस्क कार्डियक मरीजों का भी समय पर और सही तकनीक के माध्यम से सफल उपचार संभव है। फोर्टिस हॉस्पिटल गंभीर और जटिल हृदय रोगियों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
समय पर पहचान से बच सकती है जान
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक पसीना आना, बेचैनी, अचानक कमजोरी या लंबे समय तक सीने में दबाव महसूस होना हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने से इलाज आसान हो जाता है और मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
फोर्टिस हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा की यह सफलता न केवल आधुनिक कार्डियक चिकित्सा की उपलब्धि है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही समय पर विशेषज्ञ उपचार और अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से गंभीर से गंभीर हृदय रोगियों को भी नया जीवन दिया जा सकता है।
.header-ads img { height:300px !important; max-height:300px !important; width:150% !important; object-fit:cover; }