11 किसान आंदोलन में शहीद हो चुके हैं मगर सरकार को यह सब कुछ क्यों नहीं दिखाई नही दे रहा है?

 




चौधरी शौकत अली चेची


अच्छे दिन वाली, झूठी है सरकार। नोटबंदी व जीएसटी बूचड़खाना, गौ रक्षा, बिजली बिल संशोधन और फिर नए तीन कृषि बिल किसानों की बर्बादी कर रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी करने के बजाए, अदानी अंबानी को मालामाल कर दिया। देशवासियों के दिमाग में असली नकली हिंदू मुस्लिम हिंदुस्तान.पाकिस्तान का चश्मा चढ़ा दिया। अतीत पर गौर करें तो पता चलता है कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उस समय कांग्रेस की सरकार कृषि बिल ला रही थी। भाजपा विपक्ष बैठी हुई थी। विपक्ष ने किसानों के हकों के लेकर घूब घडियाले आंसू बहाए थे। नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। नरेंद्र मोदी ने भी किसानों के लिए घडियाले आंसू बहाए थे। भाजपा में बतौर अध्यक्ष अटल बिहरी बाजपेयी और राजनाथ सिंह भी उस समय अध्यक्ष थे इन सबने किसानों हकों के लिए खूब आवाज बुंलद थी। सुषमा स्वराज की विपक्षी की नेता हुआ करती थी किसानों हकों के लिए धरती आसमान एक कर दिया था। मगर अब भाजपा सत्ता में है सब कुछ भूल गई। न किसान दिखाई दे रहा है और न ही किसानों के हक। देश की वित्त मंत्री सीतारमण लहसुन प्याज नहीं खाती और किसानों के लिए क्या बयान दिए गए थे? उनको भी याद रखना जरूरी है। किसानों की आय दोगुनी करने और अच्छे दिन के चक्कर में भोले भाले अन्नदाताओं ने विश्वास कर भाजपा को सत्ता सौंप दी। हरियाणा में 100 एकड़ का भंडारण के लिए अडानी अंबानी ग्रुप का गोदाम बनाया जा रहा है। बताया गया है देश में लगभग 9000 गोदाम बनाए जाएंगे। पिछले 6 सालों में किसानों की पैदा की हुई फसलों के दाम जो पहले 20 थी अब 10 में बिक रही है। अगर सभी का आंकड़ा लगाया जाए तो किसानों पर लगभग 40 प्रतिशत का भार बढ़ा और किसानों के माल की कीमत लगभग 50 प्रतिशत का किसानों को नुकसान हुआ। केंद्र सरकार ढोल पीट रही है किसानों का कर्जा माफ किया गया है। सालाना 6000 रूपये देने से किसानों का अपमान तो है ही समझना यह भी है कितने किसानों को दिया जा रहा है जबकि लगभग 80 प्रतिशत आवश्यक खरीद वस्तुओं पर किसान जीएसटी व टैक्स दे रहा है। अन्नदाता का अपमान जितना मोदी सरकार में हुआ दूसरी सरकारों में नहीं हुआ है।ं नए कृषि कानून से किसान ही नहीं देश की लगभग 80 प्रतिशत जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। किसान अपने माल का भंडारण नहीं कर सकता, कॉर्पोरेट लोग भंडारण कर ज्यादा कीमत जनता से वसूलेगें, जिसका लाभ भाजपा सरकार भी उठाएगी।  बताया गया है कि वर्ष 1976 में कोर्ट के आदेश पर किसान अपने माल को देश में कहीं भी बेच सकता है, यह आदेश


लगातार चला आ रहा है, लेकिन किसान 100 किलोमीटर से ज्यादा जाकर अपने माल को नहीं बेचता है। गहराई से समझा जाए तो मोदी सरकार ने गरीब मजदूर से ज्यादा किसानों को बर्बाद किया है। हर हफ्ते एक प्रोपेगेंडा कानून बनाकर निजी स्वार्थ में देश की जनता पर थोप देते हैं। बुद्धिजीवियों व विपक्षियों को अलगाववादी, खालिस्तानी, पाकिस्तानी और देशद्रोही बता  खूब मनमानी कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियों का अधिकार होता है गलत नीतियों का विरोध करना, चंद गलत लोगों के साथ करोड़ों लोगों को जोड़ना सबसे बड़ा पाप है। यह संविधान का उल्लंघन है, सरकार की जिम्मेदारी है गलत लोगों पर कार्रवाई करना न कि दूसरों पर आरोप लगाना। समझना यह भी है किसान आंदोलन क्या सरकार के नुमाइंदे गलत लोगों को भेज रहे हैं? किसानों की आवाज दबाने के लिए किसानों और नौजवानों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। संविधान में सभी को आंदोलन करने का अधिकार है और इसके लिए जंतर मंतर को चिन्हित किया गया है। बड़े.बड़े आंदोलन देश आजादी के बाद जंतर.मंतर पर होते चले आ रहे हैं, जिसमें किसी भी सरकारों ने रोक नहीं लगाई। ऐसा लगता है अंग्रेजी शासन दोबारा से देश में आ गया है। देश बर्बादी की कगार पर खड़ा है। विदेशी नीति धूमिल नजर आ रही है। गोदी मीडिया, अंधभक्त भाजपा की नजरों में सब चंगा सी अगर यूं ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब भारत देश वर्ल्ड में सबसे गरीब देशों की श्रेणी में आ जाएगा। अंतरराष्ट्रीय यून.ए. से 3 नए कृषि बिलो का विरोध प्रस्ताव दुनिया के सामने आ गया है। कई देशों ने नए कृषि बिलों का विरोध किया है। मोदी जी जानते सब कुछ हैं लेकिन मानते किसी की नहीं है, जिसका कारण सत्ता में बने रहना है। सरकार किसानों से बार.बार वार्ता कर रही है किसानों का पक्ष कानून रद्द एमएसपी पर गारंटी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू और कुछ मुख्य बिंदुओं पर अड़े हैं लेकिन भाजपा के समर्थक कुछ किसान संगठन निजी स्वार्थ में कृषि बिल पर सहमति जता रहे हैं। सरकार बनाने के लिए एम.एल.ए. और एम.पी. तो जरूर खरीदे जा सकते हैं  मगर सच्चा अन्नदाता नहीं खरीदा जा सकता। कृषि बिल के विरोध में स्वार्थी लोगों को अन्नदाता किसान देशद्रोही दिखाई दे रहा है। बताया यह भी गया है कि 11 किसान आंदोलन में शहीद हो चुके हैं मगर सरकार को यह सब कुछ क्यों नहीं दिखाई नही दे रहा है?

लेखकः- चौधरी शौकत अली चेची भारतीय किसान यूनियन ( बलराज  ) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष  हैं।